भोपाल में ANM अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज: रातभर धरने पर डटी रहीं महिलाएं, कोर्ट के आदेश के बाद भी नही मिली नियुक्ति

रातभर जारी इस धरने ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है।
भोपाल में ANM अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज: रातभर धरने पर डटी रहीं महिलाएं, कोर्ट के आदेश के बाद भी नही मिली नियुक्ति
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भोपाल। राजधानी के जयप्रकाश हॉस्पिटल परिसर में ANM अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन अब लगातार तेज होता जा रहा है। भोपाल के तुलसी नगर स्थित संचालक स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय के बाहर मंगलवार को दिनभर धरना देने के बाद भी 20 से 25 महिला अभ्यर्थी पूरी रात वहीं डटी रहीं। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद महिलाओं ने खुले आसमान के नीचे धरना जारी रखा और सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करती रहीं। देर रात तक जारी इस आंदोलन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी तैनात किया गया, ताकि किसी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि जब तक उन्हें नियमित नियुक्ति यानी जॉइनिंग नहीं दी जाती, तब तक वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगी। अभ्यर्थियों के अनुसार उन्होंने वर्ष 2023 में ANM के नियमित पदों के लिए आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई तरह की विसंगतियां सामने आने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनका दावा है कि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने के बावजूद अब तक विभाग ने उन्हें नियुक्ति नहीं दी है। इससे नाराज होकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि न्यायपालिका के आदेशों की अनदेखी की जा रही है और विभाग जानबूझकर मामले को लंबित रख रहा है।

पहले भी कर चुके प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी ममता हिरवे ने बताया कि यह पहला आंदोलन नहीं है। इससे पहले भी कई बार अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले 9 दिन तक आमरण अनशन भी किया गया था, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने जल्द जॉइनिंग देने का आश्वासन दिया था। लेकिन करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ममता के मुताबिक अभ्यर्थियों को सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, जबकि नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा जारी सूचियां केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और उनमें उन्हीं उम्मीदवारों के नाम बार-बार दोहराए जा रहे हैं, जिनकी नियुक्ति पहले ही हो चुकी है।

धरने में शामिल महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से संविदा के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं में काम कर रहीं और कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी सेवाएं दे चुकी कई अभ्यर्थियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि महामारी के कठिन दौर में उन्होंने जोखिम उठाकर काम किया, लेकिन अब स्थायी नियुक्ति के समय उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विभाग लगातार “आश्वासन का लॉलीपॉप” दे रहा है, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं निकल रहा।

रातभर जारी इस धरने ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। महिला अभ्यर्थियों के लगातार डटे रहने से आंदोलन अब बड़े स्वरूप की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारी साफ तौर पर कह रहे हैं कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

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