MP: विदिशा में छात्राओं से मारपीट के आरोप में शिक्षक निलंबित, वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई!

पिपलधार के शासकीय एकीकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का मामला; कक्षा 6 की छात्राओं ने लगाए थे शारीरिक प्रताड़ना के आरोप, आरटीई अधिनियम की धारा 17 का उल्लंघन मानते हुए विभागीय जांच शुरू।
MP: विदिशा में छात्राओं से मारपीट के आरोप में शिक्षक निलंबित, वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई!
AI इमेज
Published on

भोपाल। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के नटेरन विकासखंड स्थित शासकीय एकीकृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पिपलधार में कक्षा 6वीं की छात्राओं के साथ कथित मारपीट और शारीरिक प्रताड़ना के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए माध्यमिक शिक्षक रामप्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई भोपाल संभाग के संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर की गई। विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं, जिसके बाद शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

मामला उस समय चर्चा में आया जब 3 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें विद्यालय की छात्राओं ने शिक्षक पर कक्षा में उनके साथ मारपीट करने और शारीरिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले ने तूल पकड़ लिया और शिक्षा विभाग ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित जांच दल ने विद्यालय पहुंचकर छात्राओं, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद संयुक्त संचालक लोक शिक्षण ने शिक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को शारीरिक दंड देना बच्चों का निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 की धारा 17(1) का सीधा उल्लंघन है। इस प्रावधान के तहत किसी भी छात्र को शारीरिक दंड या मानसिक प्रताड़ना देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिक्षक का यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत निर्धारित सेवा आचरण के भी विपरीत पाया गया है, जिसके कारण उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक समझी गई।

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक रामप्रसाद का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, नटेरन निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार निलंबन भत्ता दिया जाएगा। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि एक सप्ताह के भीतर शिक्षक के विरुद्ध विस्तृत आरोप-पत्र तैयार कर सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जाए, ताकि विभागीय जांच की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी शिक्षक द्वारा शारीरिक दंड या प्रताड़ना की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि विभागीय जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं तो शिक्षक के विरुद्ध आगे और भी कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार और शारीरिक दंड की समस्या को लेकर सवाल खड़े करती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में अनुशासन बनाए रखने के लिए हिंसा या शारीरिक दंड का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इसके बजाय संवाद, परामर्श और सकारात्मक शिक्षण पद्धतियों को अपनाकर बच्चों के अनुकूल वातावरण तैयार किया जाना चाहिए। शिक्षा का अधिकार अधिनियम भी इसी उद्देश्य से स्कूलों में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त हो सके।

MP: विदिशा में छात्राओं से मारपीट के आरोप में शिक्षक निलंबित, वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई!
मध्यप्रदेश आर्थिक संकट: एक महीने में दूसरी बार 4300 करोड़ का लोन, लाड़ली बहनों को 250 रुपए एक्स्ट्रा देने के लिए फिर लेंगे कर्ज!
MP: विदिशा में छात्राओं से मारपीट के आरोप में शिक्षक निलंबित, वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई!
शिशु-मातृ मृत्यु दर में फिसड्डी रहा मध्यप्रदेश! PCC चीफ पटवारी ने सरकार से पूछा- 4500 करोड़ का बजट कहां गया?
MP: विदिशा में छात्राओं से मारपीट के आरोप में शिक्षक निलंबित, वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई!
मध्यप्रदेश: पुलिस निगरानी में दलित दूल्हे ने मंदिर में किए दर्शन, गांव में विवाद के बाद शांतिपूर्ण निकली बारात

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com