
नई दिल्ली: मणिपुर में साल 2027 के लिए प्रस्तावित जनगणना के तहत होने वाले मकान-सूचीकरण (हाउस-लिस्टिंग) अभियान को फिलहाल टाल दिया गया है। राज्य के हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर तक इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
अदालत के इस सख्त निर्देश के कुछ ही घंटों बाद सोमवार को केंद्र सरकार ने भी इस अभियान को स्थगित करने का आधिकारिक निर्णय लिया। अदालत में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने यह पुख्ता आश्वासन दिया है कि एक सितंबर से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया अब तय समय पर शुरू नहीं की जाएगी।
केंद्र की तरफ से साफ किया गया कि रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त जल्द ही मणिपुर में इस अभियान को औपचारिक रूप से टालने के लिए एक नई अधिसूचना जारी करेंगे। यह अहम फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के बहुसंख्यक लोग जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (एनआरसी) लागू करने की लगातार मांग कर रहे हैं।
एनआरसी लागू करने की इस मांग ने हाल ही में काफी उग्र रूप ले लिया था। रविवार शाम को काकचिंग जिले में इसी मांग को लेकर निकाला गया एक मशाल जुलूस हिंसक हो गया। वाबगई, हियांगलाम और आसपास के इलाकों से आए सैकड़ों लोगों ने इस दौरान करीब तीन किलोमीटर लंबा मार्च निकाला था।
गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने 'नो एनआरसी, नो सेंसस' के जमकर नारे लगाए। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) को सुरक्षित तरीके से दोबारा नहीं बसाया जाता, तब तक राज्य में जनगणना का कोई मतलब नहीं है।
जब यह मार्च कीराक डैम के पास पहुंचा, तो पुलिस ने उन्हें रोककर वापस लौटने की चेतावनी दी। आरोप है कि इसके बाद भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस तीखे टकराव में कुछ प्रदर्शनकारी घायल भी हुए हैं।
लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। इसी बैठक में मणिपुर के लोगों की मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जनगणना टालने का बड़ा निर्णय लिया गया।
मणिपुर के मुख्यमंत्री सचिवालय ने बताया कि यह फैसला स्थानीय लोगों की भावनाओं और उनकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस अहम बैठक में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
गृह मंत्री ने इस दौरान राज्य के मौजूदा हालात की भी विस्तार से समीक्षा की। दूसरी तरफ, अदालत में यह पूरा मामला मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर और न्यायमूर्ति ए. गुणेश्वर शर्मा की विशेष खंडपीठ के सामने सुना गया। जनहित याचिका और रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जनगणना रोकने का आदेश पारित किया था।
भारत के उप सॉलिसिटर जनरल के.एच. समरजीत ने केंद्र का पक्ष रखते हुए खंडपीठ को बताया कि रजिस्ट्रार जनरल 7 जनवरी 2026 की उस अधिसूचना में उचित संशोधन करेंगे, जिसमें जनगणना का पूरा कार्यक्रम तय किया गया था। वहीं राज्य सरकार ने भी 22 मार्च की अपनी अधिसूचना के तहत 1 सितंबर से मकान-सूचीकरण शुरू न करने का पक्का वचन दिया है।
केंद्र के औपचारिक आदेश तक यह प्रक्रिया पूरी तरह निलंबित रहेगी। यह कानूनी लड़ाई कंगलेइपाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (केएसए) और इंटरनेशनल पीस एंड सोशल एडवांसमेंट (आईपीएसए) द्वारा दायर जनहित याचिका से शुरू हुई थी।
इसके साथ ही शांता सिंह नहकपम ने भी एक अलग रिट याचिका दाखिल की थी। अदालत ने पाया कि इन सभी याचिकाओं में जनगणना प्रक्रिया और एनआरसी की मांग से जुड़े समान मुद्दे उठाए गए हैं, इसलिए अदालत ने इन्हें एक साथ जोड़ दिया।
याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा समय में जनगणना कराने को लेकर गंभीर चिंताएं जताई थीं। अदालत ने इससे पहले 25 और 28 अगस्त को भी सुनवाई की थी और दोनों सरकारों को अपना रुख साफ करने का समय दिया था।
सुनवाई के दौरान 28 अगस्त को सरकारों के वकीलों ने यह कहते हुए अदालत से थोड़ा समय मांगा था कि इस मामले की जांच उच्चतम स्तर पर चल रही है। जिसके बाद मामले की सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की गई थी।
सोमवार को दिए गए आदेश में अदालत ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ताओं के वकील अदालत में पेश किए गए जवाबों से फिलहाल संतुष्ट नजर आ रहे हैं। अब हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को 12 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले अपनी दलीलें और कागजी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। उसी दिन विशेष पीठ इस मामले को फिर से सुनेगी।
इस बीच, मणिपुर सरकार ने केंद्र के इस फैसले का पूरा श्रेय नागरिक समाज समूहों और भाजपा विधायकों के निरंतर प्रयासों को दिया है। मुख्यमंत्री खेमचंद ने जनता की चिंताओं को ध्यान से सुनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं का विशेष आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में एनआरसी के लिए अभियान चलाने वाले 14 नागरिक समाज संगठनों और भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल की भूमिका की भी जमकर सराहना की। हालांकि, उन्होंने बंद और आम हड़ताल जैसी गतिविधियों के सख्त खिलाफ अपील करते हुए कहा कि इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने नागरिक समाज समूहों से राज्य की सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए सरकार के साथ अपना संवाद जारी रखने का आग्रह किया है।
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