सांथनकुलम कस्टोडियल डेथ केस: मदुरै कोर्ट ने 9 दोषी पुलिसकर्मियों को सुनाई मौत की सजा, जानिए पूरा मामला

पिता-पुत्र की कस्टडी में मौत पर मदुरै कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जयराज और बेनिक्स को मिला इंसाफ, 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा।
Sathankulam custodial death
सांथनकुलम कस्टोडियल डेथ केस में मदुरै कोर्ट का बड़ा फैसला। जयराज-बेनिक्स की हत्या के दोषी 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा। (Ai Image)
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तमिलनाडु: मदुरै की एक अदालत ने सोमवार, 6 अप्रैल को सांथनकुलम कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) मामले में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने इस खौफनाक मामले में दोषी करार दिए गए सभी नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है।

यह सजा मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत द्वारा सुनाए गए उस फैसले के ठीक एक हफ्ते बाद आई है, जिसमें सभी नौ आरोपियों को पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में यातना और मौत के लिए दोषी ठहराया गया था। यह दिल दहला देने वाली घटना जून 2020 में हुई थी।

सजा सुनाते हुए न्यायाधीश मुथुकुमारन ने एक बेहद अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर यही अपराध आम नागरिकों ने किया होता, तो उन्हें सामान्य सजा दी जा सकती थी, लेकिन यहां खुद पुलिसवालों ने ही इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया है।

अदालत ने माना कि यह मामला पुलिस कस्टडी में की गई क्रूर हिंसा का एक स्पष्ट उदाहरण है। पेश किए गए सबूतों से यह साफ हो गया कि पुलिस हिरासत के दौरान पिता-पुत्र को बुरी तरह पीटा गया था। जांच में सामने आया कि इंस्पेक्टर एस. श्रीधर ने इस पूरी हिंसा को उकसाया था, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों ने मारपीट और उसके बाद मामले पर पर्दा डालने में उसका पूरा साथ दिया।

इन सभी पुलिसकर्मियों पर सिर्फ हत्या का ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर आरोप भी साबित हुए हैं। इनमें गंभीर चोट पहुंचाना, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करना और झूठे मामले दर्ज करना शामिल है।

गौरतलब है कि 58 वर्षीय जयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे बेनिक्स को 19 जून 2020 को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन पर कथित तौर पर कोविड-19 लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। इसके कुछ दिनों बाद ही कोविलपट्टी के सरकारी अस्पताल में दोनों की मौत हो गई। बाद में हुई जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि पुलिस ने कस्टडी में उन्हें भयंकर यातनाएं दी थीं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी। सीबीआई ने फोरेंसिक सबूतों, मेडिकल रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर यह साबित किया कि सांथनकुलम पुलिस स्टेशन के अंदर पिता-पुत्र पर लगातार और बेहद क्रूर हमले किए गए। पुलिस स्टेशन में कई जगह मिले खून के धब्बे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशान इस मामले के सबसे पुख्ता सबूत बने।

इस मामले के आरोपियों में से एक विशेष उप-निरीक्षक (स्पेशल सब-इंस्पेक्टर) पॉलदुरई भी शामिल थे। हालांकि, ट्रायल के दौरान ही कोविड-19 से संक्रमित होने के कारण उनकी मौत हो गई थी।

सांथनकुलम की इस घटना ने पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। इसके बाद से ही पुलिस की जवाबदेही और कस्टोडियल हिंसा पर राष्ट्रव्यापी बहस छिड़ गई थी। अब इस सख्त सजा के ऐलान के साथ ही यह मामला अपनी कानूनी प्रक्रिया के अंतिम चरण की ओर बढ़ गया है।

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