
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने 2026-27 के बजट में एक अहम घोषणा की थी। इसके तहत शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के अंतर्गत 8वीं कक्षा पास करने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के छात्रों को उसी स्कूल में 9वीं और 10वीं कक्षा में मुफ्त शिक्षा दी जानी थी।
हालांकि, अब तक इस योजना को लागू करने के लिए कोई आधिकारिक सरकारी आदेश जारी नहीं किया गया है। इसका नतीजा यह है कि निजी स्कूल इन छात्रों को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए भारी-भरकम फीस की मांग कर रहे हैं, जिससे अभिभावक खासे परेशान हैं।
केंगेरी के रहने वाले प्रकाश ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि उनकी बेटी ने आरटीई के तहत एक निजी स्कूल से 8वीं कक्षा पास की है और इस साल वह 9वीं में गई है। प्रकाश का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने उनकी बेटी को आरटीई के तहत 9वीं कक्षा में दाखिला देने से साफ इनकार कर दिया है।
स्कूल प्रशासन का तर्क है कि उन्हें सरकार की तरफ से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिला है। इसके साथ ही, स्कूल में उसी कक्षा में पढ़ाई जारी रखने के लिए उनसे 1.5 लाख रुपये की फीस भी मांगी जा रही है।
आपको बता दें कि आरटीई अधिनियम-2009 के तहत छह से 14 वर्ष की आयु यानी कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाती है। राज्य के निजी स्कूलों में इस अधिनियम के तहत नामांकित छात्रों की फीस का पूरा खर्च सरकार खुद उठाती है।
आमतौर पर 8वीं कक्षा पास करने के बाद इनमें से कुछ छात्र पूरी फीस चुकाकर उसी स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। वहीं जो छात्र इतनी महंगी फीस नहीं दे पाते, उन्हें मजबूरन दूसरे स्कूलों का रुख करना पड़ता है।
इस समस्या को देखते हुए शिक्षाविदों और दलित संगठनों ने सरकार से अपील की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने 2026-27 के राज्य बजट से 19 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की।
इस राशि का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा 10 तक उसी स्कूल में अपनी शिक्षा मुफ्त जारी रखने में मदद करना है। योजना के अनुसार, इन छात्रों के आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च समाज कल्याण विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
इस पूरे मामले पर समाज कल्याण विभाग के आयुक्त राकेश कुमार के. ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत कक्षा 10 तक उसी स्कूल में एससी/एसटी छात्रों की शिक्षा जारी रखने से जुड़ी फाइल अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि स्कूली शिक्षा विभाग को एक पत्र लिखा जाएगा। इस पत्र के माध्यम से एक सख्त निर्देश जारी किया जाएगा कि किसी भी एससी/एसटी छात्र को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेने के लिए मजबूर न किया जाए।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें