TM special: मध्यप्रदेश में SC-ST महिला आयोग और निगमों में हुई नियुक्ति, लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद!

निगमों और बोर्डों में भी बड़े स्तर पर की गई नियुक्तियां।
मंत्रालय बल्लभ भवन भोपाल
मंत्रालय बल्लभ भवन भोपाल इंटरनेट
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भोपाल। मध्यप्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला और अन्य विभिन्न आयोगों व निगमों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति कर प्रशासनिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाओं को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खासतौर पर राज्य महिला आयोग में छह साल बाद अध्यक्ष की नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण फैसले के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने रेखा यादव को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया है, जबकि साधना स्थापक को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही रवि मालवीय को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। इन नियुक्तियों को आगामी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हालांकि, महिला आयोग में नियुक्तियों के बावजूद स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। आयोग में कुल छह पद स्वीकृत हैं, जिनमें एक अध्यक्ष और पांच सदस्य होते हैं, लेकिन वर्तमान में अध्यक्ष और एक सदस्य की नियुक्ति के बाद भी चार पद खाली हैं। ऐसे में आयोग का कोरम अभी अधूरा बना हुआ है, जिससे फैसलों की गति और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी बीच ग्वालियर की पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता के नाम को लेकर भी चर्चा रही, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन और आंतरिक राजनीतिक विरोध के चलते उनका नाम फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही एक और सदस्य की नियुक्ति कर कोरम पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

एससी-एसटी आयोग में हुईं नियुक्तियां

राज्य सरकार द्वारा विभिन्न आयोगों में की गई नियुक्तियों में रामलाल रौतेल को अनुसूचित जनजाति (ST) आयोग का अध्यक्ष और कैलाश जाटव को अनुसूचित जाति (SC) आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा राघवेंद्र शर्मा को योग आयोग और प्रवीण शर्मा को युवा आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये नियुक्तियां सामाजिक न्याय, युवा नीति और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में नीतिगत निर्णयों को गति देने के उद्देश्य से की गई हैं। लंबे समय से खाली पड़े इन पदों के कारण कई मामलों में निर्णय लंबित थे, जिनके अब तेजी से निपटने की उम्मीद जताई जा रही है।

निगम मंडल में भी हुईं नियुक्तियां

निगमों और बोर्डों में भी बड़े स्तर पर नियुक्तियां की गई हैं। पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को राज्य वन विकास निगम, केशव सिंह बघेल को पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, के.पी. यादव को स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन, सौभाग्य सिंह को पाठ्यपुस्तक निगम और सत्येंद्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह बोर्ड स्तर पर महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड, केशव भदौरिया को महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड, पंकज जोशी को खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और प्रभु दयाल कुशवाह को कुश समाज कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

कर्मचारी कल्याण समिति में नियुक्ति

इसके अलावा समितियों और मंडलों में भी नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें रमेश चंद्र शर्मा को राज्य कर्मचारी कल्याण समिति, ओम जैन को एमपी हाउसिंग बोर्ड और कौशल शर्मा को महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान की जिम्मेदारी दी गई है।

शिकायतों का जल्द हो सकेगा निपटारा

इन नियुक्तियों का सबसे बड़ा असर उन लाखों शिकायतों पर पड़ने की संभावना है, जो लंबे समय से विभिन्न आयोगों में लंबित पड़ी थीं। विशेष रूप से अनुसूचित जाति आयोग, जनजाति आयोग, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं, जिनमें अत्याचार, भेदभाव, महिला उत्पीड़न और बाल अधिकारों से जुड़े गंभीर मामले शामिल हैं। पदों के खाली रहने के कारण इन मामलों की सुनवाई और निराकरण प्रभावित हो रहा था, लेकिन अब अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति के बाद इन शिकायतों पर जल्द कार्रवाई होने की उम्मीद बढ़ गई है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो ये नियुक्तियां केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधने का भी माध्यम हैं। विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को इन पदों पर बिठाकर सरकार ने एक व्यापक सामाजिक संदेश देने की कोशिश की है। हालांकि, विपक्ष इन नियुक्तियों को राजनीतिक लाभ और कार्यकर्ताओं को साधने का प्रयास बता सकता है, लेकिन आम जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या इन नियुक्तियों के बाद आयोगों की कार्यप्रणाली में वास्तविक सुधार होगा और लंबित मामलों को समय पर न्याय मिल पाएगा।

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