फर्श पर सोती बच्चियों को सांप ने डसा, तीन की मौत: जिंदगी से जूझ रही 14 साल की समृद्धि कैसे बनी आदिवासी आंदोलन की आवाज?

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सुविधाओं के अभाव में फर्श पर सो रही छात्राओं को सांप ने डसा था। तीन मौतों के बाद वेंटिलेटर पर जिंदगी से लड़ रही 14 साल की समृद्धि अब आदिवासी स्कूलों की दुर्दशा के खिलाफ उठ रहे बड़े आंदोलन का चेहरा बन गई है।
Gadchiroli ashram school.
गढ़चिरौली आश्रम स्कूल में फर्श पर सो रही 6 बच्चियों को सांप ने डसा। 3 की मौत, समृद्धि वेंटिलेटर पर।Social Media (X)
Published on

महाराष्ट्र: गढ़चिरौली स्थित एक आदिवासी आवासीय विद्यालय में हुए दर्दनाक हादसे को दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है। चौदह वर्षीय समृद्धि नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा कक्ष (पीआईसीयू) में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही है।

उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है कि उसकी यह हालत आदिवासी स्कूलों की दुर्दशा के खिलाफ उठ रहे विरोध प्रदर्शनों का एक बड़ा कारण बन गई है, जिसने सरकार को बदलाव के वादे करने पर मजबूर कर दिया है।

हादसे की वह खौफनाक रात

बीती 10 अगस्त की रात गढ़चिरौली के जपतालाई गांव स्थित जपतालाई आश्रम स्कूल में एक बेहद खौफनाक घटना घटी। स्कूल में बेड की सुविधा नहीं थी, जिसके कारण बच्चियां फर्श पर सो रही थीं। इसी दौरान एक जहरीले करैत सांप ने छह आदिवासी छात्राओं को अपना शिकार बना लिया।

इस दर्दनाक घटना में तीन बच्चियों ने दम तोड़ दिया, जबकि दो ठीक हो गई हैं। समृद्धि की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। शुरुआत में समृद्धि का इलाज गढ़चिरौली के जिला अस्पताल में हुआ था।

डॉक्टरों के अनुसार, उसके दिमाग में खून का रिसाव (इंट्राक्रैनियल ब्लीडिंग) हुआ था, जिसके लिए ब्रेन सर्जरी करनी पड़ी। वह अब भी बार-बार बेहोश हो जाती है और उसे सांस लेने के लिए वेंटिलेटर के सहारे की जरूरत पड़ रही है।

अस्पताल के फर्श पर बेबस परिवार का इंतजार

समृद्धि के पिता सुरेश नैताम अस्पताल में अपनी बेटी के पास चुपचाप बैठे रहते हैं। उनकी पत्नी अर्चना, साला रोशन मडावी और समृद्धि के कुछ शिक्षक बारी-बारी से वहां रुकते हैं। सभी को बस उस पल का इंतजार रहता है जब यह 14 साल की बच्ची अपनी आंखें खोलती है। मडावी बताते हैं कि शुरुआत में समृद्धि के लिए ऐसा करना भी मुश्किल था, लेकिन अब वह आंखें खोलकर आसपास देखती है।

जीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे का कहना है कि समृद्धि की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। हालांकि उसे लंबे समय तक वेंटिलेटर से हटाकर रखना अभी मुश्किल है। उसका शरीर लकवाग्रस्त है, बस बाईं तरफ थोड़ा बहुत मूवमेंट देखने को मिला है। डॉक्टरों को उसकी कम उम्र को देखते हुए अच्छी रिकवरी की उम्मीद है।

समृद्धि बड़ी होकर पुलिस में जाना चाहती थी। उसके पिता सुरेश बताते हैं कि पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए स्थानीय भाषा (मराठी) का ज्ञान जरूरी है। उनका परिवार एक स्थानीय आदिवासी बोली बोलता है। इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को 20 किलोमीटर दूर जपतालाई आश्रम स्कूल भेजा था, जहां उनके परिवार की एक अन्य बच्ची भी पढ़ चुकी थी। स्कूल गए उसे महज एक महीना ही हुआ था कि यह हादसा हो गया।

