
भोपाल। नीट पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अन्य 23 सूत्रीय मांगों को लेकर इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। मंगलवार, 14 जुलाई को छात्र संगठन इस आंदोलन को महाआंदोलन का रूप देंगे। इसके तहत बड़ी संख्या में छात्र टंट्याभील चौराहे से पैदल मार्च निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे, जहां प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपेंगे। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
इस आंदोलन को अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने छात्रों के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन घोषित किया है। पार्टी के पदाधिकारियों ने आंदोलन को युवाओं की आवाज बताते हुए उनके साथ खड़े रहने की बात कही है। आंदोलनकारियों के अनुसार, सीजेपी के दो प्रमुख सदस्य आशुतोष रांका और दीपक बेलियान दिल्ली से इंदौर पहुंच रहे हैं ताकि वे महाआंदोलन में शामिल हो सकें। वहीं पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके के भी आंदोलन में शामिल होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पवन अहिरवार और अरुण बड़ोले ने बताया कि पिछले कई दिनों से छात्र शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। ऐसे में अब आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह 11 बजे सभी छात्र टंट्याभील चौराहे पर एकत्र होंगे। इसके बाद वहां से पैदल मार्च शुरू होगा, जो टॉवर चौराहा, पलासिया चौराहा होते हुए कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचेगा। कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन के बाद छात्रों की 23 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा जाएगा।
आंदोलनकारियों ने बताया कि कुछ दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने वीडियो कॉल के माध्यम से छात्रों से बातचीत की थी। उन्होंने आंदोलन की जानकारी ली और छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा था कि युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। इसी बातचीत के बाद पार्टी ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का फैसला किया। छात्रों का दावा है कि इससे आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर भी है। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। इसलिए सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
आंदोलनकारी छात्रों ने प्रदेशभर के युवाओं और छात्र संगठनों से भी महाआंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे छात्र समुदाय के अधिकारों और भविष्य का आंदोलन है। छात्रों का दावा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा और आगे की रणनीति भी घोषित की जाएगी।
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