'तेरी खाल उधेड़कर जूते बनाएंगे': बंगाल में दलित परिवार को घर में घुसकर पीटा, नाबालिग के गुप्तांग पर मारी लात; SC आयोग ने DM-SP को किया तलब

पश्चिम बंगाल के हुगली में 31 दिसंबर की शाम हुई बर्बरता, 'मुची' जाति का होने पर नाबालिग को सरेआम पीटा; कार्रवाई के लिए दौड़ता रहा पिता, पुलिस की लापरवाही पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सख्त.
Dalit Family in Bengal faces Brutal Caste Attack.
'मुची' जाति का होने की सजा! नाबालिग को सड़क पर घसीटकर पीटा, मां-बहन को रेप की धमकी; 6 दिन बाद जागी पुलिस(Ai Image)
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हुगली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में नए साल की पूर्व संध्या (31 दिसंबर) एक दलित परिवार के लिए खौफनाक मंजर लेकर आई। जिले के बालागढ़ थाना क्षेत्र में दबंगों की भीड़ ने एक अनुसूचित जाति (मुची) परिवार के घर में घुसकर जानलेवा हमला किया. आरोप है कि हमलावरों ने 15 साल के नाबालिग लड़के को लात-घूंसों से पीटा, दिव्यांग बेटी और पत्नी को रेप की धमकियां दीं और जातिसूचक गालियां बकीं. पुलिस द्वारा समय पर कार्रवाई न करने और FIR दर्ज करने में आनाकानी करने के बाद अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है.

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित बीरेंद्र दास (निवासी दक्षिण चाला नंदीखेड़ा, बालागढ़) द्वारा पुलिस को दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, घटना 31 दिसंबर 2025 की शाम करीब 6:30 बजे की है. बीरेंद्र दास उस वक्त बाज़ार गए हुए थे. उसी दौरान पड़ोस के ही सवर्ण जाति (कायस्थ) के आरोपी - रिंटू कुंडू, शुक्ला कुंडू, अनिमा कुंडू, रोबिन कुंडू, जयंत कुंडू और रूपाली कुंडू अन्य असामाजिक तत्वों के साथ उनके घर में जबरन घुस आए.

नाबालिग बेटे के पेट और प्राइवेट पार्ट पर मारे लात

शिकायत में बीरेंद्र दास ने उस दिन की भयावह घटना का जिक्र किया है. आरोपियों ने उनके 15 वर्षीय बेटे अयन दास को पकड़ लिया. जयंत कुंडू और शुक्ला कुंडू ने बच्चे के हाथ-पैर पकड़े, जबकि रिंटू कुंडू ने उसके पेट और प्राइवेट पार्ट (groin area) पर बेरहमी से लात मारी. बच्चे को घर से बाहर सड़क पर घसीटा गया और सार्वजनिक रूप से पीटा गया, जिससे उसे अंदरूनी चोटें आईं और ब्लीडिंग शुरू हो गई.

जातिसूचक गालियां और रेप की धमकी

आरोप है कि हमलावरों ने परिवार को उनकी जाति 'मुची' (चर्मकार) को लेकर अपमानित किया. शिकायत पत्र के अनुसार, आरोपियों ने कहा- "साला मुची रास्ते पेले अबार मारबो" (साले मुची, रास्ते पर मिले तो फिर मारेंगे) और "तोर चमड़ा खुले पायर जूतो बनाबो" (तुम्हारी चमड़ी उधेड़कर पैर का जूता बनाएंगे). इतना ही नहीं, बीरेंद्र दास की पत्नी डाली दास और उनकी बौद्धिक रूप से दिव्यांग (intellectually disabled) बेटी मंगली दास को भी रेप की धमकियां दी गईं, जिससे पूरा परिवार दहशत में है.

पुलिस ने पहले FIR दर्ज करने से किया इनकार

इस मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. पीड़ित का आरोप है कि घटना वाले दिन ही वह बालागढ़ थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करने के बजाय सिर्फ एक जनरल डायरी (G.D. No. 2113) करके उन्हें टरका दिया. जब उन्होंने ग्राम पंचायत में गुहार लगाई और उच्च अधिकारियों तक बात पहुंची, तब जाकर घटना के 6 दिन बाद यानी 6 जनवरी 2026 को शाम 5:35 बजे FIR (संख्या 0011/2026) दर्ज की गई.

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 117(2), 324(4), 351(2) आदि और SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) के तहत मामला दर्ज किया है.

बीरेंद्र दास ने द मूकनायक को बताया कि, "पुलिस क्या कर रही है कुछ मालूम नहीं है. हमें बस न्याय चाहिए. वो लोग [आरोपी] बेटी, पत्नी और बेटे को बहुत मारा है."

मामले पर पीड़ित परिवार की कानूनी मदद कर रहीं लीगल इन्टर्न रचना प्रसाद ने घटना की वजह के बारे में बताया कि, "दलित समाज का नाबालिग लड़का कुछ दिन पहले बच्चों के साथ खेल रहा था. वहां कोई वाद-विवाद हुआ. उसके बाद कई लोग उसके घर पहुंचे और परिवार के लोगों को पीटने लगे. हम लोगों ने कम्प्लेंट फाइल कराई है. लेकिन अभी कोई कानूनी कदम नहीं बढ़ाये गए हैं."

"पहले पीड़ित लड़के के पिता खुद पुलिस के पास गए थे शिकायत कराने, लेकिन उन लोगों ने FIR नहीं लिखा था. उसके बाद हम लोगों ने साथ जाकर उच्च अधिकारियों को कम्प्लेंट कराया है. अब FIR तो दर्ज हुआ है लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है," रचना ने द मूकनायक को बताया.

SC आयोग का कड़ा रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने 7 जनवरी 2026 को हुगली के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP - Hooghly Rural) को नोटिस जारी किया है. आयोग की निदेशक सोनाली दत्ता द्वारा जारी नोटिस में अधिकारियों से 7 दिनों के भीतर जवाब और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी गई है. आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में जवाब नहीं मिला, तो संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत आयोग सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग करते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब कर सकता है.

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