तमिलनाडु के शिवगंगा में न्यायिक हिरासत में दलित युवक की मौत, परिजनों ने लगाया बर्बरता और हत्या का आरोप
तमिलनाडु: के शिवगंगा जिले में एक 26 वर्षीय युवक की न्यायिक हिरासत के दौरान मौत हो गई। यह गंभीर घटना रविवार तड़के मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल (जीआरएच) में इलाज के दौरान घटी। मृतक की पहचान मनामदुरै के कृष्णापुरम कॉलोनी निवासी दलित समुदाय के आकाश डेनिसन के रूप में हुई है। इस घटना के बाद मृतक के परिवार वालों ने पुलिस पर हिरासत में बेरहमी से यातनाएं देने का आरोप लगाते हुए भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
दूसरी ओर, पुलिस का आधिकारिक बयान है कि इलाज के दौरान आकाश को सांस लेने में तकलीफ हुई और कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आकाश मनामदुरै पुलिस द्वारा 6 मार्च को दर्ज किए गए एक मारपीट के मामले में संदिग्ध था। आरोप था कि 5 मार्च की रात करीब 10.30 बजे मनामदुरै में जियोन नगर के पास एक मामूली विवाद के चलते आकाश और उसके 23 वर्षीय साथी गुना ने धारदार हथियार से हमला किया था। इस हमले में जीवा नगर के पी. जयकुमार (37) और अतनूर के आर. अलागरसामी (34) घायल हुए थे। मामले में कार्रवाई करते हुए मनामदुरै के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आकाश को 18 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
गिरफ्तारी की इस प्रक्रिया के दौरान आकाश के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी से बचने और भागने की कोशिश करते समय वह गिरकर घायल हो गया। शुरुआत में उसे सरकारी शिवगंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से आगे के इलाज के लिए उसे मदुरै के जीआरएच रेफर कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक रविवार तड़के उसकी तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई।
पुलिस के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए आकाश के पिता राजेश कन्नन ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे का पैर खुद फिसलने से नहीं टूटा था, बल्कि पुलिस ने जानबूझकर ऐसा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उसे एक सुनसान जगह पर ले गई, उसके पैर पर भारी पत्थर रखा और बुरी तरह पीटकर उसकी हड्डी तोड़ दी। अत्यधिक खून बहने के कारण ही उसकी जान गई है।
पिता का कहना है कि शनिवार तक आकाश परिवार से बात कर रहा था और उसने खुद अपनी पत्नी को पुलिस की इस बर्बरता के बारे में बताया था। यहाँ तक कि एक पुलिस इंस्पेक्टर ने भी उनकी पत्नी को पैर तोड़ने की बात बताई थी। परिवार का यह भी दावा है कि मारपीट के दौरान पुलिस ने जातिसूचक गालियों का भी इस्तेमाल किया। राजेश कन्नन ने भरे मन से कहा कि पुलिस उसे जान से मारने के बजाय सिर्फ पैर तोड़कर भी जिंदा छोड़ सकती थी।
इस मामले में 'जॉइंट एक्शन अगेंस्ट कस्टोडियल टॉर्चर - तमिलनाडु' (JAACT-TN) के सलाहकार हेनरी टिफागने ने एक वीडियो बयान जारी कर पुलिस की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में मौत का यह 26वां मामला है। हेनरी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले युवक को पुलिस ने बुरी तरह पीटा था, इसलिए पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया सभी तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए की जानी चाहिए।
घटना के विरोध में मनामदुरै और मदुरै के राजाजी अस्पताल के बाहर परिजनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। उनकी मुख्य मांगों में दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई, एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करना, उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना शामिल है। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है।
इस पूरी घटना ने क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया है। यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसी पुलिस अधिकार क्षेत्र में पिछले साल मंदिर के गार्ड अजीत कुमार की हत्या के बाद भी माहौल काफी गरमाया था। वर्तमान में अस्पताल की मोर्चरी के बाहर मनामदुरै के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) राजा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार परिवार और समुदाय के नेताओं से बातचीत कर स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल, पोस्टमॉर्टम और मजिस्ट्रियल जांच पूरी होने तक शव जीआरएच की मोर्चरी में ही सुरक्षित रखा गया है।
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