
नई दिल्ली- धुरंधर 2 (Dhurandhar 2: The Revenge) 19 मार्च को थिएटर्स में रिलीज हुई। रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल और अक्षय खन्ना अभिनीत यह एक्शन थ्रिलर फिल्म आदित्य धर द्वारा निर्देशित है। Jio Studios और B62 Studios की प्रोडक्शन में बनी यह 3 घंटे 30 मिनट से 3 घंटे 52 मिनट लंबी फिल्म हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज हुई। पहले ही दिन से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए दो दिनों में भारत में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। लेकिन रिलीज के 24 घंटे बाद ही फिल्म विवादों में घिर गई। दर्शक, फिल्म समीक्षक और राजनेता ठीक द केरला स्टोरी की तरह इसे एक प्रोपेगैंडा फिल्म बता रहे हैं ।
समाजवादी पार्टी ने फिल्म की खुलकर आलोचना की। SP के वरिष्ठ नेता एस.टी. हसन ने मोरादाबाद में प्रेस से बात करते हुए कहा कि फिल्म में अतीक अहमद को पाकिस्तान की ISI से सीधे जोड़ना “पब्लिसिटी स्टंट” है। उन्होंने कहा, “आप ड्रम बजाकर चैनलों पर चला सकते हैं, पब्लिक एक्साइटेड हो जाएगी। उनका फिल्म सफल हो गई।” हसन ने आगे कहा, “इतना इंसल्ट करने से कोई फर्क नहीं पड़ता… बस फिल्म हिट करवानी है।”
समाजवादी पार्टी मीडिया सेल और पार्टी के आधिकारिक अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट्स में कहा गया, " 5 बार के विधायक और पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को पुलिस कस्टडी में, मीडिया कैमरों के सामने हत्या हो जाती है - पूरा देश LIVE देखता है। हमलावर फर्जी मीडिया बनकर आते हैं, नजदीक से गोली मारते हैं, और मौके पर ही सरेंडर कर देते हैं। सवाल आज भी वही हैं: इतनी भारी पुलिस सुरक्षा के बीच ये चूक कैसे हुई? इंटेलिजेंस इनपुट थे या नहीं? जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई? इसके बाद भी प्रोपेगेंडा फिल्म में पूरी कहानी को एक लाइन में समेट दिया जाता है “आतंकी”। @AdityaDharFilms अगर सच में हिम्मत है, तो किसी दूसरे प्रभावशाली बाहुबली पर भी इसी तरह का लेबल लगाकर दिखाओ…फिर पता चलेगा सिनेमा कितना “न्यूट्रल” है।"
फिल्म में नोटबंदी 2016 को ISI और दाऊद इब्राहिम के फेक करेंसी रैकेट को कुचलने का “मास्टरस्ट्रोक” बताया गया है। PM मोदी के ऐलान का फुटेज भी इस्तेमाल किया गया। लेकिन सबसे बड़ा विवाद DGP वाले सीन का है। फिल्म में अजीत डोभाल वाले किरदार (आर. माधवन) को UP DGP प्रशांत कुमार से मिलकर अतीक अहमद को गिरफ्तार कराते दिखाया गया – नोटबंदी से पहले।
हकीकत: नवंबर 2016 में उत्तर प्रदेश के DGP सैयद जावेद अहमद थे (1 जनवरी 2016 से नियुक्त)। प्रशांत कुमार (1990 बैच IPS) उस समय DGP नहीं थे। वे फरवरी 2024 में एक्टिंग DGP बने और मई 2025 में रिटायर हुए। यह टाइमलाइन गलती सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है।
फिल्म में 'आतिफ अहमद' को ISI टेरर फंडिंग का नोड दिखाया गया है। दर्शक पूछ रहे हैं – “Ilyas Kashmiri 2011 में मर चुका था, अतीक 2023 में, फिर भी फिल्म में दोनों को जोड़ा गया?”
