नई दिल्ली: लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) में लाल बारादरी इमारत की घेराबंदी और वहां कथित तौर पर नमाज़ पढ़ने को लेकर हुए हंगामे के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। दो अलग-अलग गुटों के प्रदर्शन के बाद सात छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि छह पूर्व छात्रों के कैंपस में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले दो दिनों में हुई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रॉक्टर ने सात छात्रों को नोटिस थमाया है। इसके साथ ही पुलिस को पत्र लिखकर छह पूर्व छात्रों के कैंपस में प्रवेश पर रोक लगाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 13 अन्य छात्रों को निजी मुचलका (Personal Bond) भरने का नोटिस भी दिया गया है।
हसनगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ चितवन कुमार के अनुसार, मजिस्ट्रेट ने सोमवार की घटना के बाद इन 13 छात्रों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतें (Sureties) पेश करने का आदेश दिया है। यह कदम अगले एक साल तक शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में लोक शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए यह एहतियाती कार्रवाई की गई है।
नोटिस में क्या कहा गया है?
पुलिस रिपोर्ट के आधार पर भेजे गए इस नोटिस में कहा गया है कि, "छात्रों ने जानबूझकर लाल बारादरी परिसर में चल रहे निर्माण कार्य में बाधा डालने की कोशिश की।"
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि छात्रों ने कैंपस की सड़क पर बैठकर धरना दिया, नारेबाजी की और एक सार्वजनिक स्थान पर नमाज़ पढ़ने का प्रयास किया।
नोटिस के मुताबिक, इस कृत्य से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने और तनाव पैदा होने का खतरा था। इसमें आगे कहा गया है कि इन छात्रों के भविष्य में भी ऐसे कदम उठाने की प्रबल आशंका है, जिससे शांति भंग हो सकती है। इसी आधार पर उन्हें भारी जमानत के साथ पाबंद करने का अनुरोध किया गया है।
मंगलवार को फिर हुआ हंगामा, पढ़ा गया हनुमान चालीसा
इससे पहले मंगलवार दोपहर को भी कैंपस का माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब कथित तौर पर दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े छात्रों ने लाल बारादरी में नारेबाजी की और वहां गंगाजल छिड़का। उनका आरोप था कि एक दिन पहले अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े छात्रों ने कैंपस का माहौल खराब किया था। स्थिति को संभालने और इन छात्रों को हटाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
प्रदर्शनकारी छात्र उज्जवल सिंह ने आरोप लगाया, "हमने पांच बार हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी के कारण हम केवल दो बार ही पाठ कर सके। पुलिस हमें जबरन वहां से ले गई।"
वहीं, इस मामले पर लखनऊ के एडिशनल डीसीपी (ADCP) जितेंद्र कुमार दुबे ने स्पष्ट किया कि, "स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और शांति कायम कर ली गई है।"
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ दिन पहले नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और समाजवादी छात्र सभा के सदस्यों ने लाल बारादरी की घेराबंदी का विरोध किया। उनका दावा था कि प्रशासन का यह कदम अवैध है।
इन छात्र संगठनों का यह भी कहना था कि इस घेराबंदी से मुस्लिम छात्रों और समुदाय के उन लोगों को परेशानी होगी जो रमजान के दौरान वहां नमाज़ अदा करते हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें सात छात्रों को मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाकर नमाज़ पढ़ते हुए देखा गया था।
विश्वविद्यालय का क्या है तर्क?
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को अपना रुख साफ करते हुए कहा कि लाल बारादरी की इमारत काफी जर्जर स्थिति में है। सुरक्षा कारणों से ही इसके चारों ओर घेराबंदी की गई है। प्रशासन ने छात्रों के उन दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि लाल बारादरी के अंदर बने हॉल का इस्तेमाल मस्जिद के रूप में किया जाता था।
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