
मुंबई: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित 'थर्ड मुंबई' प्रोजेक्ट को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। पूर्व न्यायाधीश और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता बी.जी. कोल्से पाटिल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि तीसरी मुंबई का निर्माण केवल उनकी लाशों पर ही होगा। उन्होंने किसानों की एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सभी उपस्थित लोगों से इस परियोजना का पुरजोर विरोध करने की शपथ लेने का आह्वान किया।
यह महत्वपूर्ण बैठक रविवार (7 जून, 2026) को 'एमएमआरडीए केएससी नवनगर (थर्ड मुंबई) विरोधी समिति' द्वारा रायगढ़ में आयोजित की गई थी। सभा में कोल्से पाटिल ने वर्तमान व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज हमारी लड़ाई एक अलग स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि पहले जज, वकील और पुलिस अपना काम ईमानदारी से करते थे, लेकिन आज सत्ता में बैठे राजनेता पूरी तरह से बेशर्म हो चुके हैं।
ज्ञात हो कि कोल्से पाटिल ने साल 2006 में भी विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के खिलाफ किसानों और आदिवासियों के एक बड़े आंदोलन का सफल नेतृत्व किया था।
'थर्ड मुंबई' जिसे कर्नाला-साई-चिरनेर (केएससी) न्यू टाउन के नाम से भी जाना जाता है, एक बेहद विशाल परियोजना है। यह प्रोजेक्ट 323 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में फैला है, जिसकी जद में रायगढ़ जिले के उरण, पनवेल और पेन तालुका के 124 गांव आ रहे हैं।
इस इलाके को रणनीतिक रूप से अटल सेतु रोड के जरिए मुंबई से जोड़ा जाना है। लेकिन इस पूरी योजना का प्रबंधन कर रही अथॉरिटी 'एमएमआरडीए' द्वारा तय किए गए मुआवजे के प्रावधानों को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है।
इसी साल मार्च में जारी किए गए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, मुआवजे की एक अलग व्यवस्था तय की गई है। इसके तहत जमीन मालिकों को उनकी बेची गई भूमि के बदले 22.5 प्रतिशत विकसित जमीन देने का प्रावधान है।
इसके अलावा, किसानों को फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) के रूप में भी मुआवजे का विकल्प दिया गया है, जिससे स्थानीय लोग बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं।
सभा के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि रायगढ़ में सरकार द्वारा लगातार जमीन हड़पने की कोशिशें की जा रही हैं। उनका मानना है कि सरकार किसानों को अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर कर रही है ताकि बड़े कॉरपोरेट घरानों, ठेकेदारों और एजेंटों को इसका सीधा फायदा पहुंचाया जा सके।
इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता उल्का महाजन ने सत्ताधारी सरकार की कड़ी आलोचना की। महाजन ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कानूनों को ताक पर रख दिया गया है और लोकतंत्र व संवैधानिक मर्यादाएं पूरी तरह से गायब हैं।
पेन क्षेत्र की सक्रिय कार्यकर्ता नंदा म्हात्रे ने एमएमआरडीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्राधिकरण ने जल्दबाजी में लोगों से आपत्तियां तो मंगवा लीं, लेकिन उन पर कोई सुनवाई आयोजित नहीं की गई। म्हात्रे के मुताबिक, एमएमआरडीए ने केवल उन्हीं आपत्तियों को अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जो उनके लिए सुविधाजनक थीं, जबकि सभी चुनौतीपूर्ण और समस्याग्रस्त मुद्दों को जानबूझकर दरकिनार कर दिया गया।
समिति के प्रतिनिधि और स्थानीय किसान रूपेश पाटिल ने अपने साथी किसानों को सतर्क करते हुए उन्हें किसी भी तरह के प्रलोभन में न फंसने की सख्त सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे लालच उनके घरों और पुश्तैनी जमीनों को हमेशा के लिए बर्बाद कर देंगे।
पाटिल ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर आज हम अपनी जमीन बेच देते हैं, तो भविष्य में आधा गुंठा जमीन भी नहीं खरीद पाएंगे। उन्होंने चेताया कि अब यह इलाका केवल खेती की जमीन नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बहुत बड़ा रियल एस्टेट हब बन चुका है।
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