
तमिलनाडु: मदुरै जिले में एक 16 वर्षीय दलित छात्रा की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने उसिलामपट्टी के एक सरकारी स्कूल की हेडमिस्ट्रेस के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
यह पूरी घटना 11वीं कक्षा की छात्रा पी निशांती की मौत से जुड़ी है। निशांती का परिवार उसिलामपट्टी के पास थोट्टप्पनयक्कनूर का रहने वाला है। परिवार का आरोप है कि एडमिशन के दौरान हेडमिस्ट्रेस के कथित जातिवादी रवैये और दुर्व्यवहार के कारण ही छात्रा ने यह खौफनाक कदम उठाया।
शुरुआत में पुलिस ने गवर्नमेंट मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल की हेडमिस्ट्रेस विमला देवी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था। अब पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इस एफआईआर में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीती 24 अगस्त को निशांती अपनी मां पी तवामणि के साथ स्कूल में दाखिला लेने गई थी। वह अपना पुराना स्कूल छोड़कर यहां आई थी। शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान जब तवामणि ने एडमिशन का अनुरोध करते हुए हेडमिस्ट्रेस के सामने हाथ जोड़े, तो निशांती ने अपनी मां के हाथ नीचे करवा दिए।
आरोप है कि इस बात पर हेडमिस्ट्रेस विमला देवी बुरी तरह भड़क गईं। उन्होंने निशांती पर अहंकारी होने का आरोप लगाया और उसके चरित्र व पिछली शिक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े किए।
मां के मुताबिक, हेडमिस्ट्रेस ने निशांती से गुस्से में कहा कि क्या वह उनके सामने हाथ नहीं जोड़ सकती। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर किशोरी को डांटते हुए स्कूल से बाहर निकल जाने को कह दिया।
इस घटना के बाद निशांती स्कूल से निकल गई और नाल्लामालपट्टी की ओर लगभग पांच किलोमीटर तक पैदल चलती रही, जिसके बाद उसकी मां ने उसे ढूंढा। तवामणि उसे एक ऑटोरिक्शा में घर लेकर आईं, लेकिन इस घटना से छात्रा को गहरा सदमा लगा था।
घर पहुंचने के बाद निशांती चुपचाप लेट गई और उसने खाना भी नहीं खाया। उसकी मां का कहना है कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थी और शायद उस रात सो भी नहीं पाई। अगले ही दिन, 25 अगस्त को निशांती ने आत्महत्या कर ली।
निशांती हिंदू परैयार समुदाय से ताल्लुक रखती थी, जिसे अनुसूचित जाति के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। उसकी मां एक गारमेंट फैक्ट्री में दर्जी का काम करती हैं, जबकि पिता पलानीसामी दिहाड़ी मजदूर हैं। निशांती उनके तीन बच्चों में दूसरे नंबर की थी।
पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि निशांती के साथ जातिगत भेदभाव किया गया और हेडमिस्ट्रेस ही उसकी मौत के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि, विमला देवी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और किसी भी तरह की जातिसूचक टिप्पणी करने से साफ इनकार किया है।
पुलिस ने शुरुआत में संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया था, जिसे बाद में मां की शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बदल दिया गया। अब आगे की जांच के बाद इसमें SC/ST एक्ट की धाराएं भी शामिल कर ली गई हैं।
दूसरी ओर, हेडमिस्ट्रेस विमला देवी ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उस समय 11वीं कक्षा में तुरंत कोई सीट उपलब्ध नहीं थी। उनका दावा है कि एडमिशन पर फैसला लेने से पहले उन्हें निशांती के बारे में कुछ और जानकारी लेनी थी, इसलिए उन्होंने मां-बेटी को अगले दिन आने के लिए कहा था।
इस गंभीर मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने भी अपने स्तर पर एक जांच की है। विभाग ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है और आगे की विभागीय जांच अभी जारी है।
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