
जेएनयू का मेन गेट, गुरुवार दोपहर का समय। कुलपति शांतिश्री धूलिपूड़ी पंडित का वो वायरल वीडियो अभी गर्म था जिसमें उन्होंने कहा था – “दलित विक्टिमहुड के नशे के शिकार हैं”। इस बयान के बाद पूरे देश में बवाल मचा है। जेएनयू छात्रसंघ और तमाम छात्र संगठनों तथा सामान्य छात्रों में रोष है और कुलपति के इस्तीफे की माँग उठ रही है। उसी गुस्से में सैकड़ों छात्र निकले थे। मार्च था शिक्षा मंत्रालय की तरफऔर मांग 3 – कुलपति इस्तीफा दो, रोहित वेमुला एक्ट और UGC रेगुलेशन लागू करो।
अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के विवेक मिश्रा ने मूकनायक को बताया कि बीते गुरुवार 27 फरवरी 2026 को जेएनयू छात्र संघ की तरफ से मार्च का आह्वान किया गया था जो जेएनयू से निकलकर शिक्षा मंत्रालय तक जाना था। सैकड़ों छात्र कुलपति के इस्तीफे और UGC रेगुलेशन को रोहित वेमुला की तर्ज पर लागू करने की माँग के साथ गेट से निकलने वाले थे। गेट पर सैकड़ों पुलिस कर्मी और RAF के जवान लाठी, गन और वाटर कैनन के साथ पहले से मौजूद थे।
छात्रों के आने से पहले ही पुलिस ने गेट पर कई ताले जड़ दिए। जैसे ही छात्रों का जत्था ताले तोड़कर बाहर निकला, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक लिया। जो छात्र गेट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, पुलिस ने उन्हें मारते-पीटते हिरासत में ले लिया। कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। छात्रों का आरोप है कि सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों ने महिलाओं से बदतमीजी की, उन्हें मारा-पीटा और उनके कपड़े फाड़े। सिविल ड्रेस वाले पुलिस वाले महिलाओं के बाल खींच रहे थे। एक लड़की का हाथ इतना जोर से मरोड़ा कि वो चीख पड़ी। कपड़े फाड़ दिए गए। एक छात्रा की कुर्ती के बटन तक उखड़ गए। “छोड़ो… छोड़ो” की चीखें गूँज रही थीं।
छात्रों ने ये भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा छीनकर तोड़ी। एक दिव्यांग छात्र को पुलिस ने तब तक मारा जब तक उसके हाथ से खून बहने नहीं लगा। 50 से ज्यादा छात्रों को घसीट-घसीटकर हिरासत में लिया गया। कई को अंजान जगहों पर ले जाया गया। घायलों को मेडिकल मदद देने से मना कर दिया।
जेएनयू शिक्षक संघ ने पुलिस द्वारा छात्रों के खिलाफ बेरहमी से बल प्रयोग और JNUSU पदाधिकारियों समेत कई छात्रों को हिरासत में लेने की कड़ी निंदा की है। शिक्षक संघ ने कहा कि “ऐसे मार्च पर रोक लगाना, फिर मार्च करने वालों पर केस करना और उनके खिलाफ बहुत ज्यादा बल का इस्तेमाल करना दिल्ली पुलिस की आम चाल बन गई है।” उन्होंने शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाया कि क्या वह जातिवादी बयान देने वाली कुलपति के साथ खड़ी है।
JNUSU ने कहा कि जैसे ही छात्र कैंपस के मेन गेट पर पहुँचे, पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने गेट को चेन और कई लेयर बैरिकेड से बंद कर दिया। जब छात्रों ने मिलकर गेट खुलवाया तो पुलिस ने 50 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में ले लिया और उन्हें कई अज्ञात जगहों पर भेज दिया। कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं और पुलिस ने घायलों को मेडिकल मदद देने से मना कर दिया।
जेएनयू प्रशासन ने कहा कि JNUSU के प्रोटेस्टर UGC रेगुलेशन लागू करने की माँग कर रहे हैं जो माननीय सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है। प्रशासन के अनुसार JNUSU आज तक अपने रस्टिकेशन के मुख्य मुद्दे पर ध्यान देने से इनकार कर रहा है। छात्रों ने प्रशासन के इस बयान की निंदा की और कहा कि वे अपना जातिवादी बयान छिपाने के लिए मार्च के उद्देश्य को गुमराह कर रहे हैं। हिरासत में लिए छात्रों को छोड़ने की मांग लेकर पूरी रात स्टूडेंट्स में गेट के बाहर बैठे रहे।
अभी तक की जानकारी के अनुसार 14 छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें JNUSU पदाधिकारी अदिति, गोपिका, दानिश, पूर्व अध्यक्ष नीतीश, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, रणविजय, राहुल, अंश, श्याम, गौरी, मणिकांत, वरकी और अभिषेक शामिल हैं। सुबह 7 बजे तक सभी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
- विवेक मिश्रा डॉ बी आर अम्बेडकर यूनिवर्सिटी में परफॉरमेंस स्टडीज में एमए कर रहे हैं।
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