महाराष्ट्र: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में दीक्षांत से पहले छात्र क्यों हुए हाउस अरेस्ट; सोशल मीडिया भी बैन | Ground Report

गौरतलब है कि जिन छात्रों को हाउस अरेस्ट किया गया है, उनमें से कुछ को कुछ दिन पूर्व ही 'सॉरी-सॉरी सावरकर' का नारा लगाने के जुर्म में छात्रावास से 14 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की भाग लिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की भाग लिया।x@rashtrapatibhvn
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वर्धा- महाराष्ट्र का इकलौता केंद्रीय विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय में 16 अप्रैल को दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ , जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुई। बिना किसी ठोस वजह 20 से अधिक छात्रों को वर्धा पुलिस द्वारा "आपत्तिजनक कृत्य की आशंका" का नोटिस थमाते हुए हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। इतना ही नहीं, हिंदी विश्वविद्यालय के तीन शोधार्थियों और एक पूर्व शोधार्थी का फेसबुक अकाउंट भी भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसे लेकर छात्रों में काफी रोष है। छात्रों ने इसे अपने अधिकारों का हनन बताया है।

जिन छात्रों को हाउस अरेस्ट किया गया है, उनमें NSUI के इकाई अध्यक्ष धनंजय का भी नाम है। धनंजय कहते हैं, "विश्वविद्यालय की कुलपति कुमुद शर्मा ने उन्हीं छात्रों को दीक्षांत में शामिल न होने के लिए हाउस अरेस्ट करवाया है, जो विश्वविद्यालय में चल रही अनियमितताओं पर सवाल उठाते हैं।"

वे आगे कहते हैं, "हिंदी विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गढ़ बन चुका है। इस विचारधारा से इतर किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का इस विश्वविद्यालय में कोई मौका नहीं बचा है। कुलपति कुमुद शर्मा छात्रों के अधिकारों का दमन कर रही हैं।" जब हमने धनंजय से पूछा कि क्या छात्र आयोजित दीक्षांत में राष्ट्रपति महोदया के सामने किसी प्रकार के विरोध की तैयारी में थे, तो उन्होंने कहा, "कोई भी छात्र किसी भी तरह के विरोध की तैयारी में नहीं था। सभी दीक्षांत समारोह और राष्ट्रपति महोदया के आगमन को लेकर उत्साहित थे और विश्वविद्यालय प्रशासन का सहयोग कर रहे थे।"

एक अन्य हाउस अरेस्टेड छात्र बृजेश सोनकर ने कहा, "कुलपति कुमुद शर्मा के मन में RSS की विचारधारा ने छात्रों के प्रति इतनी नफरत भर दी है कि छात्रों के लिए होने वाले दीक्षांत से छात्रों को ही दूर रखा गया है।"

गौरतलब है कि जिन छात्रों को हाउस अरेस्ट किया गया है, उनमें से कुछ को कुछ दिन पूर्व ही 'सॉरी-सॉरी सावरकर' का नारा लगाने के जुर्म में छात्रावास से 14 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था।

हाउस अरेस्टेड एक सामान्य छात्र वर्मा का कहना है, "मैं किसी भी प्रदर्शन आदि से दूरी बनाकर रहता हूँ, लेकिन मुझे बेवजह नोटिस थमा दिया जाता है, यह कहते हुए कि मैं सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हूँ।" आगे वे कहते हैं, "मैंने जब पुलिस वालों से पूछा कि आपको मेरे किस कृत्य से यह लगा कि मैं सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हूँ, तो वे कुछ नहीं बोल पाए।"

एक हाउस अरेस्टेड छात्र कौशल का कहना है, "हमारे विश्वविद्यालय में दीक्षांत हो रहा है। हम हॉस्टल से बाहर नहीं निकल सकते। हॉस्टल के बाहर भारी मात्रा में पुलिस बल मौजूद है। विश्वविद्यालय को छावनी बना दिया गया है। पूरे विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से अधिक सुरक्षा बल मौजूद है।"

विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलसचिव द्वारा एक सूचना जारी की गई है, जिसमें लिखा है कि दीक्षांत समारोह स्थल में मोबाइल फोन या अन्य कोई भी इलेक्ट्रॉनिक वस्तु अपने साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी। छात्रों ने इस पर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हिंदी विश्वविद्यालय के छात्र मनीष चौधरी, जो AISF से जुड़े हैं, कहते हैं, "जिस देश की सरकार डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटते नहीं थक रही है, वहाँ की कुलपति फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से इतनी असुरक्षित महसूस कर रही हैं।" वे आगे कहते हैं, "इस विश्वविद्यालय में तमाम अनियमितताएँ चल रही हैं, इसलिए कुलपति कुमुद शर्मा और कुलसचिव कादर नवाज़ खान बिल्कुल डरे हुए हैं कि कब इस विश्वविद्यालय में चल रही अनियमितताओं का पर्दाफाश हो जाए। इसी कारण छात्रों पर तरह-तरह की पाबंदियाँ लगा रहे हैं।"

