युद्ध का प्रभाव: निर्यात रुका तो खेतों में सड़ने लगा नर्मदा पट्टी का केला, कीमत 2200 से गिरकर 1200 रुपये क्विंटल, किसानों को भारी नुकसान!

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से मुंबई पोर्ट पर सैकड़ों कंटेनर अटके; बड़वानी, बुरहानपुर, धार और खरगोन के किसान-व्यापारी संकट में
युद्ध का प्रभाव: निर्यात रुका तो खेतों में सड़ने लगा नर्मदा पट्टी का केला, कीमत 2200 से गिरकर 1200 रुपये क्विंटल, किसानों को भारी नुकसान!
Published on

दिल्ली/भोपाल। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध के बीच ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने से समुद्री व्यापार बाधित हो गया है, जिससे भारत से मिडिल ईस्ट देशों को जाने वाले कई कृषि उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ है। इस संकट का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश के केला उत्पादक किसानों पर पड़ा है। मुंबई बंदरगाह पर निर्यात के लिए तैयार कई कंटेनर फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में मध्य प्रदेश का केला भी शामिल है।

निर्यात रुकने से बाजार में मांग घट गई है और कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालात यह हैं कि जो केला कुछ समय पहले 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था, उसका भाव घटकर 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। इससे बड़वानी, बुरहानपुर, धार और खरगोन जिलों के हजारों किसान और व्यापारी आर्थिक संकट में आ गए हैं और कई जगहों पर केला खेतों में ही खराब होने की स्थिति बन रही है।

स्थानीय मीडिया से बातचीत में केला उत्पादक और निर्यातक संतोष लछेटा के अनुसार बड़वानी जिले से केले का निर्यात वर्ष 2016 में शुरू हुआ था और पिछले वर्ष यहां से लगभग 1.6 लाख टन केला विदेश भेजा गया था। यह केला मुख्य रूप से समुद्री मार्ग से ईरान और दुबई जाता है, जहां से सड़क मार्ग के जरिए अन्य देशों तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले में लगभग ढाई से तीन करोड़ केले के पौधे लगाए गए हैं और नर्मदा पट्टी क्षेत्र की अनुकूल जलवायु के कारण यहां पूरे साल केले की प्लांटिंग और हार्वेस्टिंग होती रहती है। लेकिन युद्ध के कारण अचानक निर्यात रुकने से कीमतों में भारी गिरावट आई है। जो माल पहले से पैक होकर बंदरगाहों पर खड़ा था, उसे खराब होने से बचाने के लिए अब दिल्ली और अन्य घरेलू बाजारों में घाटे में बेचना पड़ रहा है।

राजलक्ष्मी बनाना ग्रुप के जितेंद्र सोलंकी बताते हैं कि इस समय मुंबई के शिपयार्ड में लगभग 15 से 20 दिन का केला स्टॉक पड़ा हुआ है और निर्यात बंद होने के कारण यह माल घरेलू बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है।

किसानों को भारी नुकसान

किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतों में वे अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। किसान महेश राठौड़ और बलराम यादव बताते हैं कि उन्होंने छह एकड़ जमीन में केले की खेती की है, जिस पर प्रति एकड़ करीब 90 हजार रुपये की लागत आई है और कुल खर्च पांच लाख रुपये से अधिक हो चुका है। इसके बावजूद फसल तैयार होने पर भी बाजार में खरीदार नहीं मिल रहे हैं और कई किसानों को अपनी उपज लागत से भी कम दाम पर बेचनी पड़ रही है।

किसान नितिन यादव का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में जिले के कुल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा विदेशों में निर्यात हो जाता है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है, लेकिन इस बार निर्यात बंद होने से किसानों और निर्यातकों दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केला निर्यातकों के अनुसार स्थिति बंदरगाहों पर भी गंभीर बनी हुई है। महाराष्ट्र के सोलापुर के निर्यातको का कहना है कि मुंबई पोर्ट पर करीब 250 कंटेनर केले से भरे खड़े हैं और उन पर लगातार पोर्ट चार्ज लग रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले कुछ कंटेनर दुबई पहुंच चुके थे, लेकिन वहां भी परिस्थितियां बदल गई हैं और कई जगह माल की कीमत से अधिक भाड़ा वसूला जा रहा है।

