
विजयनगर- सरकारी स्कूलों में बच्चों से शारीरिक श्रम करवाने की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पढ़ाई की जगह छात्रों को पानी भरने, स्कूल की सफाई करने और यहां तक कि टॉयलेट धोने जैसे अपमानजनक काम करवाए जाते है। ऐसे ही एक मामला कर्नाटक के विजयनगर जिले के हागरीबोम्मनहल्ली तालुक के हम्पापट्टणा गांव से सामने आया है, जहां सरकारी वरिष्ठ प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक उमेश पर छोटे बच्चों को केले का लालच देकर स्कूल का शौचालय साफ करवाने का गंभीर आरोप लगा है। प्रभारी प्रधानाध्यापक की अमानवीय हरकत ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है।
स्थानीय युवाओं ने जब यह घटना देखी तो उन्होंने तुरंत शिक्षक को रोका। शिक्षा विभाग के सख्त नियमों के बावजूद, जिसमें छात्रों से किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम या शौचालय सफाई करवाना पूरी तरह वर्जित है, उमेश ने इन नियमों को ताक पर रख दिया। जब युवाओं ने उनसे अपनी गलती मानने को कहा, तो प्रधानाध्यापक ने घमंड भरा रवैया अपनाते हुए धमकी दी- “तुम कौन होते हो मुझे सवाल करने वाले? मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस केस दर्ज करा दूंगा और जेल भिजवा दूंगा।”
शिक्षक की इस जिद और अहंकार से नाराज ग्रामीणों ने सैकड़ों की तादाद में स्कूल के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने नारे लगाए- “अगर शिक्षक खुद ऐसा व्यवहार करेंगे तो हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा? हम गांव में ऐसे शिक्षक नहीं चाहते।” ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक उमेश की तत्काल निलंबन की मांग की।
ग्रामीणों ने हागरीबोम्मनहल्ली ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रभाकर के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन करने और बच्चों को बाल मजदूर की तरह इस्तेमाल करने के लिए उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। बीईओ ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर मामले की जांच करेंगे और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिछले पाँच वर्षों में देशभर के सरकारी स्कूलों में छात्रों से शौचालय सफाई और उल्टी साफ करवाने की कई घटनाएँ रिपोर्ट हुई हैं। दिसंबर 2023 में कर्नाटक के बेंगलुरु में आंध्रहल्ली और कोलार के मालूर मोरार्जी देसाई आवासीय विद्यालय में बच्चों को टॉयलेट पिट साफ करने को मजबूर किया गया। दिसंबर 2022 में तमिलनाडु के इरोड (पेरुंदुरै) में 6 दलित छात्रों को टॉयलेट और पानी टैंक साफ करवाया गया। अगस्त 2024 में उत्तर प्रदेश मुजफ्फरनगर में 6 वर्षीय दलित बालक को टॉयलेट साफ करवाने का मामला सामने आया जबकि नवंबर 2024 में केरल के इडुक्की के स्लीवामाला स्कूल में 6 वर्षीय दलित छात्र से सहपाठी की उल्टी साफ करवाई गई। अप्रैल 2025 में बेंगलुरु के बेगुर और येलाहंका में छात्रों को टॉयलेट सफाई करवाने पर शिक्षकों को निलंबित किया गया। अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक लड़कियों के स्कूल की वार्डन पर छात्राओं ने आरोप लगाया कि वो उनसे स्कूल परिसर और शौचालयों की सफाई करवाती थी। इसके अलावा, उन्हें रसोई के काम जैसे सब्जी काटना और रोटियां बेलने के लिए भी मजबूर किया जाता था।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 17 के तहत किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड या मानसिक प्रताड़ना (जिसमें शौचालय/उल्टी सफाई जैसे अपमानजनक कार्य शामिल हैं) नहीं दी जा सकती; कर्नाटक स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सर्कुलर (जनवरी 2024 तथा अप्रैल 2025) में स्पष्ट प्रतिबंध है कि छात्रों से किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम या शौचालय सफाई नहीं करवाई जा सकती, उल्लंघन पर दोषी शिक्षक/प्रधानाध्यापक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत FIR दर्ज करने के सख्त प्रावधान हैं तथा बीईओ और प्रधानाध्यापक को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
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