चंदन सरोज, जो हिंदी विश्वविद्यालय के शोधार्थी हैं, का सोशल मीडिया अकाउंट राष्ट्रपति महोदया के आने के दो दिन पूर्व प्रतिबंधित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वे पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सक्रिय भी नहीं थे। उन्हें उनके साथियों ने बताया कि उनका फेसबुक प्रतिबंधित कर दिया गया है। उनका कहना है, "मेरा फेसबुक अकाउंट बिना किसी सूचना के भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया, जबकि मैंने कोई अपराध नहीं किया है।"

चंदन का कहना है कि पुलिस से बात करने पर उन्हें बताया गया कि उन्हें और विश्वविद्यालय प्रशासन को आशंका थी कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट से कोई आपत्तिजनक पोस्ट हो सकती है। इस पर चंदन का कहना है, "बिना किसी अपराध के, केवल अपराध की आशंका में कार्रवाई किया जाना सभी मानवाधिकारों का उल्लंघन है।" वे इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन बताते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की भाग लिया।
Bombay High Court के आदेश के बावजूद वर्धा विश्वविद्यालय नहीं दे रहा शोधार्थियों को फेलोशिप

पिछले दो वर्षों से निष्कासित चल रहे छात्र रजनीश कुमार अम्बेडकर का सोशल मीडिया अकाउंट भी भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। उनका कहना है, "विश्वविद्यालय में दीक्षांत किसके लिए हो रहा है – छात्रों के लिए या कुलपति व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के लिए?" विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक सूचना जारी की थी, जिसमें उल्लेख था कि कोई भी छात्र फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर दीक्षांत समारोह में नहीं जा सकता। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रजनीश कुमार अम्बेडकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था और इस निर्णय का विरोध किया था। रजनीश का कहना है कि इसी पोस्ट के बाद से उनका अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया।

डेढ़ वर्ष तक विश्वविद्यालय से निष्कासित रहे हिंदी विश्वविद्यालय के शोधार्थी राजेश कुमार यादव ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए हमें बताया:

एक स्टूडेंट को पुलिस द्वारा दिया गया नोटिस
एक स्टूडेंट को पुलिस द्वारा दिया गया नोटिस
"विश्वविद्यालय में छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का दमन आज भी जारी है। आज 16 अप्रैल को विश्वविद्यालय में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महोदया दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आईं, किंतु उनके आने से पूर्व ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमारे खिलाफ गलत एवं भ्रामक सूचना देकर BNS की धारा 168 के तहत पुलिस के माध्यम से कानूनी नोटिस जारी कर दिया और इसी बहाने हमें तथा विश्वविद्यालय के कई अन्य छात्रों को छात्रावास में कैद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया। इससे एक दिन पूर्व, 15 अप्रैल को हमारा (राजेश कुमार यादव, रजनीश कुमार अम्बेडकर, चंदन सरोज, निरंजन कुमार और अन्य छात्रों का) सोशल मीडिया (फेसबुक) अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया।"

प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का अंबार

राजेश आगे कहते हैं, "आज गांधी की धरती पर, गांधी के नाम पर बने इस विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति महोदया ने पहले सेवाग्राम स्थित गांधी आश्रम में जाकर गांधी जी के विचारों को नमन किया और उन्हें करीब से समझने का प्रयास किया, किंतु यहाँ के गांधी के नाम पर बने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से वह अनभिज्ञ ही रहीं। दुर्भाग्यवश, राष्ट्रपति महोदया के अपने अधीनस्थ अधिकारी ही उन्हें यह नहीं बताते कि यहाँ छात्रों के अधिकारों को लगातार कुचला जा रहा है, उन्हें अवैधानिक रूप से निष्कासित और निलंबित किया जा रहा है, तथा उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। हमारा अपराध बस इतना है कि हमने विश्वविद्यालय में लगातार हो रही प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ हमेशा संवैधानिक विरोध दर्ज कराया है। हमने अवैधानिक नियुक्तियों के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से संवैधानिक विरोध दर्ज कराया, सड़कों पर उतरे, लिखित विरोध-ज्ञापन दिए, और मीडिया के माध्यम से अनियमितताओं को उजागर किया। अवैधानिक रूप से नियुक्त भीमराव मैत्री के विरोध और सोशल मीडिया पर रिपोर्टिंग के क्रम में मैंने और मेरे चार अन्य साथियों ने सोशल मीडिया पर इस प्रकरण से संबंधित पोस्ट लिखे। परिणामस्वरूप, हमें बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया, बिना नोटिस, बिना सुनवाई के जनवरी 2024 में निष्कासित/निलंबित कर दिया गया। बस एक एकल आदेश के आधार पर हमारे पढ़ने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया। अंततः उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दिसम्बर 2025 में निलंबन और निष्कासन वापस लिया गया।"

