गुडामालानी, बाड़मेर- जिले के ग्राम भाखरपुरा में एक हैरतअंगेज और जघन्य मामला सामने आया है, जहाँ एक आठ वर्षीय नाबालिग बच्चे को गांव के कुछ लोगों ने पानी का मटका छूने और चॉकलेट मांगने पर न सिर्फ पीटा, बल्कि पेड़ से उल्टा लटकाकर उसकी निर्मम पिटाई की। पीड़ित बच्चे की माँ ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने और उनके परिवार ने बच्चे को बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट की गई। इस मामले में पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराएं लगाते हुए मामला दर्ज किया है।
घटना की शुरुआत 26 अगस्त को दिन के समय गांव भाखरपुरा में हुई। शिकायतकर्ता पूरीदेवी के अनुसार, उनका आठ साल का बेटा गांव में खेल रहा था। इस दौरान आरोपियों नारणाराम पुत्र रुपाराम प्रजापत और देमाराम प्रजापत ने उससे बाथरूम साफ करवाए और कचरा इकट्ठा करवाया। काम करवाने के बाद जब बच्चे ने चॉकलेट मांगी तो आरोपियों ने मना कर दिया। बच्चे ने प्यास लगने पर पानी पीने की इच्छा जताई और पानी के मटके की ओर हाथ बढ़ाया। यह देखकर आरोपी बिगड़ गए।
आरोप है कि नारणाराम, देमाराम, रुपाराम और रुपाराम की पत्नी ने मिलकर बच्चे की मारपीट शुरू कर दी, जिससे बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। बाद में उसे छोड़ दिया गया। जब बच्चा रोता हुआ घर पहुंचा और सारी बात बता रहा था, तभी आरोपी देमाराम और नारणाराम वहां पहुंच गए और शिकायतकर्ता पूरीदेवी के साथ पुन: मारपीट की। आरोप है कि उन्होंने पूरीदेवी की सास चोती देवी के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की। इसके बाद आरोपियों ने बच्चे को उठाकर नारणाराम के घर ले गए।
पूरीदेवी ने बताया कि वे और उनकी सास चिल्लाते हुए आरोपियों के घर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि आरोपी उनके बच्चे को एक पेड़ से उल्टा लटकाकर उसकी पिटाई कर रहे थे। पूरीदेवी ने आरोप लगाया, "हमने मना किया कि अब और मत मारो, हमारी एक (संतान) की अनहोनी पहले ही हो चुकी है, लेकिन वे पीटते रहे।" जब पीड़ित परिवार के एक सदस्य दशरथ ने इसकी विडियो बनानी शुरू की, तभी आरोपियों ने बच्चे को पेड़ से उतार दिया।
पूरीदेवी ने उसी दिन 26 अगस्त को दोपहर 11:50 बजे गुडामालानी पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की एफआईआर दर्ज की है। इसमें आरोपियों नारणाराम, देमाराम और रुपाराम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 115(2), 127(2) और 137(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
साथ ही, चूंकि पीड़ित परिवार वागरी जाति (अनुसूचित जाति) से ताल्लुक रखता है, इस आधार पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) (अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य को अपमानजनक ढंग से अपमानित करना), 3(1)(s) (झूठे आरोप में गिरफ्तारी का डर दिखाना) और 3(1)(IV) के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। एडवोकेट भटराज जोगसान ने बताया कि पुलिस ने मामले दर्ज तो किया है लेकिन अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह मामला ग्रामीण इलाकों में होने वाली सामुदायिक हिंसा और दलित समुदाय के प्रति हो रहे अत्याचार का ज्वलंत उदाहरण है।
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