
नई दिल्ली: जम्मू में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान विरोध प्रदर्शन करने वाले एक प्रमुख आदिवासी नेता को अब गंभीर कानूनी आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बाद गिरफ्तार किए गए इस नेता पर हत्या का प्रयास, दंगा करने और घातक हथियार रखने जैसे संगीन मामले दर्ज किए हैं।
यह घटना 1 जून को बांधी-रगुड़ा गांव में हुई थी। प्रशासन ने यहां एक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हुए आदिवासियों से जुड़ी 32 संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया था। इसी प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ आदिवासी नेता तालिब हुसैन चौधरी ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
इस गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग उठाई है। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा कि गरीब और हाशिए पर पड़े आदिवासी समुदाय के हकों की लड़ाई लड़ने के कारण एक सामाजिक कार्यकर्ता को जेल में डाल दिया गया है।
जम्मू के बाग-ए-बाहु पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के अनुसार, तालिब हुसैन चौधरी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इन धाराओं में 109, 126(2), 121, 132, 191(2), 191(3), 190, 125 और 125(2) शामिल हैं। ये मुख्य रूप से हत्या के प्रयास, लोक सेवक पर हमला कर गंभीर चोट पहुंचाने, हथियारों के साथ दंगा करने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित हैं। चौधरी पीडीपी के सक्रिय सदस्य भी हैं।
पुलिस का दावा है कि घटना वाले दिन शाम करीब 4 बजे बांधी-रगुड़ा में 100 से 150 लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। इस भीड़ का नेतृत्व तालिब हुसैन चौधरी, मौलवी माखन दीन और कुछ अन्य स्थानीय नेता कर रहे थे। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इन लोगों ने बिना किसी पूर्व अनुमति के राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर मार्च करने की कोशिश की।
अधिकारियों के मुताबिक, इस गैरकानूनी जमावड़े से सार्वजनिक आवाजाही बुरी तरह बाधित हुई और इलाके की शांति व्यवस्था भी बिगड़ गई। पुलिस अधिकारियों और कार्यकारी मजिस्ट्रेट (तहसीलदार खास जम्मू) ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक तितर-बितर होने की कई बार अपील की। पुलिस का कहना है कि इन चेतावनियों के बावजूद भीड़ ने अपनी गतिविधियां बंद नहीं कीं।
पुलिस ने आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने और आम जनता को उकसाने की एक पूर्व-नियोजित साजिश थी। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हिंसक भीड़ ने कथित तौर पर भारी पथराव किया। एफआईआर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुलिस दल पर पत्थरों और अन्य घातक चीजों से जानलेवा हमला किया गया, जिसका मकसद पुलिसकर्मियों की जान लेना और उन्हें गंभीर चोट पहुंचाना था।
इस हिंसक झड़प के परिणामस्वरूप कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चोटें आई हैं। घायल होने वालों में एसडीपीओ सिटी ईस्ट जम्मू, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और बाग-ए-बाहु पुलिस स्टेशन के एसएचओ सहित कई अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।
वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पुलिस की इस पूरी थ्योरी पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सिधरा में हुई इस मनमानी तोड़फोड़ के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च निकालने वाले एक प्रमुख नेता को अपराधी की तरह पेश करने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
मुफ्ती ने चेतावनी दी कि ऐसी दमनकारी कार्रवाइयां उन गुज्जर-बकरवाल समुदायों के बीच एक डरावना और नकारात्मक संदेश भेजती हैं, जो हमेशा भारत के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। उन्होंने अंत में एक बार फिर तालिब को तुरंत रिहा करने की जोरदार वकालत की।
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