इंदौर में 36 मौतों के आठ महीने बाद भी भागीरथपुरा के जख्म हरे, बिस्तर पर पड़ी पीड़िता को नहीं मिली मदद

दूषित पानी कांड के बाद जिंदगी पटरी पर लौटने का दावा, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी इलाज, मुआवजे और सुरक्षा के इंतजार में; बेटे ने प्लॉट गिरवी रखकर मां का इलाज कराया, हर महीने करीब 40 हजार रुपये का खर्च
इंदौर में 36 मौतों के आठ महीने बाद भी भागीरथपुरा के जख्म हरे, बिस्तर पर पड़ी पीड़िता को नहीं मिली मदद
Published on

भोपाल। भागीरथपुरा की पटेल किराना वाली गली के मुहाने पर स्थित एक मकान में पिछले आठ महीने से जिंदगी जैसे थम गई है। पार्वतीबाई कोंडला बिस्तर पर हैं। सांसें चल रही हैं, लेकिन उन्हें आसपास की दुनिया का होश नहीं है। नलियों के सहारे उन्हें लिक्विड डाइट और दवाइयां दी जा रही हैं। परिवार के लोग हर दिन इस उम्मीद में उनका ख्याल रख रहे हैं कि शायद कभी उनकी हालत सुधरे।

दूषित पानी कांड के बाद बीमार पड़ी पार्वतीबाई की जिंदगी आज भी सामान्य नहीं हो पाई है। परिवार का कहना है कि हादसे के बाद सरकार और प्रशासन की ओर से मदद के दावे तो किए गए, लेकिन उन्हें अब तक न मुआवजा मिला और न ही पार्वतीबाई के उपचार की स्थायी व्यवस्था हो सकी। परिवार अपनी सामर्थ्य के मुताबिक इलाज का खर्च उठा रहा है।

आठ महीने से बेसुध हैं पार्वतीबाई

पार्वतीबाई के बेटे प्रदीप के मुताबिक 28 दिसंबर 2025 को उनकी मां को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें करीब 67 दिन अस्पताल में रहना पड़ा। उपचार का खर्च मेडिक्लेम से निकला, लेकिन अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी उनकी मां पहले जैसी नहीं हो सकीं।

प्रदीप बताते हैं कि वर्तमान में पार्वतीबाई को लगातार दवाइयों और देखभाल की जरूरत है। वे न तो सामान्य तरीके से भोजन कर पा रही हैं और न ही अपने आसपास की स्थिति को समझ पा रही हैं। उनकी देखभाल के लिए परिवार को हर समय किसी न किसी सदस्य की जरूरत रहती है।

इलाज और दवाइयों पर हर महीने करीब 40 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। सीमित आमदनी वाले परिवार के लिए यह रकम जुटाना आसान नहीं है। हालात ऐसे बने कि इलाज जारी रखने के लिए परिवार को अपना प्लॉट तक गिरवी रखना पड़ा।

नर्मदा का पानी भी उबालकर पी रहा परिवार

दूषित पानी की घटना के बाद भागीरथपुरा के लोगों के मन से पानी को लेकर डर खत्म नहीं हुआ है। नगर निगम की ओर से नलों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन कोंडला परिवार आज भी नल का पानी सीधे पीने के बजाय उसे उबालकर इस्तेमाल करता है।

परिवार के लिए पानी अब सिर्फ रोजमर्रा की जरूरत नहीं, बल्कि डर की वजह बन चुका है। आठ महीने बीतने के बाद भी उस घटना की याद लोगों के मन में इतनी गहरी है कि सामान्य नल के पानी पर भरोसा करने में उन्हें हिचक होती है।

जनप्रतिनिधि आते-जाते रहे, मदद का इंतजार खत्म नहीं हुआ

भागीरथपुरा में पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का आना-जाना रहा, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि आर्थिक मदद के मामले में स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।

प्रदीप के मुताबिक परिवार लगातार उपचार का खर्च उठा रहा है। उनका सवाल है कि जब उनकी मां लंबे समय से गंभीर स्थिति में हैं और परिवार को इलाज के लिए संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ी, तो सरकारी स्तर पर वास्तविक सहायता कब मिलेगी?