फिल्म में एक किरदार ‘आतिफ अहमद’ दिखाया गया है, जिसे कई लोग उत्तर प्रदेश के चर्चित गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद से प्रेरित मान रहे हैं। कहानी में इस किरदार को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़ा हुआ दिखाया गया है।
अतीक अहमद (जन्म 10 अगस्त 1962, प्रयागराज) 1979 से 100-160 से ज्यादा क्रिमिनल केसों में नामजद थे। इंटर-स्टेट गैंग 227 के सरगना, हत्या, किडनैपिंग, एक्सटॉर्शन और लैंड ग्रैब के आरोप। 2005 में BSP MLA राजू पाल की हत्या और 2006 में गवाह उमेश पाल का किडनैपिंग – इन्हीं केसों में उन्हें लाइफ सेंटेंस हुई थी।
15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज सेंट्रल जेल से कोर्ट मेडिकल चेकअप के लिए ले जाते समय पुलिस कस्टडी में उनकी और भाई अशरफ की हत्या हो गई। तीन हमलावर – लवलेश तिवारी (22), मोहित उर्फ सनी (23) और अरुण मौर्य (18) – ने मीडिया कैमरों के सामने पॉइंट ब्लैंक फायरिंग की। तीनों मौके पर गिरफ्तार। UP पुलिस और आधिकारिक रिकॉर्ड्स में अतीक को कभी ISI से जोड़ा नहीं गया। उनका एम्पायर मुख्य रूप से प्रयागराज और UP का था।
फिल्म में इन तथ्यों को “आतंकी” लेबल में समेट दिया गया, जिसे SP नेता हसन ने “इंसल्ट” बताया। पूर्व राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने फिल्म के इस हिस्से पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे खतरनाक प्रवृत्ति करार दिया है।त्यागी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना आधिकारिक पुष्टि के इस तरह के संबंध दिखाना गंभीर और चिंताजनक है। उनके मुताबिक, ऐसे चित्रण समाज में गलत संदेश दे सकते हैं और सरकार को इस पर सख्त रुख अपनाना चाहिए।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फिल्म को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की फिल्मों में जो घटनाएं और कथानक दिखाए जा रहे हैं, वे वास्तविकता से काफी दूर हैं और आम जनता इन्हें सच मानकर स्वीकार नहीं करेगी। मसूद का मानना है कि सिनेमा का समाज पर प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन दर्शक अब पहले से अधिक जागरूक हो चुके हैं और वे वास्तविकता तथा काल्पनिक प्रस्तुति के बीच फर्क समझते हैं।
मसूद ने कहा, "यह बकवास कौन देखेगा? कौन इस पर यकीन करेगा? प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की और इसने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। प्रधानमंत्री मोदी के ऐसे बेवकूफी भरे फैसलों की वजह से देश को नुकसान हुआ। आप इसकी बड़ाई कर रहे हैं... अगर आपको कुछ बड़ाई करना ही है, तो दिखाएं कि इंदिरा जी ने निक्सन को कैसे जवाब दिया था। प्रधानमंत्री मोदी अडानी और खुद को बचाने के लिए ट्रंप के सामने हाथ जोड़कर खड़े हैं। उन्हें पता है कि देश को नुकसान हो रहा है, लेकिन फाइलें हैं इसलिए वे मजबूर हैं
द इंडियन एक्सप्रेस की शुभ्रा गुप्ता ने 2/5 स्टार दिए। कई रिव्यूअर्स ने लिखा – “अधिक खून-खराबा, अधिक हिंसा और खुला प्रोपेगैंडा… इंसानियत का खामोश खर्च भूल गए।” अनेक एनालिटिकल रिपोर्ट्स में भी इसे “propaganda film” का दर्जा दिया गया।
बिहार के ओबीसी यूथ लीडर प्रतीक पटेल कहते हैं, " Dhurandhar 2 फ़िल्म के अनुसार जब अतीक अहमद पाकिस्तानी एजेंट था, वो आतंकवादी था, तब देश के संसद भवन में उन्हें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के द्वारा श्रद्धांजलि क्यों दिया जा रहा था..?
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट उज़मा परवीन कहती हैं, " नोट बंदी का सीन हो या अतीक अहमद की हत्या का सीन दोनों को सरकार का मास्टर स्ट्रोक साबित करने का काम किया है। आखिरकार वही नफरती और इतिहास को तोड़मरोड़कर अपने मुताबिक नजरिया सेट करके धुरंधर 2 जनता के सामने परोस दी गई हैं। लेकिन Dhurndhar 2 फिल्म ने साबित कर दिया है कि सरकार की दलाली में अब Bollywood भी उतर गया हैं ,जो वर्तमान परिस्थितियों को देखकर सरकार की चाटुकारिता में मस्त नजर आ रहा हैं।"
पत्रकार जाकिर अली त्यागी भी यही कहते हैं, " अगर धुरंधर 2 फिल्म में पूर्व सांसद अतीक अहमद को पाकिस्तानी जासूस दिखाया गया है तो देश कि संसद ने 5 बार विधायक 1 बार सांसद रहे अतीक अहमद को श्रद्धांजलि क्यों दी थी? क्यों 788 सांसदों ने 6 बार संवैधानिक पद पर रहने वाले अतीक अहमद की हत्या के बाद उनके सम्मान में खड़े होकर 2 मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी थी?"
पत्रकार समर राज कहते हैं, " धुरंधर मूवी बनाने वालों पर इसलिए केस होना चाहिए मनगढ़ंत कहानी बनाते हैं,काल्पनिक कैरेक्टर्स का पाकिस्तान से संबंध दिखाते हैं फिर अचानक असल सीन फिल्माने लगते हैं। फिक्शन और फैक्ट मिलाकर प्रोपेगेंडा चलाते हैं।"
AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि मुसलमानों को बदनाम करने के लिए 'धुरंधर 2' बनाई गई है। इस तरह की फिल्में सिर्फ एक साजिश के तहत बनाई जाती हैं, ताकि देश में नफरत फैलाई जा सके। वारिस पठान ने आगे कहा कि इससे पहले भी कई प्रोपेगेंडा फिल्में बनाई जा चुकी हैं। ऐसी फिल्में बनाकर सिर्फ पैसा बनाया जा रहा है, फिल्म मेकर्स को इस बात की परवाह नहीं है कि इससे समाज में क्या प्रभाव पड़ेगा। वे सिर्फ पैसा कमाने के लिए फिल्मों के माध्यम से झूठ, नफरत और प्रोपेगेंडा दिखाते हैं।
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