Rajasthan: अप्रशिक्षित अध्यापिकाओं की वेतन विसंगति पर बांसवाड़ा में आंदोलन तेज, ढोल-नींद उड़ाओ अभियान शुरू

बांसवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खस्ता है, शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि बालकों-बालिकाओं की जनहानि होती है तो इसके लिए जिला प्रशासन और शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे क्योंकि सर्वे रिपोर्ट सहित बार-बार पत्राचार करने के बाद भी कोई राशि आवंटित नहीं की गई है।
 बिना पॉलिसी लागू किए डिजायर पद्धति से शिक्षकों का जबरन स्थानांतरण किया जा रहा है जिससे टीचर्स में रोष है।
बिना पॉलिसी लागू किए डिजायर पद्धति से शिक्षकों का जबरन स्थानांतरण किया जा रहा है जिससे टीचर्स में रोष है।
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बांसवाड़ा- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में शिक्षा विभाग की विभिन्न समस्याओं को लेकर अप्रशिक्षित अध्यापिका संघर्ष समिति और राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू किया है। 'ढोल बजाओ-नींद उड़ाओ' अभियान के तहत शिक्षकों ने न्यायालयीन निर्णय की अनदेखी, डिजायर पद्धति से ट्रांसफर, जर्जर स्कूल भवनों और बजट आवंटन की मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

संघर्ष समिति के संयोजक अनिल व्यास ने बताया कि न्यायालय के निर्णय के अनुसार अप्रशिक्षित अध्यापिकाओं को नियुक्ति तिथि से चयनित वेतनमान दिया जाना है, लेकिन पीओ एवं यूसीईओ द्वारा बजट आवंटन का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को प्रेषित नहीं किया गया है, जिससे शिक्षकों में व्यापक आक्रोश है और उन्होंने कहा कि आठ दिन पहले ज्ञापन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, अतः दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की गई।

शिक्षा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते टीचर्स
शिक्षा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते टीचर्स

बांसवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खस्ता है, समिति ने जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और 1968 कक्षा कक्षों के नवनिर्माण के लिए समसा, डीएमएफटी, सीएसआर स्कीम और जनजाति टीएसपी परिक्षेत्र मद से बजट आवंटन की मांग की है, वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि बालकों-बालिकाओं की जनहानि होती है तो इसके लिए जिला प्रशासन और शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे क्योंकि सर्वे रिपोर्ट सहित बार-बार पत्राचार करने के बाद भी कोई राशि आवंटित नहीं की गई है।

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि बिना पॉलिसी लागू किए डिजायर पद्धति से शिक्षकों का जबरन स्थानांतरण किया जा रहा है, उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में 100 दिन में व्यवस्था सुधारने का वादा किया गया था, लेकिन 1000 दिन बाद भी सिस्टम दुरुस्त नहीं किया गया और मांग की गई कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु शीघ्र पॉलिसी बनाई जाए तथा पे-प्रोटेक्शन, रिकवरी, टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता सहित अन्य मुद्दों का समाधान किया जाए।

वरिष्ठ पदाधिकारी दिनेश भट्ट ने बताया कि आंदोलन में नव क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याताओं के पद सृजित करने, स्ट्रफिंग पैटर्न नामांकन के अनुसार पद सृजित करने, प्रत्येक प्राथमिक स्कूल में 5 कक्षाओं पर 5 अध्यापक और एक शारीरिक शिक्षक पदस्थापित करने, सूचनाओं के संप्रेषण हेतु कम्प्यूटर शिक्षण व्यवस्था, मशीन, लैपटॉप एवं प्रिंटर प्रदान करने, प्राथमिक स्कूलों के संस्था प्रधानों को आहरण-वितरण अधिकार देने, एसएनए बजट आवंटन न्यूनतम 5 लाख सीधे प्राइमरी स्कूलों को करने, पीटीआई पद सृजित करने सहित प्रत्येक मिडिल स्कूल में पहली से आठवीं कक्षा तक 8 अध्यापक और एक शारीरिक शिक्षक पदस्थापित करने तथा न्यूनतम बजट आवंटन 9.60 लाख रुपए अनुदान देने की मांग की गई।

टीएसपी परिक्षेत्र बांसवाड़ा के कठिन पहाड़ी अंचल को ध्यान में रखते हुए टीएसपी भत्ता दिए जाने, स्थानीय युवाओं को अलग से भर्ती करने, पदोन्नति में टीएसपी परिक्षेत्र आरक्षण देने, नोडल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों हेतु मंत्रालयिक कर्मचारियों की नियुक्ति करने, संसाधन उपलब्ध कराने, नोडल केंद्र बजट आवंटन स्कूलों को तीन लाख रुपए अनुदान अलग से करने तथा टीएसपी परिक्षेत्र के सरकारी स्कूलों के नोडल पीओ एवं प्रधानाचार्य को हार्ड ड्यूटी एलाउंस दिए जाने की आवश्यकता जताई गई।

इस अवसर पर वक्ताओं ने विज्ञान संकाय एवं कृषि विज्ञान संकाय में प्रायोगिक कार्य हेतु विभाग द्वारा पूर्ववर्ती मापदंड के अनुसार बजट आवंटन किए जाने, यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता, आरजीएचएस मद में कटौती बंद करने, कार्यालय मद, स्टेशनरी मद, प्रयोगशाला मद, साफ-सफाई एवं पेयजल मद तथा विद्युत, लाइट, पेयजल, नेट एवं इंटरनेट के समस्त खर्चों की भरपाई शिक्षा विभाग द्वारा किए जाने की मांग की, साथ ही राजकीय विद्यालयों से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई। इस अवसर पर कई शिक्षकों, कर्मचारी नेताओं और अप्रशिक्षित अध्यापिकाओं ने सम्बोधित किया।

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