दूषित पानी ने छीनी कई परिवारों की रोजी-रोटी

भागीरथपुरा की समस्या सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रही। दूषित पानी की घटना ने स्थानीय कारोबार और लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर डाला।

इलाके में कई लोग पानी-पतासे के ठेले लगाकर अपना परिवार चलाते थे। कुछ लोग पानी की बोतलें बेचते थे। दूषित पानी की घटना के बाद लोगों का पानी से जुड़ा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। ग्राहकों का भरोसा टूटा और कमाई के साधन भी कमजोर पड़ गए।

घटना के करीब आठ महीने बाद भी कई परिवार उस आर्थिक झटके से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। बीमारी और इलाज के खर्च ने अलग से परिवारों पर बोझ बढ़ाया है।

कभी चहल-पहल वाली गलियां अब सूनी

भागीरथपुरा में रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना ने इलाके की सामाजिक जिंदगी और माहौल तक बदल दिया।

जिन गलियों में पहले बच्चों की आवाजें और रोजमर्रा की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहां अब पहले जैसी रौनक नजर नहीं आती। पानी से जुड़े काम-धंधे प्रभावित होने के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है।

लोगों के बीच बीमारी और पानी को लेकर बनी आशंका ने भी सामान्य जिंदगी की रफ्तार को प्रभावित किया है।

सड़कें खुदी, रेस्टोरेशन अधूरा

दूषित पानी कांड के बाद इलाके में पुरानी पानी की पाइपलाइन बदली गई। पाइपलाइन बदलने का काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सड़क और अन्य स्थानों का रेस्टोरेशन अब भी सवाल बना हुआ है।

कई जगह सड़कें खुदी हुई हैं। भागीरथपुरा पुलिस चौकी के सामने चौराहे पर नर्मदा लाइन का चैंबर खुला पड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इससे हादसे का खतरा बना हुआ है।

नगर निगम के जल कार्य विभाग की ओर से चैंबर के आसपास सिर्फ एक बेरिकेड लगाया गया है। लोगों का कहना है कि जिस इलाके ने पहले ही पानी से जुड़ी त्रासदी झेली है, वहां बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही चिंता बढ़ाती है।

पाइपलाइन बदलने का काम पूरा, रेस्टोरेशन जल्द

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन बदलने का काम पूरा किया जा चुका है। उन्होंने संबंधित एजेंसी को सड़क और अन्य स्थानों के रेस्टोरेशन का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए जाने की बात कही।

महापौर ने यह भी कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस संबंध में इससे अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

36 मौतों के बाद भी इंतजार जारी

भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड के बाद 36 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। घटना के महीनों बाद भी प्रभावित परिवारों की परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

एक तरफ प्रशासन पाइपलाइन बदलने और पानी की व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ पार्वतीबाई जैसे पीड़ित परिवार इलाज और आर्थिक सहायता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहीं सड़कें अधूरी हैं, कहीं खुले चैंबर हादसे को न्योता दे रहे हैं और कई परिवारों के सामने आज भी रोजी-रोटी का संकट है।

भागीरथपुरा के लोगों के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पानी अब साफ है या नहीं। सवाल यह भी है कि जिन परिवारों ने इस त्रासदी में अपनों को खोया, जिनकी जिंदगी बीमारी और कर्ज में उलझ गई, उन्हें न्याय, मुआवजा और सुरक्षित जीवन कब मिलेगा?

आठ महीने बाद भी पार्वतीबाई बिस्तर पर हैं। उनका परिवार इलाज के लिए संपत्ति गिरवी रख चुका है। और भागीरथपुरा उस दिन का इंतजार कर रहा है, जब सरकारी दावों से आगे बढ़कर पीड़ितों की जिंदगी में वास्तविक राहत दिखाई देगी।

इंदौर में 36 मौतों के आठ महीने बाद भी भागीरथपुरा के जख्म हरे, बिस्तर पर पड़ी पीड़िता को नहीं मिली मदद
MP Flood Alert! अगस्त की विदाई के साथ फिर बिगड़े हालात: चित्रकूट में बांध फूटा, मंदाकिनी 30 फीट उफान पर, पन्ना के कई गांव बने टापू
इंदौर में 36 मौतों के आठ महीने बाद भी भागीरथपुरा के जख्म हरे, बिस्तर पर पड़ी पीड़िता को नहीं मिली मदद
MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस
इंदौर में 36 मौतों के आठ महीने बाद भी भागीरथपुरा के जख्म हरे, बिस्तर पर पड़ी पीड़िता को नहीं मिली मदद
MP में बाल विवाह की तस्वीर बेहद असमान: आगर मालवा में हर दूसरी युवती की शादी 18 से पहले, जानिए क्या है स्थिति?

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com