
नई दिल्ली-अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ के मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कड़ा विरोध जताया है। मायावती ने कहा कि SC/ST आरक्षण को क्रीमी लेयर के दायरे में लाना अनुचित होने के साथ-साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान के मानवीय उद्देश्यों के खिलाफ है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया और संघ से आरक्षण में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की वकालत बंद करने को कहा।
मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में आरक्षण को SC, ST और OBC समुदायों के लिए ‘सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति’ तथा आत्मसम्मान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा बताया।
मायावती ने कहा कि SC और ST समुदायों को सदियों से जाति के आधार पर भेदभाव, शोषण, उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा है। उनके मुताबिक, आज भी जातिगत द्वेष, अन्याय और अत्याचार पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी परिस्थितियों में SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की बात करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि आरक्षण को केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि जातिगत भेदभाव का असर व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक उन्नति के बावजूद बना रह सकता है।
मायावती ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को सामाजिक समानता, सम्मान और संवैधानिक अधिकार दिलाना है।
मायावती की यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया आरक्षण संबंधी बयान के बाद आई है। भागवत ने कहा था कि आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक सामाजिक भेदभाव मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा था कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें बड़े दिल के साथ स्वेच्छा से इसे छोड़ने पर विचार करना चाहिए, ताकि इसका लाभ उन लोगों तक पहुंच सके जो अभी इससे वंचित हैं। साथ ही उन्होंने आरक्षण के राजनीतिकरण को सामाजिक तनाव का कारण बताया था।
मायावती ने भागवत की इस सोच को चुनौती देते हुए कहा कि आरक्षण को लेकर ऐसी बातें संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना करती हैं। उन्होंने आरएसएस पर आरोप लगाया कि आरक्षण को लेकर ऐसी सोच संकीर्ण राजनीतिक हितों को पूरा कर सकती है, लेकिन इससे सामाजिक समानता के संवैधानिक लक्ष्य प्रभावित होते हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण को सिर्फ आर्थिक स्थिति से मापना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, SC/ST समुदायों के सामने समस्या केवल गरीबी नहीं बल्कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता भी है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होने के बावजूद जाति आधारित भेदभाव अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। इसी आधार पर उन्होंने SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की अवधारणा का विरोध किया।
मायावती ने केंद्र सरकार के मौजूदा रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार अपने तर्कों के आधार पर अदालत में SC/ST को क्रीमी लेयर से बाहर रखने की प्रभावी पैरवी करती है तो यह उचित और संवैधानिक कदम होगा।
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने रुख में SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने का विरोध किया है। सरकार का तर्क है कि SC/ST समुदायों को झेलना पड़ा ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव OBC के संदर्भ में लागू क्रीमी लेयर अवधारणा से अलग है और आर्थिक प्रगति के बावजूद जातिगत भेदभाव बना रह सकता है।
मायावती ने कहा कि सरकारों की ओर से कमजोर कानूनी पैरवी के कारण कई बार सामाजिक परिवर्तन से जुड़े मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते हैं। इसलिए उन्होंने केंद्र से SC/ST को क्रीमी लेयर से बाहर रखने के अपने पक्ष की मजबूत कानूनी पैरवी करने की मांग की।
मायावती ने आरएसएस को सीधे संदेश देते हुए कहा कि उसे डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी और कल्याणकारी संविधान का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने आरएसएस से कहा कि वह आरक्षण को लेकर राजनीति करना बंद करे और आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत से बचे।
मायावती के मुताबिक, देश में ‘समतामूलक समाज व्यवस्था’ स्थापित करना संविधान का उद्देश्य है और इस लक्ष्य की पूर्ति में सभी संगठनों को सहयोग करना चाहिए।
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