MP भोपाल के बड़े तालाब पर एक्शन: 400 से अधिक अतिक्रमण चिन्हित, 12 दिन में बड़े पैमाने पर चलेगा बुलडोजर

एफटीएल और 50 मीटर दायरे में बने कोठी-बंगले, मैरिज गार्डन से लेकर झुग्गियों तक पर कार्रवाई तय; 10 से 21 अप्रैल तक रोजाना अभियान
भोपाल का बड़ा तालाब.
भोपाल का बड़ा तालाब.
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भोपाल। मध्यप्रदेश के भोपाल शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़े तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। पिछले कई वर्षों से जारी इस अभियान को अब निर्णायक रूप देने की तैयारी की गई है। हालिया सीमांकन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बीते एक दशक में तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) और उसके 50 मीटर के दायरे में 400 से अधिक छोटे-बड़े निर्माण खड़े हो चुके हैं। इनमें कच्चे-पक्के मकान, आलीशान कोठियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मैरिज गार्डन और अस्थायी ढांचे तक शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी को लाल निशान लगाकर चिन्हित कर लिया है और अब इन्हें हटाने के लिए चरणबद्ध कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

प्रशासन ने इस बार अतिक्रमण हटाने के अभियान को महज औपचारिकता न बनाकर ठोस परिणाम देने के उद्देश्य से 12 दिन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसकी शुरुआत 6 अप्रैल को भदभदा चौराहे से की गई, जहां नौ दुकानों समेत कई अवैध निर्माणों को जमींदोज किया गया। हालांकि पहले भी इस तरह की कार्रवाई शुरू होकर बीच में ठप हो चुकी है, लेकिन इस बार अधिकारियों का दावा है कि अभियान को अंत तक पहुंचाया जाएगा। 10 अप्रैल से 21 अप्रैल तक लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई की जाएगी, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों के आलीशान बंगले और व्यावसायिक निर्माण भी शामिल हैं।

अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटेंगें

दरअसल, फरवरी माह में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान बड़े तालाब के संरक्षण को लेकर सख्त निर्णय लिए गए थे। इस बैठक में सांसद आलोक शर्मा और कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह सहित राजस्व, नगर निगम, वन विभाग, टीएंडसीपी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में तय किया गया था कि तालाब के एफटीएल और उसके 50 मीटर दायरे का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन किया जाएगा और उस दायरे में आने वाले हर तरह के अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसके बाद 25 फरवरी से सीमांकन की कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें संत हिरदाराम नगर और टीटीनगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण चिन्हित किए गए।

संत हिरदाराम नगर वृत्त में वीआईपी रोड, खानूगांव, हलालपुर, बेहटा, बोरवन और लाऊखेड़ी जैसे क्षेत्रों में सीमांकन के दौरान 250 से अधिक निर्माणों पर लाल निशान लगाए गए। इनमें कोचिंग संस्थान, शासकीय और निजी बंगले, डेयरी, मैरिज गार्डन, फैक्ट्रियां, नर्सरी और झुग्गियां शामिल हैं। वहीं टीटीनगर वृत्त में सूरजनगर, प्रेमपुरा और गौरा गांव जैसे क्षेत्रों में 150 से अधिक निर्माण चिन्हित किए गए। यहां कोठियां, फार्म हाउस, रिसॉर्ट, धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टोरेंट, पार्क, बोट क्लब और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े निर्माण सामने आए हैं। इन सभी का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर प्रशासन को सौंप दिया गया है।

21 अप्रेल तक चलेगी कार्यवाही

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को व्यवस्थित ढंग से अंजाम देने के लिए दिनवार योजना बनाई गई है। 10 अप्रैल को हलालपुर से शुरुआत होगी, जहां नगर निगम अवैध निर्माणों को हटाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल को कोहेफिजा क्षेत्र, 12 और 13 अप्रैल को सेविनयां गौंड, 15 और 16 अप्रैल को संत हिरदाराम नगर, 17 अप्रैल को तहसील हुजूर के ग्रामीण क्षेत्र, 18 और 19 अप्रैल को टीटीनगर और 20-21 अप्रैल को फिर संत हिरदाराम नगर व हुजूर क्षेत्र में कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीमें मौके पर मौजूद रहेंगी ताकि किसी भी तरह की बाधा को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।

तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को रखा जाएगा सुरक्षित

इस पूरे अभियान के पीछे प्रशासन का मुख्य उद्देश्य बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को सुरक्षित करना और उसके प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, एफटीएल और उसके आसपास के क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण से तालाब की जलधारण क्षमता प्रभावित होती है और जलस्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा, प्रदूषण और अवैध गतिविधियों के चलते तालाब का पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ रहा है, जो लंबे समय में शहर के जल संकट को बढ़ा सकता है।

अपर कलेक्टर अंकुर मेश्राम ने कहा, “बड़े तालाब के एफटीएल और 50 मीटर दायरे में चिन्हित सभी अतिक्रमणों को हटाने के लिए टीम गठित कर दी गई है। राजस्व, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत इन अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा। इसके साथ ही शासकीय भूमि पर अन्य कब्जों को भी चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। पूरी प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए दिनवार योजना बनाई गई है।”

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