सोलापुर के कोल्ड स्टोरेज में भी लगभग 24 हजार मीट्रिक टन केला रखा हुआ है, जिसे अब घरेलू बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है। निर्यातकों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर केला उद्योग को राहत देने की मांग की है।

एमपी उगता है जी-9 किस्म का केला

मध्य प्रदेश के किसान मुख्य रूप से जी-9 किस्म का केला उगाते हैं, जिसकी विदेशों में सबसे ज्यादा मांग रहती है। किसान मनोज जाट बताते हैं कि स्थानीय बाजार में केले का भाव कई बार 10 रुपये प्रति किलो तक रह जाता है, जबकि विदेशी बाजारों में यही केला कई गुना अधिक कीमत पर बिकता है। स्थानीय विधायक राजन मंडलोई का कहना है कि नर्मदा पट्टी का केला अपनी मिठास और आकार के कारण अरब देशों में काफी लोकप्रिय है, लेकिन मौजूदा युद्ध के कारण बड़ी मात्रा में केला मुंबई पोर्ट पर फंसा हुआ है।

प्रदेश में केले की खेती सबसे अधिक बुरहानपुर जिले में होती है, जहां लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में यह फसल उगाई जाती है और हर साल करीब 16 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है, जिसके कारण बुरहानपुर को प्रदेश की ‘केला सिटी’ भी कहा जाता है। इसके अलावा धार जिले के मनावर क्षेत्र और खरगोन जिले में भी केले की खेती तेजी से बढ़ रही है और इन क्षेत्रों को निर्यात हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

चावल के कारोबार पर भी प्रभाव

युद्ध का असर केवल केले के कारोबार तक सीमित नहीं है बल्कि चावल निर्यात से जुड़े व्यापार पर भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। दावत फूड्स के लॉजिस्टिक इंचार्ज विनीत वाधवान का कहना है कि उनकी कंपनी का अधिकतर निर्यात यूरोप और अमेरिका में होता है, इसलिए फिलहाल उनका कोई कंसाइनमेंट अटका नहीं है। हालांकि चावल महासंघ के अध्यक्ष आशु अग्रवाल के अनुसार युद्ध के कारण नए ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं और पुराने ऑर्डर के डिस्पैच में भी पहले जैसी सहज स्थिति नहीं रही।

बालाघाट के राइस मिल संचालक अनीश संचेती ने स्थानीय समाचार पत्र दैनिक भास्कर को बताया कि जहाज कंपनियों ने माल ढुलाई का किराया बढ़ा दिया है और कई मामलों में आगे की बुकिंग भी सीमित या बंद कर दी गई है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो मध्य प्रदेश के कृषि निर्यात पर इसका असर और गहरा हो सकता है।

किसान संगठनों की मांग

भारतीय किसान संघ के मध्यभारत के संगठन मंत्री राहुल धूत ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने युद्ध जैसे हालात का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे केले जैसे कृषि उत्पादों की मांग अचानक कम हो गई है और बाजार में कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के कई जिलों के किसान बड़ी मात्रा में केला उत्पादन करते हैं और निर्यात बंद होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। धूत ने कहा कि सरकार को इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए किसानों और निर्यातकों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और उनका नुकसान कम हो सके।

युद्ध का प्रभाव: निर्यात रुका तो खेतों में सड़ने लगा नर्मदा पट्टी का केला, कीमत 2200 से गिरकर 1200 रुपये क्विंटल, किसानों को भारी नुकसान!
MP: एम्स भोपाल की डॉक्टर की आत्महत्या पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त, एम्स प्रबंधन और पुलिस को नोटिस भेजा, जानिए मामला?
युद्ध का प्रभाव: निर्यात रुका तो खेतों में सड़ने लगा नर्मदा पट्टी का केला, कीमत 2200 से गिरकर 1200 रुपये क्विंटल, किसानों को भारी नुकसान!
MP में नाबालिग बच्चों से बढ़ रहे यौन अपराध, ग्वालियर में 14 वर्षीय किशोरी से रेप
युद्ध का प्रभाव: निर्यात रुका तो खेतों में सड़ने लगा नर्मदा पट्टी का केला, कीमत 2200 से गिरकर 1200 रुपये क्विंटल, किसानों को भारी नुकसान!
MP: आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में टॉपरों का भंडाफोड़, रतलाम के एक ही सेंटर से 12 संदिग्ध अभ्यर्थी, मामला दर्ज

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com