इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पंत छात्रावास में SC/ST/OBC छात्रों के साथ कैसा व्यवहार? भीम आर्मी चीफ ने दी चेतावनी

19 जुलाई को इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रावास खाली कराने का प्रयास किया। छात्रों ने इसका तीव्र विरोध किया। इसके बाद छात्रावास की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई।
छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें अवैध बता रहा है और जबरन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, जिसमें कमरों के ताले तोड़े गए तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। यह कथित कार्रवाई उनके आईएएस-पीसीएस की तैयारी को प्रभावित कर रही है।
छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें अवैध बता रहा है और जबरन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, जिसमें कमरों के ताले तोड़े गए तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। यह कथित कार्रवाई उनके आईएएस-पीसीएस की तैयारी को प्रभावित कर रही है।चित्र साभार: बसावन इंडिया
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प्रयागराज- इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास में स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आईएएस-पीसीएस प्री एग्जामिनेशन सेंटर में एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों को अवैध बताकर जबरन खाली कराने, कमरों के ताले तोड़ने तथा बिजली-पानी काटने की शिकायत सामने आई है।

छात्रों के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था और 13 सितंबर 2024 को उन्हें पंत छात्रावास में आवंटन मिला था। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रावास में नए प्रवेश की प्रक्रिया नहीं चलाई और न ही नए आवेदन आमंत्रित किए। ऐसे में छात्रों का दावा है कि उनका आवंटन सितंबर 2026 तक वैध है।

हालांकि, छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें अवैध बता रहा है और जबरन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, जिसमें कमरों के ताले तोड़े गए तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। यह कथित कार्रवाई उनके आईएएस-पीसीएस की तैयारी को प्रभावित कर रही है।

दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों की शिक्षा और सम्मान पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
-चंद्रशेखर आजाद

बसावन इंडिया की एक पोस्ट के मुताबिक यह छात्रावास वर्षों तक आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली छात्रों को निःशुल्क आवास और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का अवसर देता रहा। वर्ष 2004 में तत्कालीन केंद्र सरकार के दौरान इसकी अनुदान राशि बंद कर दी गई। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अधीन यह छात्रावास छात्रों से लिए जाने वाले शुल्क के आधार पर संचालित होने लगा। कोरोना महामारी के दौरान छात्रावास बंद कर दिया गया था, लेकिन छात्रों के निरंतर प्रयास और संघर्ष से इसे दोबारा शुरू कराया गया। अब एक बार फिर इसके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है।

19 जुलाई को इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रावास खाली कराने का प्रयास किया। छात्रों ने इसका तीव्र विरोध किया। इसके बाद छात्रावास की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। पिछले 24 घंटे से छात्र बिना बिजली और पानी के छात्रावास में डटे हुए हैं और अपने संस्थान को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन वास्तव में छात्रावास खाली कराना चाहता है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आगे इसकी क्या योजना है। अब तक न तो नए प्रवेश की कोई अधिसूचना जारी की गई है, न ही छात्रावास के संचालन को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना सामने आई है। ऐसे में छात्रों को आशंका है कि छात्रावास को बंद कर अव्यवस्था के हवाले छोड़ दिया जाएगा, जिससे भविष्य में उसके मूल उद्देश्य और स्वरूप पर ही प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

अज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह एनडीए सरकार की बहुजन विरोधी मानसिकता का उदाहरण है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल किया कि बांग्लादेश में दलितों की चिंता दिखाने वाले उन्हें प्रयागराज में एससी, एसटी, ओबीसी छात्रों के साथ हो रही इस ज्यादती पर क्यों नहीं दिखाई दे रही।

उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि छात्रों का उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए, छात्रावास में बिजली-पानी की व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए, वर्ष 2025 से लंबित छात्रावास प्रवेश प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

चंद्रशेखर ने जोर दिया कि दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों की शिक्षा व सम्मान पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (@UoA_Official) को भी टैग किया।

छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें अवैध बता रहा है और जबरन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, जिसमें कमरों के ताले तोड़े गए तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। यह कथित कार्रवाई उनके आईएएस-पीसीएस की तैयारी को प्रभावित कर रही है।
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छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें अवैध बता रहा है और जबरन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, जिसमें कमरों के ताले तोड़े गए तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। यह कथित कार्रवाई उनके आईएएस-पीसीएस की तैयारी को प्रभावित कर रही है।
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छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें अवैध बता रहा है और जबरन खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है, जिसमें कमरों के ताले तोड़े गए तथा बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। यह कथित कार्रवाई उनके आईएएस-पीसीएस की तैयारी को प्रभावित कर रही है।
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