“सड़क बनवा दो, हम पढ़ेंगे”: 1.5 किमी दलदली सड़क से तंग आकर हमीरपुर में स्कूली बच्चों ने निकाला तिरंगा मार्च

कलेक्ट्रेट घेर कर 4 घंटे धरना; आजाद ने पुलिस व्यवहार पर उठाया सवाल
स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने मंगलवार को हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने मंगलवार को हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
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उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कुरारा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चंदूपुर और उससे जुड़े कई डेरों गंगवा का डेरा, बच्ची का डेरा, ब्रह्मा का डेरा समेत आसपास के क्षेत्रों के स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने मंगलवार को हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंच गए। उनकी मांग एक ही थी स्कूल जाने वाले रास्ते की लगभग 1.5 से 1.6 किलोमीटर कच्ची सड़क को पक्का करवाया जाए, जो बारिश में दलदल बन जाती है और करीब तीन हजार लोगों की आवाजाही को प्रभावित करती है। बच्चे और उनके अभिभावक कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर बैठकर चार से पांच घंटे तक धरना देते रहे।

ग्रामीणों और छात्रों के अनुसार यह सड़क आजादी के बाद से अब तक पूरी तरह पक्की नहीं बन सकी है। जिला मुख्यालय से मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद बरसात के दिनों में कीचड़ और दलदल की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है, बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना कठिन हो जाता है तथा एंबुलेंस भी आसानी से नहीं पहुंच पाती। जुलाई की शुरुआत में भी इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन हुआ था, जिसके बाद प्रशासन ने अस्थायी रूप से मिट्टी डलवा दी थी, लेकिन बारिश में वह बह गई।

मंगलवार सुबह चंदूपुर क्षेत्र से शुरू हुई तिरंगा यात्रा में कई छात्र-छात्राएं और ग्रामीण शामिल हुए। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात की मांग की और मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया। प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया। एसडीएम सदर अभिषेक कुमार, सीओ यशपाल सिंह और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। बच्चों के डीएम कार्यालय में प्रवेश करने के प्रयास के दौरान पुलिस ने उन्हें रोका। एक वायरल वीडियो में एडीएम राकेश कुमार बच्चों से पहाड़ा और व्याकरण पूछते नजर आए, जिस पर आरोप लगा कि समस्या सुनने के बजाय बच्चों से सवाल पूछे जा रहे हैं।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि वन विभाग से आवश्यक एनओसी मिल चुकी है और लोक निर्माण विभाग ने करीब 1600 मीटर सड़क के निर्माण के लिए 1.81 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेज दी है। आश्वासन दिया गया कि मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। अस्थायी रूप से मिट्टी और गिट्टी डालकर रास्ता सुगम बनाने का दावा भी किया गया। आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ, हालांकि बच्चों की जिलाधिकारी से प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो सकी।

सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “जिला हमीरपुर में स्कूल जाने की सड़क की मांग को लेकर स्कूली बच्चों और बच्चियों का 5 किलोमीटर तिरंगा मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचना और 4 घंटे धरने पर बैठना बेहद चिंताजनक है। करीब 1.5 KM सड़क दलदल बनने से लगभग 3,000 लोगों और बच्चों की आवाजाही प्रभावित है। समस्या का समाधान करने के बजाय पुलिस का इस्तेमाल बच्चों को धकियाने के लिए किया जा रहा है। बच्चियों को बार-बार ‘हट-हट’ कहकर संबोधित किया गया। भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार में उत्तर प्रदेश के दो चेहरे हैं। एक तरफ पुलिस और पूरा शासन-प्रशासन खुद मुख्यमंत्री जी पर फूल बरसा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमीरपुर में स्कूल जाने के लिए सड़क की मांग कर रहे छोटे-छोटे बच्चों और बच्चियों को पुलिस अपमानित कर धकिया रही है। सत्ता की देखरेख में स्वागत के लिए फूल और अपने अधिकार की मांग कर रहे बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार। यह कैसा शासन और कैसी संवेदनशीलता है?”

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