उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में 11 अक्टूबर को हुए एक कथित विवाद ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में महिला कांग्रेस की नेता ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
इस घटना के बाद ममता चौधरी ने आरोप लगाया है कि अजय राय के समर्थकों ने उनके और अन्य महिला कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की। पार्टी नेताओं के अनुसार, यह पूरा हंगामा तब हुआ जब नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा और नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने के लिए कार्यालय पहुंचने वाले थे। आरोप है कि अजय राय के अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचते ही महिला कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया।
सोमवार को इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए, जिसने विवाद को और तूल दे दिया। इन वीडियो में राज्य महिला कांग्रेस के मध्य क्षेत्र की अध्यक्ष ममता चौधरी कथित तौर पर यह कहती सुनाई दे रही हैं कि वह अजय राय का चेहरा नहीं देखना चाहतीं। इसके तुरंत बाद अजय राय उन्हें "अपनी औकात में बात करो" कहते हुए सुने जा सकते हैं।
इस मामले पर सोमवार को मीडिया से बात करते हुए 47 वर्षीय ममता चौधरी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने दावा किया कि वह केवल महिला कार्यकर्ताओं के साथ हो रही धक्का-मुक्की का कड़ा विरोध कर रही थीं और उनकी अजय राय से सीधे कोई बात नहीं हो रही थी। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि बात इतनी कैसे बिगड़ गई और उन पर जूते-चप्पल फेंकने की नौबत क्यों आ गई।
ममता ने आगे कहा कि अगर उन्होंने कुछ गलत कहा था, तो एक वरिष्ठ नेता होने के नाते अजय राय उन्हें सिर्फ डांट सकते थे। इस पूरी घटना को दलितों और महिलाओं पर हमला करार देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें कांग्रेस पर पूरा भरोसा है, क्योंकि चंद गलत लोगों के कारण पूरी पार्टी को बदनाम नहीं किया जा सकता।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। इस घटना ने लगभग दो दशकों से पार्टी संगठन में सक्रिय दलित नेत्री ममता चौधरी को अचानक सुर्खियों में ला दिया है।
ममता चौधरी का राजनीतिक सफर साल 2006 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने मालवीय नगर से लखनऊ नगर निगम का चुनाव लड़ा था। तब से वह लगातार चार बार पार्षद चुनी जा चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 2017 और 2023 में नगर निगम सदन में कांग्रेस नेता के रूप में भी अहम जिम्मेदारी निभाई है।
साल 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा के 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान के तहत चुनी गईं खास उम्मीदवारों में ममता भी शामिल थीं। उन्होंने मोहनलालगंज की आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें 2,990 वोट मिले थे। विधानसभा चुनाव के एक साल बाद ही उन्हें उत्तर प्रदेश में महिला कांग्रेस के मध्य क्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।
ममता चौधरी मूल रूप से उन्नाव के एक पुराने कांग्रेसी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और लखनऊ उनका ससुराल है। उनकी शुरुआती पढ़ाई बहरीन के इंडियन स्कूल से हुई है, जबकि उन्होंने डीएवी पीजी कॉलेज से अंग्रेजी में डिग्री हासिल की है। उनके साथ काम कर चुके कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वह हमेशा बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं।
महिला कांग्रेस में उनका मौजूदा कार्यकाल संगठनात्मक अनिश्चितताओं के बीच गुजर रहा है। पिछले साल कमेटी भंग कर दी गई थी और अब तक किसी नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस संगठनात्मक खालीपन ने भी ममता चौधरी और अजय राय के बीच गुटबाजी और तनाव को बढ़ाने का काम किया है।
रविवार को हुई इस घटना की गंभीरता को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस जांच समिति का नेतृत्व उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और प्रमुख दलित नेता बृजलाल खबरी कर रहे हैं। बसपा के पूर्व नेता रहे खबरी ने बताया है कि यह समिति मामले की गहराई से जांच कर रही है और एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व को सौंपेगी।
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