MP: मंत्री के चैलेंज के बाद अतिथि विद्वानों ने ‘विद्वान जनता पार्टी’ बनाने का किया ऐलान!

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के कथित चुनावी चैलेंज के बाद VJP की घोषणा, शुजालपुर से चुनाव लड़ने का भी पोस्टर में संकेत
MP: मंत्री के चैलेंज के बाद अतिथि विद्वानों ने ‘विद्वान जनता पार्टी’ बनाने का किया ऐलान!
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भोपाल। मध्य प्रदेश में नियमितीकरण और नौकरी में स्थायित्व की मांग को लेकर चल रहा अतिथि विद्वानों का आंदोलन अब राजनीतिक दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। अतिथि विद्वानों ने ‘विद्वान जनता पार्टी’ (VJP) नाम से राजनीतिक संगठन बनाने और चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। संगठन की ओर से जारी पोस्टर में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के विधानसभा क्षेत्र शुजालपुर का भी जिक्र किया गया है।

VJP के पोस्टर में लिखा गया है कि अतिथि विद्वानों के हितों के लिए उच्च शिक्षा मंत्री के कथित चैलेंज को स्वीकार करते हुए विद्वान जनता पार्टी चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार है। पोस्टर में यह भी लिखा है कि आने वाले समय में शुजालपुर से चुनाव मैदान में उतरा जा सकता है। इंदर सिंह परमार शुजालपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

मंत्री के कथित बयान के बाद राजनीतिक फैसला

अतिथि विद्वान पिछले कई दिनों से नियमितीकरण, नौकरी के स्थायित्व और फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। भोपाल में बड़ी संख्या में अतिथि विद्वानों ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान करीब 200 अतिथि विद्वानों द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर भी अपनी मांगें रखने की खबर सामने आई थी।

17 सितंबर को अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। दिग्विजय सिंह ने सरकार से नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए समयबद्ध नीति बनाने तथा तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग की।

VJP ने बताए अपने मुद्दे

अतिथि विद्वानों की ओर से जारी पोस्टर में सम्मान, नियमितीकरण की गारंटी, सुरक्षित भविष्य और शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को प्रमुख मुद्दों के तौर पर सामने रखा गया है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ‘विद्वान जनता पार्टी’ का औपचारिक रूप से राजनीतिक दल के तौर पर पंजीयन हुआ है या नहीं। साथ ही आगामी चुनावों में संगठन कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा, इसको लेकर भी कोई विस्तृत घोषणा सामने नहीं आई है।

फॉलन आउट प्रक्रिया क्यों है विवाद का विषय?

अतिथि विद्वानों के आंदोलन का मुख्य मुद्दा फॉलन आउट प्रक्रिया है। सरकारी कॉलेज में जब किसी पद पर नियमित सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति या स्थानांतरण होता है, तो वहां पहले से कार्यरत अतिथि विद्वान की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं। अतिथि विद्वान इसी व्यवस्था को रोकने की मांग कर रहे हैं।

उनकी मांग है कि नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व के लिए समयबद्ध नीति बनाई जाए और जब तक यह नीति लागू नहीं होती, तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

2023 के आश्वासन का भी हवाला

आंदोलनकारी अतिथि विद्वान 11 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुई महापंचायत का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि उस समय फॉलन आउट रोकने और अतिथि विद्वानों का भविष्य सुरक्षित करने को लेकर आश्वासन दिया गया था।

इसके अलावा अतिथि विद्वान 10 जुलाई 2026 को भोपाल के रविंद्र भवन में हुए सम्मेलन का भी उल्लेख कर रहे हैं। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में नियमितीकरण और स्थायित्व के लिए नीति बनाने की बात कही गई थी।

28 अगस्त को भी सीएम के सामने रखी थी मांग

अतिथि विद्वानों के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 को उज्जैन में मुख्यमंत्री आवास पर महिला अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को रक्षा सूत्र बांधकर नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने की मांग की थी। आंदोलनकारियों का दावा है कि उस दौरान उन्हें इस संबंध में आश्वासन मिला था।

अब मंत्री के साथ बातचीत के बाद अतिथि विद्वानों ने आंदोलन को राजनीतिक मंच देने का फैसला किया है। VJP का ऐलान इस आंदोलन को सड़क से चुनावी मैदान तक ले जाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, हालांकि पार्टी की औपचारिक स्थिति और चुनावी रणनीति को लेकर आगे की घोषणा का इंतजार है।

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