महापुरुषों के सम्मान में यूपी सरकार का बड़ा कदम: 'डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना' को मिली मंजूरी

योगी सरकार ने 403 करोड़ रुपये की लागत से बाबा साहेब समेत कई महापुरुषों की मूर्तियों को संवारने और सुरक्षित करने की योजना को दी हरी झंडी, 14 अप्रैल से शुरू होगा विशेष अभियान।
Statue of Baba Saheb Dr. Ambedkar. Symbolic picture
बाबा साहब डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा. सांकेतिक तस्वीर
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उत्तर प्रदेश: राज्य सरकार ने सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में बाबा साहेब की मूर्तियों के सौंदर्यीकरण, विकास और रखरखाव के लिए 403 करोड़ रुपये की 'डॉ बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना' की शुरुआत की है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस अहम योजना को हरी झंडी दे दी गई। इस नई रूपरेखा के तहत प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 10 मूर्तियों को संवारने के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की जाएगी।

यह महत्वपूर्ण फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस ऐलान के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने प्रदेश भर में स्थापित अंबेडकर और अन्य महापुरुषों की मूर्तियों के ऊपर 'संरक्षक छतरी' लगाने की बात कही थी।

सरकार की ओर से इस योजना को 14 अप्रैल यानी अंबेडकर जयंती के अवसर पर सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में जनता के बीच ले जाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का दायरा केवल अंबेडकर जी की मूर्तियों तक सीमित नहीं रहेगा।

इसमें सरकारी भूमि, शहरी स्थानीय निकायों और पंचायत क्षेत्रों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित संत रविदास, कबीर दास, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसे प्रमुख समाज सुधारकों की मूर्तियां भी शामिल की जाएंगी।

योजना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय और समाज सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले इन महापुरुषों का सम्मान करना है। इसके साथ ही उन सार्वजनिक स्थलों की दशा को भी बेहतर बनाना है जहां ये मूर्तियां स्थापित हैं। इन स्थलों की सुरक्षा और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए मूर्तियों के ऊपर छतरी लगाने, चारदीवारी के निर्माण, हरियाली विकसित करने और उचित रोशनी की व्यवस्था जैसे सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाएंगे।

सरकार ने प्रत्येक मूर्ति के विकास के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है। अधिकारियों के अनुसार इसके लिए मानकीकृत डिजाइन तैयार किए जाएंगे, लेकिन इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा कि निर्माण कार्यों में स्थानीय कला, मूर्तिकला और वास्तुकला की शैलियों की झलक दिखाई दे।

पहले चरण में उन सभी मूर्तियों को इस योजना का हिस्सा बनाया जाएगा, जिन्हें 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित किया गया है।

इस योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री असीम अरुण ने कहा कि विकास की राह हमेशा चलती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह नई पहल सामाजिक न्याय के प्रतीकों का सम्मान करने के लिए किए जा रहे सरकार के निरंतर प्रयासों का ही एक अहम हिस्सा है।

जब इस कदम को आगामी चुनावों से जोड़कर देखा गया, तो कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि चुनाव एक सतत प्रक्रिया है और इसे विकास कार्यों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में अंबेडकर जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और जनता को इस योजना, चिन्हित स्थानों और प्रस्तावित विकास कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए मंत्री असीम अरुण ने आरोप लगाया कि उस दौर में इन्हीं महापुरुषों का अपमान किया गया था। उनके नाम पर रखे गए जिलों, मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के नाम बेवजह बदल दिए गए थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार सामाजिक न्याय के हर पैरोकार का पूरा सम्मान कर रही है।

सोमवार को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मूर्तियों पर छतरी लगाने की यह घोषणा भाजपा के उस व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत दलित अस्मिता और सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुषों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पार्टी आगामी 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक कई कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करने जा रही है।

पार्टी नेताओं का भी यही मानना है कि इन पहलों का मुख्य मकसद सभी समुदायों के 'महापुरुषों' का सम्मान करने के भाजपा के नजरिए को जमीन पर उतारना और उसे और अधिक मजबूत करना है।

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