
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए बाजार से एक बार फिर 4,500 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से 19 अक्टूबर को तीन अलग-अलग हिस्सों में यह कर्ज लिया गया। इस नई राशि को मिलाकर प्रदेश सरकार का कुल कर्ज 5.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार का कहना है कि ऋण से प्राप्त राशि का इस्तेमाल पूंजीगत कार्यों और अधोसंरचना विकास की परियोजनाओं में किया जाएगा।
इस वित्तीय वर्ष में अब तक 45 हजार करोड़ का कर्ज
वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश सरकार के लिए बाजार से ऋण लेने की सीमा निर्धारित की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिसंबर तक 58,274 करोड़ रुपये की बाजार ऋण सीमा स्वीकृत है। वहीं, 19 अक्टूबर को लिए गए 4,500 करोड़ रुपये के नए ऋण को मिलाकर चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है।
सरकार सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में निर्धारित वित्तीय सीमा के तहत ऋण लेकर विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटा रही है। हालांकि, लगातार बढ़ते कर्ज के बीच सरकारी खर्च, राजस्व और ऋण चुकाने की क्षमता पर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो जाती है।
सड़क, सिंचाई और ऊर्जा परियोजनाओं पर होगा खर्च
वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाजार से लिए गए ऋण का उपयोग मुख्य रूप से पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाता है। इसमें सिंचाई परियोजनाएं, बिजली से जुड़ी अधोसंरचना, सड़कें, एक्सप्रेस-वे, पुल और शहरी विकास के कार्य शामिल हैं।
सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं पर निवेश से प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होता है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जबकि सिंचाई और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से कृषि तथा औद्योगिक उत्पादन को गति मिल सकती है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वृद्धि की संभावना रहती है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने का अनुमान है। पिछले दो दशकों में भी प्रदेश में सड़क, पुल, सिंचाई, ऊर्जा और शहरी अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार निवेश किया गया है।
सरकार कर्ज का पुनर्भुगतान भी कर रही
प्रदेश के ऋण प्रबंधन में सरकार की ओर से मूलधन और ब्याज का समय पर भुगतान करना भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 29,980 करोड़ रुपये के ऋण का पुनर्भुगतान किया था। वहीं, अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक चालू वित्तीय वर्ष में 12,073 करोड़ रुपये का ऋण चुकाया जा चुका है।
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश ने अब तक ऋण और ब्याज का भुगतान निर्धारित समयसीमा में किया है। इससे वित्तीय संस्थाओं के बीच राज्य की साख बनी हुई है और बाजार से ऋण जुटाने में मदद मिलती है।
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