राजेश ने आगे जोड़ा, "यह अत्यंत आपराधिक कृत्य है कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पदासीन व्यक्ति (तत्कालीन कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल) पर इतने गंभीर आरोप लगे कि अंततः उन्हें कार्यकाल पूरा किए बिना ही पद छोड़ने पर विवश होना पड़ा। उन पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे – एक महिला शिक्षिका ने 'नौकरी के बदले यौन शोषण' के स्क्रीनशॉट वायरल किए, एक अन्य महिला शिक्षिका और कार्यालय कर्मी के साथ अनैतिक संबंधों की चर्चा रही, और सबसे चौंकाने वाला प्रकरण यह था कि शिक्षा विभाग में एक शिक्षक को पहले नौकरी दी गई, फिर उसे अपना दामाद बना लिया गया। इसके अतिरिक्त, 2019 से 2023 के बीच नियुक्तियों में व्यापक अनियमितताओं के आरोप लगे, किंतु आज तक कोई जांच नहीं हुई।"

राजेश कुमार यादव तत्कालीन कुलसचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहते हैं, "वर्तमान में कार्यवाहक कुलसचिव के पद पर कादर नवाज खान आसीन हैं, जिन पर 2019-2023 में तत्कालीन कुलपति का दाहिना हाथ होने का आरोप था और जिनके विरुद्ध अनेक गंभीर आरोप हैं। इन्हें 2023 में कथित तौर पर BCI प्रकरण में घोर लापरवाही (जिसमें विश्वविद्यालय पर 6 लाख रुपये का जुर्माना लगा) के कारण कुलसचिव पद से हटाया गया था, फिर भी इन्हें 2024 में पुनः कार्यवाहक कुलसचिव बना दिया गया।

राजेश का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय में यूजीसी मानकों, अनुभव की शर्तों, आरक्षण नियमों, एसएफएस दिशानिर्देशों और प्राकृतिक न्याय का व्यवस्थित उल्लंघन करते हुए कम से कम 18 मामलों में अवैध शैक्षणिक नियुक्तियाँ की गईं। इनमें बिना आवश्यक वर्षों का अनुभव, विवादित आरक्षण प्रमाणपत्र, बिना NET/PhD (केवल अमान्य SLET), पीएचडी में जालसाजी के आरोप, बिना हिंदी दक्षता, तथा बिना यूजीसी वेतनमान के अनुभव वालों की नियुक्ति शामिल है। साथ ही, प्रोबेशन के दौरान ही पदाधिकारी बनाने और जिस पद के लिए आवेदन ही नहीं किया गया, वहाँ चयन करने जैसी अनियमितताएँ भी बताई गई हैं।

अपने और अपने साथियों के निष्कासन पर राजेश का कहना है, "उच्च न्यायालय, नागपुर के आदेश (दिनांक 26 दिसम्बर 2025) के बाद भी हमारा उत्पीड़न जारी है। मेरी और मेरे सहपाठी रामचंद्र की शोधवृत्ति (फेलोशिप) आज तक पूर्ण रूप से जारी नहीं की गई है, जो न्यायालय की अवमानना के समान है। हम माँग करते हैं कि हाउस अरेस्ट तत्काल समाप्त किया जाए, सोशल मीडिया अकाउंट पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए, 2019-2023 की सभी विवादित शिक्षक नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, और हमारी शोधवृत्ति तत्काल जारी की जाए। यह दमन बंद होना चाहिए।"

विश्वविद्यालय प्रशासन और हाउस अरेस्ट के संदर्भ में वर्धा पुलिस का पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

- विवेक मिश्रा डॉ बी आर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी में परफॉरमेंस स्टडीज में एमए कर रहे हैं।

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