
नई दिल्ली- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश भर के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में भारत सरकार की आरक्षण नीति का सख्ती से पालन किया जाए।
यूजीसी सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी को जारी पत्र में सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड तथा विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देशित किया गया है। यह पत्र सितंबर 2024 में जारी यूजीसी के पूर्व निर्देश की निरंतरता में लिखा है।
पत्र में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापनों- क्रमांक 36036/3/2018-Estt(Res) दिनांक 15.05.2018 तथा क्रमांक 41034/4/2022-Estt.(Res-1) दिनांक 21.11.2022—का हवाला देते हुए कहा गया है कि ऐसी अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण लागू करना अनिवार्य है। इसमें शिक्षण, अशिक्षण तथा प्रशासनिक पद शामिल हैं।
प्रो. जोशी ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तथा शिक्षा मंत्रालय द्वारा इन प्रावधानों के सख्त अनुपालन पर जोर देने का उल्लेख किया है। विश्वविद्यालयों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने संस्थानों तथा संबद्ध/घटक महाविद्यालयों में इन निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें।
अनुपालन की स्थिति का आकलन करने के लिए, यूजीसी ने 2023-24 तथा 2024-25 शैक्षणिक वर्षों में की गईं अनुबंध आधारित शिक्षण, अशिक्षण तथा प्रशासनिक नियुक्तियों का विवरण यूजीसी UAMP पोर्टल पर जमा करने का अनुरोध किया है। इसके लिए एक गूगल फॉर्म लिंक प्रदान किया गया है।
यह दोबारा याद दिलाना उच्च शिक्षा संस्थानों में समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है तथा अस्थायी भर्ती में अनुपालन की कमी की शिकायतों के संदर्भ में आया है।
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