पिता सुरेश अब अपनी खेती को लेकर भी चिंतित हैं। रांघी गांव में उनका डेढ़ एकड़ धान का खेत है जो मवेशियों ने बर्बाद कर दिया है, क्योंकि वे आनन-फानन में बिना बाड़ लगाए अस्पताल दौड़ पड़े थे। परिवार की आय का यह इकलौता साधन था। अस्पताल में रुकने की जगह न होने के कारण यह बेबस परिवार अपना थोड़ा सा सामान लिए वार्ड के बाहर फर्श पर सोता है। वहीं समृद्धि से छोटा उसका भाई अपनी दादी के पास गांव में ही है।

योजनाओं के बावजूद क्यों खाली रहे हाथ?

समृद्धि और उसकी मृत सहेलियों की जान शायद बच जाती, अगर आदिवासी स्कूलों को फर्नीचर मुहैया कराने की आठ साल पुरानी योजना का लाभ उन तक पहुंचा होता। साल 2018-19 में महाराष्ट्र आदिवासी विकास विभाग ने 'कायापलट अभियान' की शुरुआत की थी।

महाराष्ट्र कौशल विकास विभाग की वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा ने इस योजना की रूपरेखा तैयार की थी। 1997-98 में दूरदराज के वन क्षेत्रों में फील्ड अधिकारी के रूप में काम करते हुए उन्होंने बच्चों की सांप काटने से होने वाली मौतों और फर्श पर सोने की मजबूरी को करीब से देखा था।

जब वर्मा आदिवासी विकास विभाग की सचिव बनीं, तो उन्होंने यह सुनिश्चित करने की ठानी कि कोई भी बच्चा फर्श पर न सोए, न पढ़े और न ही खाना खाए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत 502 सरकारी आश्रम स्कूलों और 491 सरकारी हॉस्टलों के करीब 2.5 लाख छात्रों को कवर किया गया था।

इस दौरान 30,809 बड़े डेस्क, 37,104 छोटे डेस्क और 22,135 बंक बेड के साथ-साथ डाइनिंग टेबल, अलमारियां और कुर्सियां भी खरीदी गई थीं। केंद्र सरकार ने इस योजना के लगभग 200 करोड़ रुपये के खर्च का एक बड़ा हिस्सा दिया था।

लेकिन समृद्धि के स्कूल जपतालाई आश्रम में बेड इसलिए नहीं थे क्योंकि यह कार्यक्रम सिर्फ पूरी तरह से सरकारी आश्रम स्कूलों के लिए था। सरकार द्वारा सहायता प्राप्त लेकिन निजी रूप से प्रबंधित स्कूलों को इसमें शामिल नहीं किया गया था।

रद्द हुआ स्कूल का लाइसेंस और भड़का आंदोलन

जपतालाई में हुई मौतों के बाद, आदिवासी विकास विभाग के नागपुर सर्कल ने नागपुर, गढ़चिरौली, गोंदिया, भंडारा, चंद्रपुर और वर्धा जिलों के 133 सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों का निरीक्षण शुरू कर दिया है।

लापरवाही सामने आने के बाद समृद्धि के स्कूल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। आदिवासी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वहां के छात्रों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है।

इस बीच, इस घटना ने छात्रों के आक्रोश को भड़का दिया है। बुधवार को महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने पुणे में प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ पांच घंटे लंबी बैठक की। इन छात्रों की भूख हड़ताल 15वें दिन में प्रवेश कर चुकी थी। मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सरकार जपतालाई की घटना सहित उनकी सभी चिंताओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Gadchiroli ashram school.
छात्रों के सर्टिफिकेट उनकी 'संपत्ति' हैं, बकाया फीस का हवाला देकर इन्हें रोका नहीं जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
Gadchiroli ashram school.
TM Exclusive रक्षाबंधन पर छलका ‘लखपति दीदियों’ का दर्द: 5 साल से चला रहीं दुकानें खाली करने के निर्देश, बोलीं- "हमें लखपति नहीं, सड़क पर ला रहे हैं"
Gadchiroli ashram school.
तमिलनाडु: मां के हाथ जोड़ने पर ऐतराज जताना पड़ा भारी, हेडमिस्ट्रेस के जातिगत अपमान से आहत 16 वर्षीय दलित छात्रा ने दी जान

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com