
भोपाल। अधिक बारिश, खराब मौसम और फसलों में इल्ली के प्रकोप से हुए नुकसान को लेकर मंगलवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। भारतीय किसान संघ के बैनर तले नजीराबाद, बैरसिया और हुजूर क्षेत्र के सैकड़ों किसान 200 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ भोपाल की ओर रवाना हुए। किसानों ने रात में बैरसिया रोड स्थित ईंटखेड़ी में डेरा डाला और वहीं भोजन किया।
किसानों ने बुधवार को भोपाल कलेक्टोरेट का घेराव करने की रणनीति बनाई थी। इसके मद्देनजर रात में ही बड़ी संख्या में किसान ईंटखेड़ी में जमा हो गए। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्टोरेट के मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग कर दी।
रात 10.30 बजे तक डटे रहे किसान
किसान अपनी मांगों को लेकर रात करीब 10.30 बजे तक ईंटखेड़ी में डटे रहे। मौके पर पहुंचे एडीएम प्रकाश नायक ने किसानों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से वीडियो कॉल के जरिए किसानों की बात कराई।
कलेक्टर से करीब 5 मिनट हुई बातचीत
किसानों और कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के बीच वीडियो कॉल पर करीब पांच मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान किसानों ने फसल खराब होने, फसल बीमा की राशि नहीं मिलने सहित अपनी समस्याएं रखीं।
कलेक्टर ने किसानों को उनकी समस्याओं के उचित निराकरण का भरोसा दिलाया। आश्वासन मिलने के बाद किसान प्रदर्शन स्थगित करने पर सहमत हो गए। इसके साथ ही बुधवार को प्रस्तावित कलेक्टोरेट घेराव का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया।
नजीराबाद से निकली थी किसानों की रैली
इससे पहले मंगलवार को किसानों ने नजीराबाद से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ रैली निकाली थी। रैली बैरसिया पहुंची और इसके बाद किसान भोपाल की ओर रवाना हुए। किसानों का कहना था कि वे अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन से जवाब चाहते हैं।
बैरसिया में किसानों ने अधिकारियों की बात मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद बस स्टैंड चौराहे पर बैरसिया एसडीएम को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
सोयाबीन और उड़द की फसल खराब होने का दावा
किसानों का कहना है कि लगातार खराब मौसम, अधिक बारिश और इल्ली के प्रकोप के कारण सोयाबीन, उड़द सहित अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों के मुताबिक कई क्षेत्रों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि 2024-25 का फसल बीमा अभी तक उन्हें नहीं मिला है। उनका कहना है कि फसल नुकसान के बावजूद बीमा राशि नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।
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