बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर कांग्रेस का प्रदर्शन: CMHO का पुतला फूंका, दोषी अफसरों पर FIR की मांग

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) और महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर कांग्रेस का प्रदर्शन: CMHO का पुतला फूंका, दोषी अफसरों पर FIR की मांग
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भोपाल। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर और परसवाड़ा क्षेत्र में 26 बच्चों की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए रैली निकाली और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने CMHO डॉ. परेश उपलप का पुतला भी फूंका। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की मौत के बाद भी यदि जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह प्रशासन की गंभीर संवेदनहीनता को दर्शाता है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) और महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि बच्चों की मौत के पीछे जिन परिस्थितियों और व्यवस्थागत खामियों की भूमिका रही है, उनकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पार्टी ने मांग की कि संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल उनके पदों से हटाया जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो और पूरे मामले की निष्पक्षता से पड़ताल की जा सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि इसमें उन परिवारों के बच्चों की जान गई है, जिनके लिए सरकार की स्वास्थ्य और बाल संरक्षण व्यवस्था सबसे बड़ी उम्मीद होती है।

जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR दर्ज करने की मांग

शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्याम पंजवानी ने प्रदर्शन के दौरान सरकार से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में स्वास्थ्य विभाग, PHE और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आती है, उनके खिलाफ जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। कांग्रेस ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के आरोप में FIR दर्ज करने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि बच्चों की मौत के मामले में केवल जांच या विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या कर्तव्य में गंभीर चूक सामने आती है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों की मौत को सामान्य घटना मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। प्रत्येक मौत के पीछे की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल व्यवस्था, पोषण, इलाज और प्रशासनिक निगरानी में कहीं गंभीर कमी तो नहीं रही। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच में सामने आने वाले दोषियों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई की जाए।

कार्रवाई नहीं हुई तो 'अर्थी आंदोलन' की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान श्याम पंजवानी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ जल्द कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस अपने आंदोलन को और तेज करेगी। उन्होंने 'अर्थी आंदोलन' शुरू करने की चेतावनी दी। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार प्रशासनिक अधिकारियों को संरक्षण दे रही है और इसी वजह से अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना नहीं, बल्कि उन परिवारों को न्याय दिलाना है जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। पार्टी ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में लगातार बच्चों की मौत का मामला सामने आता है तो सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की जाए, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाई जाए और मौतों के कारणों की वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक जांच कराई जाए।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने हाल ही में बालाघाट जिले के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे को लेकर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जिन आदिवासी परिवारों के घरों में बच्चों की मौत के बाद शोक का माहौल था, वहां मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान स्वागत और राखी बंधवाने जैसी गतिविधियां कराई गईं। कांग्रेस ने इसे पीड़ित परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर निशाना साधा।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऐसे समय में जब परिवार अपने बच्चों को खोने के दर्द से गुजर रहे थे, सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षा थी कि वह उनके दुख को समझे, परिवारों से सीधे संवाद करे और उन्हें न्याय एवं सहायता का भरोसा दिलाए। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रभावित परिवारों की वास्तविक समस्याओं और बच्चों की मौत के कारणों पर पर्याप्त गंभीरता से चर्चा हुई या नहीं।

आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

बालाघाट के बैहर और परसवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को समय पर उपचार, जांच, दवाइयां और पोषण संबंधी सुविधाएं मिलना बेहद जरूरी है। यदि किसी बीमारी या स्वास्थ्य संकट के शुरुआती संकेतों के बावजूद पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए तथा पोषण एवं पेयजल व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा की जाए। पार्टी का कहना है कि केवल अधिकारियों को नोटिस जारी करने या जांच बैठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ उन सभी कारणों को दूर करना होगा, जिनकी वजह से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के परिवार स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।

सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग

कांग्रेस ने 26 बच्चों की मौत के मामले में सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह सामने आना चाहिए कि बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई, संबंधित विभागों ने समय पर क्या कदम उठाए और प्रशासन की ओर से किस स्तर पर निगरानी की गई। कांग्रेस ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए।

फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। सोमवार के प्रदर्शन में पुतला दहन, रैली और सीएमएचओ कार्यालय के घेराव के बाद अब पार्टी ने सरकार को 'अर्थी आंदोलन' की चेतावनी दी है। ऐसे में बालाघाट में 26 बच्चों की मौत का यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और गरमाने के आसार हैं।

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