
भोपाल। राजधानी भोपाल में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन 30वें दिन भी जारी है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय के सामने चल रहे प्रदर्शन के बीच राजगढ़ के ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत का निर्जल अनशन नौवें दिन में पहुंच गया है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, लगातार पानी नहीं पीने के कारण नरेंद्र की तबीयत गंभीर हो गई है और वे कई बार बेहोश हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग वर्ग-2 में कम से कम 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाने के साथ दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की है। उनका कहना है कि सीमित पदों के कारण परीक्षा में सफल होने के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी के सामने उठा मुद्दा
इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान शिक्षक भर्ती आंदोलन का मुद्दा भी सामने आया। इंदौर निवासी अभ्यर्थी दीप्ति सिंह ठाकुर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को नरेंद्र राजपूत के निर्जल अनशन और उनकी बिगड़ती तबीयत की जानकारी दी।
दीप्ति ने बताया कि नरेंद्र की हालत गंभीर है और उन्हें उल्टियां हो रही हैं। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें भी आंदोलन में बुलाया जाए। दीप्ति ने जवाब दिया कि वे उनका इंतजार करेंगे।
इंदौर के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद किया और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उनकी बातें सुनीं।
नरेंद्र बोले- ‘हम मोदीजी को ढूंढ रहे हैं’
अनशन पर बैठे नरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही है।
नरेंद्र के मुताबिक, छात्र भीख मांगने नहीं बल्कि अपने अधिकार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत शिक्षक भर्ती और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों से हुई थी, लेकिन अब यह संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ गया है।
आवाज के बदले लाठी-डंडे से हमें मारा जा रहा
नरेंद्र राजपूत ने कहा कि अपनी मांग रखना और अपनी बात कहना छात्रों का अधिकार है। उनका कहना है कि यदि अपनी आवाज उठाने पर छात्रों को लाठी-डंडों का सामना करना पड़े, तो यह उनके अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अपने अधिकार और अपनी आवाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
नरेंद्र ने पहले ही जिम्मेदारी तय करने की बात कही
आंदोलनकारियों के अनुसार, नरेंद्र राजपूत पहले ही यह कह चुके हैं कि अगर अनशन के दौरान उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिम्मेदार होंगे।
हालांकि, ये आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए आरोप और उनका दावा है। संबंधित अधिकारियों या सरकार की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
बारिश के बीच रात तक जारी रहा प्रदर्शन
अभ्यर्थियों के मुताबिक, गुरुवार-शुक्रवार की रात करीब 1:30 बजे तक भी डीपीआई के सामने उनका प्रदर्शन जारी रहा। बारिश के कारण धरना स्थल पर अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लगातार बारिश के चलते ठीक से सोना भी मुश्किल हो गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि एक महीने से आंदोलन जारी रहने के बावजूद उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य संकट बना आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू
30 दिन के आंदोलन के बीच नरेंद्र राजपूत का नौ दिन से चल रहा निर्जल अनशन अब सबसे गंभीर स्थिति बन गया है। आंदोलनकारियों का दावा है कि नरेंद्र की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और वे कई बार बेहोश हो चुके हैं।
साथी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने नरेंद्र को अनशन खत्म करने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन वे मांग पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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