
जयपुर- राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के टोंक में दिए गए अमर्यादित और अपमानजनक बयान ने पूरे प्रदेश में तूफान खड़ा कर दिया है। मंत्री ने टोंक के एक कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते बल्कि प्राइवेट स्कूलों में भेजते हैं, वे 'निकम्मे' हैं और 'फ्री की तनख्वाह' ले रहे हैं। इस बयान पर राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र शर्मा, सभाध्यक्ष महावीर सिहाग तथा महामंत्री विजय पोटलिया ने एक संयुक्त बयान जारी कर मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री द्वारा संपूर्ण शिक्षक समुदाय को 'निकम्मा' करार देना और उनके वेतन को 'फ्री की तनख्वाह' बताना लाखों कर्मठ शिक्षकों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला है। यह उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का घटिया प्रयास है।
संघ के नेताओं ने कहा, “जो शिक्षक विपरीत परिस्थितियों, ढांचागत सुविधाओं की कमी के बावजूद सरकारी स्कूलों में देश और प्रदेश का भविष्य संवार रहे हैं, उनके प्रति इस तरह की ओछी भाषा का इस्तेमाल एक जिम्मेदार मंत्री को शोभा नहीं देता। सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नाम पर स्कूल बंद करने, रोजगार छीनने और शिक्षा को माफियाओं के हवाले करने की कोशिश कर रही है, जिसका शिक्षक लगातार विरोध कर रहे हैं।”
शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार साजिश के तहत शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का भारी बोझ डाल रही है, जिससे पढ़ाई का मुख्य काम प्रभावित हो रहा है। अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छुपाने के लिए शिक्षकों को बलि का बकरा बनाना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठन के राज्य उपाध्यक्ष हेमंत कुमार ने कहा कि 40% से कम अंक आने पर दूरस्थ क्षेत्रों में तबादला करने की धमकी और ग्रामीणों को शिक्षकों पर जासूसी के लिए उकसाना शिक्षा के माहौल को पूरी तरह दूषित कर देगा। यह शिक्षकों और ग्रामीणों के बीच अविश्वास की खाई पैदा करने की राजनीति है। मंत्री के बार-बार विवादित बयानों से शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हो रही है।
शिक्षक संघ ने अपील की कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं, तो सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ेंगी और विश्वास बढ़ेगा। शिक्षक भी सामाजिक परिवेश में रहते हैं, इसलिए उनके बच्चे भी सरकारी स्कूलों में ही पढ़ेंगे।
मंत्री का बयान: टोंक में खटीक समाज के सम्मान समारोह में मदन दिलावर ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लेकिन अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल भेजने वाले शिक्षक 'निकम्मे' हैं। उन्होंने दावा किया कि अब सरकारी स्कूल प्राइवेट से बेहतर हो गए हैं, इसलिए ऐसे शिक्षक 'फ्री की तनख्वाह' ले रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि," शिक्षा में सुधार के लिए मुझे आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन मैंने सुधार किए हैं। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई कड़े फैसले लिए गए हैं, जिनसे शिक्षक मुझसे नाराज़ हैं। शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।"
आगे कहा, "अब सिर्फ़ सौ प्रतिशत नतीजे दिखाने से काम नहीं चलेगा; बल्कि छात्रों को परीक्षा में 80 में से कम से कम 40 अंक लाने होंगे। अगर नतीजे खराब रहे, तो संबंधित शिक्षक को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा और ज़रूरत पड़ने पर सस्पेंशन या ट्रांसफर जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।"
सरकारी स्कूल के बच्चों ने पहली बार टॉप किया: राजस्थान की शिक्षा का स्तर पहले देश में 14वें स्थान पर था। अब यह चौथे स्थान पर है। सरकारी स्कूल के बच्चों ने पहली बार टॉप किया है। प्राइवेट स्कूल के बच्चे पीछे रह गए हैं। दिलावर ने कहा कि अब सरकारी स्कूल भी प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले बेहतरीन शिक्षा देते हैं; मैं इसकी गारंटी देता हूँ। बच्चे माता-पिता और शिक्षकों को देखकर संस्कार सीखते हैं, इसलिए माता-पिता का भी संस्कारवान होना ज़रूरी है।
दिलावर ने कहा," शिक्षक कहाँ देख रहे हैं, क्या कर रहे हैं, इन सबका बच्चों पर असर पड़ता है। इसी वजह से हम गुटखा और शराब का सेवन करने वाले शिक्षकों की सूची बना रहे हैं; ये सूचियाँ तैयार की जा रही हैं, जिसके बाद हम आपको बताएँगे कि हम क्या करेंगे। हमने सभी अधिकारियों से कहा है कि राजस्थान साफ़-सुथरा दिखना चाहिए। जो भी इसमें लापरवाही बरतेगा, उसे हम एक बार चेतावनी देंगे और दूसरी बार नहीं बख्शेंगे। चाहे वे किसी भी समुदाय के हों, हम किसी को नहीं छोड़ेंगे; हम कार्रवाई करेंगे।"
शिक्षकों की नाराजगी: शिक्षक संघ इसे पूरे समुदाय का अपमान मान रहा है। वे कहते हैं कि बुनियादी सुविधाओं की कमी, गैर-शैक्षणिक कामों के बोझ और सिस्टम की खामियों के बावजूद शिक्षक अपना काम कर रहे हैं, लेकिन मंत्री उन्हें ही दोषी ठहरा रहे हैं।
यह मदन दिलावर के विवादित बयानों की कड़ी में नया मामला है। पहले भी शिक्षकों की पोशाक, शराब और अन्य मुद्दों पर उनके बयान विवादों में रहे हैं।
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मंत्री ऐसे बयान जारी रखते हैं और शिक्षकों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो बड़ा आंदोलन अपरिहार्य होगा। प्रदेश के लाखों शिक्षक और अभिभावक इस मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं।
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