स्वजातीय PhD स्कालर्स को देते थे तरजीह, बाकियों से करवाए घर के काम: पेरियार विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव के आरोपी प्रोफेसर निलंबित

प्रोफेसर पर सहकर्मियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को डराने-धमकाने, सार्वजनिक रूप से छात्रों का अपमान करने और प्रशासनिक मामलों में पक्षपात करने के आरोप हैं।
एक अनुसूचित जाति के शोधार्थी ने आरोप लगाया कि उन्हें विश्वविद्यालय अनुसंधान फेलोशिप (यूआरएफ) के लिए सिफारिश नहीं की गई और उनकी पीएचडी में बाधा डाली गई।
एक अनुसूचित जाति के शोधार्थी ने आरोप लगाया कि उन्हें विश्वविद्यालय अनुसंधान फेलोशिप (यूआरएफ) के लिए सिफारिश नहीं की गई और उनकी पीएचडी में बाधा डाली गई। इन्टरनेट
Published on

सेलम- तमिलनाडु के पेरियार विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स द्वारा जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोपों के बाद तमिल विभाग के प्रोफेसर टी. पेरियासामी को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। पेरियासामी पिछले 12 वर्षों से विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और जून 2025 तक इस पद पर बने रहे। हाल ही में 10 से अधिक पीएचडी स्कॉलर्स ने विश्वविद्यालय के कुलपति समिति को शिकायतें सौंपीं, जिसमें उन पर जातिगत भेदभाव, वर्षों से पीएचडी पूरी न करने देने, शक्ति का दुरुपयोग, शोधार्थियों को घरेलू कामों में लगाने और सहकर्मियों के साथ अपशब्दों का प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि प्रोफेसर पेरियासामी ने अपनी जाति के शोधार्थियों को तरजीह दी, जबकि अन्य जातियों के छात्रों को नियमों का अलग-अलग तरीके से पालन करवाया। एक अनुसूचित जाति के शोधार्थी ने आरोप लगाया कि उन्हें विश्वविद्यालय अनुसंधान फेलोशिप (यूआरएफ) के लिए सिफारिश नहीं की गई और उनकी पीएचडी में बाधा डाली गई। एक अन्य एमबीसी समुदाय के शोधार्थी ने कहा कि उन्हें खरीदारी, बैंकिंग, बच्चों को लाने-ले जाने और घर निर्माण में पानी डालने जैसे व्यक्तिगत कामों के लिए मजबूर किया गया। शिकायतों में यह भी कहा गया कि 2013 से 2022 तक 19 शोधार्थियों ने भेदभाव और दुर्व्यवहार के कारण अपना शोध छोड़ दिया। यदि कोई गाइड उनके साथ अच्छे संबंध नहीं रखता था, तो वह उनके थिसिस मूल्यांकन के लिए नहीं भेजते थे।

इसके अलावा, प्रोफेसर पर सहकर्मियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को डराने-धमकाने, सार्वजनिक रूप से छात्रों का अपमान करने और प्रशासनिक मामलों में पक्षपात करने के आरोप हैं। पूर्व में की गई शिकायतें कुलपति और रजिस्ट्रार तक पहुंचीं, लेकिन वे पेरियासामी को ही सौंप दी गईं, जिसके बाद उन्होंने शिकायतकर्ताओं को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

2013 से 2022 तक 19 शोधार्थियों ने भेदभाव और दुर्व्यवहार के कारण अपना शोध छोड़ दिया। यदि कोई गाइड उनके साथ अच्छे संबंध नहीं रखता था, तो वह उनके थिसिस मूल्यांकन के लिए नहीं भेजते थे।

'द हिंदू' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सेलम जिला कलेक्टर और पुलिस से रिपोर्ट मांगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें कॉलेजिएट एजुकेशन कमिश्नर ई. सुंदरावल्ली, पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के प्रमुख आर. सुब्रमणि तथा श्री शक्तिकैलाश महिला कॉलेज की प्रधानाचार्या एस. जयंती शामिल हैं।

समिति ने अपनी जांच में पाया कि आरोप गंभीर हैं और प्रारंभिक साक्ष्यों से कदाचार सिद्ध होता है, जो तत्काल अनुशासनिक कार्रवाई और विभागीय जांच की मांग करता है। 29 अगस्त को जारी आदेश में कहा गया, "विश्वविद्यालय और व्यापक जनहित में प्रोफेसर पेरियासामी को तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित किया जाता है। वे विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते और पूर्व लिखित अनुमति के बिना सलेम छोड़ नहीं सकते। निलंबन अवधि में उन्हें कानून के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।" विभागीय जांच जारी है और उसके नतीजे पर आगे की कार्रवाई होगी।

पेरियार विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (पीयूटीए) ने इस फैसले का स्वागत किया और तमिलनाडु सरकार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार जताया। प्रोफेसर पेरियासामी ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उन्होंने नियमों का पालन किया तथा शिकायतें मनगढ़ंत हैं। वे एक अलग जांच का भी सामना कर रहे हैं, जिसमें फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र जमा करने का आरोप है।

एक अनुसूचित जाति के शोधार्थी ने आरोप लगाया कि उन्हें विश्वविद्यालय अनुसंधान फेलोशिप (यूआरएफ) के लिए सिफारिश नहीं की गई और उनकी पीएचडी में बाधा डाली गई।
ओडिशा: दलित महिला को ₹2,000 का कर्ज न चुका पाने पर जूतों की माला पहनाकर घुमाया गया, वीडियो वायरल
एक अनुसूचित जाति के शोधार्थी ने आरोप लगाया कि उन्हें विश्वविद्यालय अनुसंधान फेलोशिप (यूआरएफ) के लिए सिफारिश नहीं की गई और उनकी पीएचडी में बाधा डाली गई।
राजस्थान में जातिवादी बर्बरता: चॉकलेट का लालच देकर 8 साल के बच्चे से कराया टॉयलेट साफ़, पानी मांगा तो पेड़ से उल्टा लटकाकर पीटा!

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com