MP-MLA मुकदमों की सुनवाई में देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, निगरानी पोर्टल अपग्रेड करने के कड़े निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमपी-एमएलए मामलों की अनुचित लिस्टिंग पर जताई चिंता, त्वरित सुनवाई के लिए मॉनिटरिंग पोर्टल अपग्रेड करने के आदेश।
इलाहाबाद हाईकोर्ट
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उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसदों और विधायकों से जुड़े उच्च प्राथमिकता वाले आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत का कहना है कि मुकदमों को सूचीबद्ध (लिस्टिंग) करने के अनुचित तरीकों के कारण इन अति-संवेदनशील मामलों की सुनवाई समय पर नहीं हो पा रही है।

जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 'इन रे डेजिग्नेटेड कोर्ट्स फॉर एमपी/एमएलए' नामक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यह अहम टिप्पणी की। बेंच ने पाया कि ऐसे कई महत्वपूर्ण मामलों को या तो गैर-नामित बेंचों के पास भेजा जा रहा है, या फिर दैनिक वाद सूची (कॉज लिस्ट) में उन्हें काफी नीचे धकेल दिया जाता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब मुकदमों को गलत बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाता है, तो उन्हें 'रॉन्गली लिस्टेड' (गलत तरीके से सूचीबद्ध) मार्क कर दिया जाता है, जिससे उनकी सुनवाई पूरी तरह रुक जाती है। भारी रोस्टर में इन मामलों को नीचे रखने से न्यायिक कार्यवाही बाधित होती है और त्वरित निपटारे के मूल उद्देश्य को गहरा धक्का लगता है।

बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य अभियोजन पक्ष के लिए अदालत में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने और समयबद्ध सुनवाई की मांग करने के लिए मामलों की सही लिस्टिंग होना बेहद जरूरी है। निचली अदालतों में चल रहे इन वीआईपी मुकदमों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने अपने मॉनिटरिंग पोर्टल को अपग्रेड करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

पोर्टल में प्रस्तावित बदलावों के तहत अब मुकदमों के हर चरण के लिए ट्रैकिंग पैरामीटर तय किए जाएंगे। इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप अलग-अलग रंगों वाले इंडिकेटर (कलर-कोडेड इंडिकेटर) शामिल होंगे। इसके अलावा, ट्रायल जजों के लिए एक ड्रॉप-डाउन विकल्प भी उपलब्ध होगा, जिसमें वे सुनवाई में होने वाली देरी के कारणों को स्पष्ट रूप से दर्ज कर सकेंगे। साथ ही, पोर्टल पर समय-समय पर स्वचालित (ऑटोमेटेड) ऑडिट रिपोर्ट भी जनरेट होगी।

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (जे) (क्रिमिनल) को एक संशोधित चार्ट पेश करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। इस विस्तृत चार्ट में सभी लंबित मुकदमों के ट्रायल की वर्तमान स्थिति का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य होगा। अब इस अहम मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को की जाएगी।

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