UCC पर भोपाल में गरजे ओवैसी: बोले- "आदिवासियों को छूट तो मुसलमानों को क्यों शामिल किया"

सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में AIMIM की जनसभा में संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का हवाला; BJP विधायक रामेश्वर शर्मा के ‘मिसाइल’ बयान पर भी किया पलटवार
UCC पर भोपाल में गरजे ओवैसी: बोले- "आदिवासियों को छूट तो मुसलमानों को क्यों शामिल किया"
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भोपाल। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को भोपाल में समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ आयोजित जनसभा को संबोधित किया। सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में हुई सभा AIMIM के मध्य प्रदेश में चलाए जा रहे UCC विरोधी अभियान का हिस्सा थी। ओवैसी ने अपने संबोधन में UCC, धार्मिक स्वतंत्रता, आदिवासी समुदायों की अलग-अलग परंपराओं और संविधान में मिले मौलिक अधिकारों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

ओवैसी ने कहा कि मध्य प्रदेश की आबादी में आदिवासी समुदाय की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है और यदि उनकी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को देखते हुए उन्हें UCC के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, तो मुस्लिम समुदाय को इसमें शामिल करने का आधार भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर आदिवासी समुदायों को अलग रखा जा रहा है, तो मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को क्यों बदला जा रहा है।

UCC के जरिए एक समुदाय के कानून दूसरे पर लागू करने की कोशिश

ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के जरिए गैर-हिंदू समुदायों पर हिंदू व्यक्तिगत कानूनों के प्रावधान लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू सक्सेशन एक्ट और गोद लेने तथा अभिभावकता से जुड़े कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों की अपनी पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्थाएं हैं।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए विवाह केवल सामाजिक रस्म नहीं बल्कि धार्मिक और कानूनी व्यवस्था का हिस्सा है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के नाम पर व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव किया जा रहा है। उनके इन दावों को समाचार रिपोर्टों ने भी दर्ज किया है।

संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का दिया हवाला

AIMIM प्रमुख ने अपने संबोधन में संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को समानता के साथ-साथ धर्म की स्वतंत्रता और धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा देता है।

ओवैसी ने कहा कि उनके अनुसार किसी कानून को लागू करते समय इन संवैधानिक अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने UCC को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

RSS के एजेंडे का लगाया आरोप

ओवैसी ने UCC को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC के माध्यम से RSS के वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के लोग रहते हैं। ऐसे में कानून बनाते समय इस विविधता को ध्यान में रखना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर UCC पर जारी राजनीतिक बहस और तेज होती दिखाई दी।

NDA के सहयोगी दलों से भी UCC का विरोध करने की अपील

ओवैसी ने भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के सहयोगी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने TDP, JD(U), चिराग पासवान, एचडी कुमारस्वामी और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि यदि इन दलों के UCC को लेकर भाजपा से वैचारिक मतभेद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल सरकार में शामिल होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन मुद्दों पर वैचारिक मतभेद हैं, उन पर सहयोगी दलों को अपनी स्थिति जनता के सामने रखनी चाहिए।

रामेश्वर शर्मा के ‘मिसाइल’ बयान पर ओवैसी का पलटवार

सभा के दौरान भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा भी ओवैसी के निशाने पर रहे। ओवैसी ने शर्मा के उस बयान का जिक्र किया जिसमें काजी कैंप की ओर मिसाइल चलाने की बात कही गई थी।

ओवैसी ने मंच से शर्मा को काजी कैंप आने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने काजी कैंप पर मिसाइल गिराने की बात कही है तो वे वहां आकर बताएं। ओवैसी ने काजी कैंप के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इतिहास का भी उल्लेख किया और कई स्वतंत्रता सेनानियों के नाम गिनाए। इस बयान को लेकर स्थानीय राजनीतिक विवाद और तीखा हो गया है।

सागर जहरीली शराब कांड पर सरकार से कार्रवाई की मांग

ओवैसी ने मध्य प्रदेश के सागर में सामने आए जहरीली शराब मामले का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में कार्रवाई करने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए।

उन्होंने सरकार से धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते समय संविधान और कानून के प्रावधानों का पालन करने की मांग की।

दो बालिग अपनी मर्जी से शादी करें तो रोकने वाले कौन?

लव जिहाद से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा कि यदि दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से शादी करना चाहते हैं, तो उन्हें रोकने का अधिकार सरकार या किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वयस्क नागरिकों के अधिकारों से जोड़कर देखा।

सोवियत यूनियन का उदाहरण देकर RSS पर टिप्पणी

ओवैसी ने अपने भाषण में सोवियत यूनियन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि वहां कम्युनिस्ट शासन के दौरान मदरसों पर पाबंदियां लगाई गईं, लेकिन मुसलमानों ने अपने बच्चों की शिक्षा घरों में जारी रखी।

उन्होंने इस उदाहरण के जरिए कहा कि केवल संस्थानों या कानूनों के जरिए किसी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को खत्म नहीं किया जा सकता।

मध्य प्रदेश में UCC को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

मध्य प्रदेश में UCC को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज हो रही है। ओवैसी की भोपाल सभा इसी अभियान का हिस्सा थी। इससे पहले AIMIM के कार्यक्रम को लेकर कुछ स्थानीय मुस्लिम संगठनों की ओर से भी आपत्ति जताई गई थी।

ओवैसी के भोपाल दौरे में UCC के साथ-साथ धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकार, अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार, सागर जहरीली शराब कांड और स्थानीय राजनीतिक विवाद जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। सभा में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर उनकी टिप्पणी ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से भी चर्चा में ला दिया।

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