हिन्दू-मुस्लिम विवाद में बंद हुआ जम्मू का यह मेडिकल कॉलेज, जानिए क्या है पूरा मामला!

जब कश्मीर के 42 मुस्लिम छात्रों को इंस्टीट्यूट के 50 सीटों वाले MBBS प्रोग्राम के पहले 2025-26 बैच में एडमिशन दिया गया, तब पिछले महीने जम्मू में विरोध प्रदर्शन हुए।
 मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'अन्य राज्यों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संघर्ष होता है, लेकिन यहां मौजूदा संस्थान को बंद करने की लड़ाई लड़ी गई।'
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'अन्य राज्यों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संघर्ष होता है, लेकिन यहां मौजूदा संस्थान को बंद करने की लड़ाई लड़ी गई।' सोशल मीडिया
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जम्मू- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SMVDIMS) कटरा की मान्यता रद्द होने पर कटु प्रतिक्रिया जताई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा 6 जनवरी को जारी आदेश में कॉलेज की एमबीबीएस कोर्स की अनुमति को 'घोर कमियों' का हवाला देकर रद्द कर दिया गया, जो मुस्लिम छात्रों के प्रवेश को लेकर छिड़े विवाद के बीच आया। इस फैसले पर हिंदू संगठनों द्वारा जम्मू में जश्न मनाने की खबरों पर अब्दुल्ला ने चुभते हुए शब्दों में कहा कि 'धर्म के नाम पर कॉलेज बंद करवाने वाले अब पटाखे फोड़कर या ढोल बजाकर खुशी मनाएं।'

SMVDIMS में मुस्लिम छात्रों के NEET के आधार पर प्रवेश को लेकर जम्मू में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। जब कश्मीर के 42 मुस्लिम छात्रों को इंस्टीट्यूट के 50 सीटों वाले MBBS प्रोग्राम के पहले 2025-26 बैच में एडमिशन दिया गया, तब पिछले महीने जम्मू में विरोध प्रदर्शन हुए। बाकी सीटें सात हिंदू छात्रों और एक सिख छात्र ने भरीं। मेरिट लिस्ट NEET-UG में छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई थी। जम्मू और कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति जो लगभग 60 BJP और RSS से जुड़े संगठनों का गठबंधन है, के बैनर तले हिंदू निवासियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए गये। वे एडमिशन लिस्ट वापस लेने और हिंदू छात्रों के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग कर रहे थे उनका तर्क है कि कई स्थानीय उम्मीदवारों को एडमिशन नोटिफिकेशन के बारे में पता नहीं था।

विरोध प्रदर्शन इतने बढ़ गए कि L-G मनोज सिन्हा के पुतले जलाए गए, जिससे कॉलेज के पहले MBBS एडमिशन को लेकर गहरे सामुदायिक और राजनीतिक तनाव सामने आए। राष्ट्रीय बजरंग दल और युवा राजपूत सभा जैसे संगठनों ने दावा किया कि कॉलेज 'हिंदू तीर्थस्थल' से जुड़ा होने के कारण केवल हिंदू छात्रों के लिए होना चाहिए। अब्दुल्ला ने तब ही चेतावनी दी थी कि 'अगर कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को नहीं चाहिए, तो सरकारी अनुदान और जमीन लौटा दें, लेकिन बाद में पूरी कम्युनिटी को रेडिकलाइज्ड न कहें।'

6 जनवरी को NMC की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने सरप्राइज इंस्पेक्शन में पाई गई 'ग्रॉस डेफिशिएंसीज' (जैसे अपर्याप्त फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी) के आधार पर कॉलेज की मान्यता वापस ले ली।

फैसले के बाद जम्मू में कुछ हिंदू संगठनों ने 'विजय जुलूस' निकाले और पटाखे फोड़े। इस पर अब्दुल्ला ने कहा, 'धर्म के चक्कर में जम्मू-कश्मीर से एक मेडिकल कॉलेज छिन गया। जो खुश हैं, वे अब ढोल बजाकर या फायरवर्क्स से जश्न मनाएं। उन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।' उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधा, 'बीजेपी ने छात्रों के भविष्य से खेला।'

अब्दुल्ला ने स्वास्थ्य मंत्री को निर्देश दिए कि प्रभावित छात्रों को उनके घर के नजदीकी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने कहा, 'अन्य राज्यों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संघर्ष होता है, लेकिन यहां मौजूदा संस्थान को बंद करने की लड़ाई लड़ी गई।' साथ ही, उन्होंने छात्रों की पहचान पर सवाल उठाने वालों को लताड़ा, 'वे NEET में पास हुए, लेकिन अब उनकी पहचान पर सवाल? यह अन्याय है।

इस फैसले से जम्मू-कश्मीर के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र को झटका लगा है, जहां पहले से ही सीटों की कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद स्थानीय छात्रों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।

 मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'अन्य राज्यों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संघर्ष होता है, लेकिन यहां मौजूदा संस्थान को बंद करने की लड़ाई लड़ी गई।'
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 मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'अन्य राज्यों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संघर्ष होता है, लेकिन यहां मौजूदा संस्थान को बंद करने की लड़ाई लड़ी गई।'
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