UP: देवबंद में जमीन विवाद पर दलित परिवारों के साथ हिंसा, सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने पीड़ितों से मिलने से रोका

आज़ाद ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला सड़क से सदन तक गूंजेगा और बहुजन समाज अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करने को मजबूर होगा।
देवबंद के गांव लालवाला में जमीन विवाद के बाद तनाव बढ़ गया। जब दलित समाज ने अपने जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तो उन पर कब्ज़ा करने वालों द्वारा फायरिंग की गई और जानलेवा हमला किया गया।
देवबंद के गांव लालवाला में जमीन विवाद के बाद तनाव बढ़ गया। जब दलित समाज ने अपने जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तो उन पर कब्ज़ा करने वालों द्वारा फायरिंग की गई और जानलेवा हमला किया गया।
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सहारनपुर- जनपद सहारनपुर के थाना देवबंद अंतर्गत ग्राम लालवाला में शनिवार को बहुजन समाज की दो बीघा जमीन को लेकर तीखा विवाद हिंसक रूप ले लिया। बहुजन समाज के अनुसार इस जमीन पर पहले जबरन कब्जा किया गया था और अब उस पर निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की जा रही थी, जिसका स्थानीय दलित-बहुजन समाज ने विरोध किया। विरोध के दौरान कब्जा करने वाले पक्ष की ओर से फायरिंग और जानलेवा हमले की घटना बताई गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

पुलिस के पहुंचने के बाद स्थिति और बिगड़ी। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने उनके ऊपर बर्बर लाठीचार्ज किया, जिसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी नहीं बचे। इस लाठीचार्ज में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

रविवार को नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद घायलों तथा पीड़ित परिवारों से मिलने लालवाला पहुंचने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें उनके छुटमलपुर स्थित आवास पर रोक लिया। उनके घर के बाहर भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। चंद्रशेखर आजाद ने पूरे मामले को बहुजन समाज पर हमला बताया।

आज़ाद ने अपने सोशल मीडिया पर किये एक पोस्ट में कहा, " लालवाला में बहुजन समाज की जमीन, जिस पर पहले जबरन कब्ज़ा किया गया और अब उस पर निर्माण कार्य करना न केवल भूमि का अतिक्रमण है, बल्कि बहुजन समाज के संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है। जब दलित समाज ने अपने हक और जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तो उन पर कब्ज़ा करने वालों द्वारा फायरिंग की गई और जानलेवा हमला किया गया। लेकिन सबसे शर्मनाक और खतरनाक बात यह है कि पुलिस, जो सुरक्षा की जिम्मेदार है, वही अत्याचार करती नजर आई। पुलिस द्वारा किया गया लाठीचार्ज इतना बर्बर था कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों तक को भी नहीं छोड़ा गया।"

चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार को टैग करते हुए आगे लिखा, “मुख्यमंत्री जी, यह घटना सिर्फ सहारनपुर की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में दलितों के साथ हो रहे अन्याय की भयावह तस्वीर है। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? सरकार से हमारी स्पष्ट मांग हैं- 1. जबरन कब्ज़ा करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी हो और उन पर कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। 2. दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए। 3. SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। 4. सभी घायलों को बेहतर इलाज और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। 5. पीड़ित परिवारों को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला सड़क से सदन तक गूंजेगा और बहुजन समाज अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करने को मजबूर होगा।

स्थानीय मीडिया ने इस घटना को पुराने जमीन विवाद और महाराणा प्रताप प्रतिमा लगाने को लेकर दोनों पक्षों (ठाकुर और दलित समुदाय) के बीच टकराव बताया है। प्रशासन का कहना है कि शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

देवबंद के गांव लालवाला में जमीन विवाद के बाद तनाव बढ़ गया। जब दलित समाज ने अपने जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तो उन पर कब्ज़ा करने वालों द्वारा फायरिंग की गई और जानलेवा हमला किया गया।
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देवबंद के गांव लालवाला में जमीन विवाद के बाद तनाव बढ़ गया। जब दलित समाज ने अपने जमीन की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तो उन पर कब्ज़ा करने वालों द्वारा फायरिंग की गई और जानलेवा हमला किया गया।
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