
तमिलनाडु के मदुरै में कथित पुलिस यातना के कारण जान गंवाने वाले एक 26 वर्षीय दलित युवक का 101 दिन बाद बुधवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। मद्रास उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश के बाद भारी सुरक्षा के बीच मदुरै के एक विद्युत शवदाह गृह में युवक का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। यह पूरी घटना पुलिस की जवाबदेही और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
इस युवक का नाम आकाश था। उसकी मौत के बाद परिजनों ने लगातार तीन महीने से अधिक समय तक शव लेने से इनकार कर दिया था। परिवार की मांग थी कि कथित कस्टोडियल मर्डर (हिरासत में हत्या) में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। हालांकि, अदालत के हस्तक्षेप के बाद परिवार के विरोध और गहरे दुख के बीच अंततः अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
शिवगंगा जिले के मानामदुरै निवासी आकाश को स्थानीय पुलिस ने 6 मार्च को मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि भागने की कोशिश में आकाश के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। दूसरी ओर, आकाश ने एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया था कि पुलिसकर्मियों ने उसे बेरहमी से पीटा और उसका पैर तोड़ दिया। इसके बाद 8 मार्च को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
आकाश की मौत के बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया, क्योंकि उसके शरीर पर लगभग 28 चोटों के निशान पाए गए। इस खुलासे के बाद अनुसूचित जाति कल्याण संगठनों और परिजनों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 मार्च को जांच सीबी-सीआईडी (CB-CID) को सौंप दी गई और एक इंस्पेक्टर व एक सब-इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने 13 मार्च को सीबी-सीआईडी को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ हत्या और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद सीबी-सीआईडी ने मानामदुरै के डीएसपी राजा और कई अन्य इंस्पेक्टरों सहित 11 पुलिसकर्मियों से पूछताछ की।
इस बीच, पीड़ित के पिता राजेश कन्नन ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए 50 लाख रुपये के मुआवजे और घटना से जुड़े 16 पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग की। अपनी मांगों को लेकर परिवार मानामदुरै के पुराने बस स्टैंड के पास लगातार धरने पर बैठा रहा।
विवाद को खत्म करने के लिए उच्च न्यायालय ने 15 जून को आदेश दिया कि यदि परिवार उस शाम 5 बजे तक शव स्वीकार नहीं करता है, तो स्थानीय प्रशासन को सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। परिवार द्वारा शव न लिए जाने पर अदालत ने मदुरै के जिला कलेक्टर, निगम आयुक्त और अस्पताल के अधिकारियों को अंतिम संस्कार संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी।
बुधवार सुबह जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शव ले जाने के लिए अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे, तो परिवार ने उग्र विरोध किया। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे रिश्तेदारों को कुछ देर के लिए पुलिस वाहन में हिरासत में लिया और फिर उन्हें अंतिम प्रक्रिया देखने के लिए शवदाह गृह लाया गया।
श्मशान घाट पर माहौल तब बेहद गमगीन हो गया जब आकाश की मां फूट-फूट कर रोने लगीं। उन्होंने पुलिसकर्मियों की ओर मुट्ठी भर मिट्टी फेंकते हुए बदुआएं दीं कि उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोग एक दिन पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें