रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हत्या के एक मामले में पूछताछ के लिए थाने लाए गए संदिग्ध की मौत के बाद भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर हिरासत में बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया है। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और समाज के लोगों ने नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और खरसिया थाना प्रभारी सहित दो आरक्षकों को लाइन अटैच कर दिया गया है।
क्या था पूरा मामला?
खरसिया थाना क्षेत्र के परसखोल गांव में कुछ दिनों पूर्व अनिल चौहान नामक युवक का शव एक खेत में मिला था। पुलिस इस कत्ल की जांच कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को सुराग मिला कि घटना वाली रात अनिल और गांव के ही रमेश चौहान ने एक साथ शराब पी थी और दोनों को आखिरी बार साथ देखा गया था। इसी आधार पर पुलिस ने रमेश चौहान को पूछताछ के लिए थाने तलब किया था।
पूछताछ के दौरान बिगड़ी तबीयत, रायपुर में तोड़ा दम
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान अचानक रमेश की तबीयत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में उसे खरसिया के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे रायपुर स्थित डीकेएस (DKS) अस्पताल रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान 5 मार्च की सुबह रमेश की मौत हो गई। मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। उन्होंने पुलिस पर कस्टडी में टॉर्चर करने का गंभीर आरोप लगाया, हालांकि पुलिस अधिकारियों ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
सड़क पर उतरा ग्रामीणों का गुस्सा, विधायक ने दिया समर्थन
रमेश की मौत से उग्र हुए चौहान समाज और ग्रामीणों ने गुरुवार शाम नेशनल हाईवे 49 पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारी तीन प्रमुख मांगों पर अड़ गए कि, पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले। मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी मिले। दोषी पुलिसकर्मियों का निलंबन और उन पर एफआईआर हो।
हंगामे की सूचना मिलते ही खरसिया विधायक उमेश पटेल भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रशासन पर दबाव बनाया। कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन के कारण हाईवे पर भारी जाम लगा रहा।
देर रात प्रशासन से बनी सहमति, ये हुए फैसले
प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत के बाद देर रात एक समझौता हुआ, जिसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। समझौते में तय हुआ है कि, रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच होगी। पारदर्शिता के लिए जांच दल में चौहान समाज के 5 सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा (समाज के संगठन मंत्री शिवाधर हैंवार ने इसकी पुष्टि की)।
मृतक की पत्नी को कलेक्टर दर पर नजदीकी सरकारी स्कूल में भृत्य (चपरासी) की नौकरी दी जाएगी। पीड़ित परिवार को तय नियम के तहत उचित मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अनिल सोनी ने बताया कि जांच प्रभावित न हो, इसके लिए खरसिया थाना प्रभारी के साथ-साथ दो आरक्षकों— बिसोप सिंह और योगेश साहू को रक्षित केंद्र (लाइन) अटैच कर दिया गया है।
एसडीओपी प्रभात पटेल ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने लगाया प्रताड़ना का आरोप
इस मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। इस मामले में जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) नगेंद्र नेगी और जिला प्रवक्ता तारेंद्र डनसेना ने संयुक्त बयान जारी किया है।
इस बयान में कांग्रेस नेताओं ने इस पूरी घटना को अमानवीय बताया और कहा कि यह वर्दी का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि परासकोल गांव के रहने वाले रमेश चौहान सुबह पुलिस पूछताछ के लिए थाने गए थे और उस समय वे पूरी तरह स्वस्थ थे। लेकिन पुलिस की कथित प्रताड़ना के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें शरीर के एक हिस्से में लकवा (पैरालिसिस) मार गया। गंभीर हालत को देखते हुए रमेश चौहान को रायगढ़ से रायपुर रेफर किया गया है।
जिला अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए। उन्होंने यह भी कहा कि होली पर्व के तुरंत बाद जिला कांग्रेस कमेटी एक स्वतंत्र जांच टीम बनाएगी। यह टीम पीड़ित परिवार से मिलकर पूरी जानकारी जुटाएगी और अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी।
दोषी को निलंबित कर FIR दर्ज करे
नगेन्द्र नेगी ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि खुद SDM ने पीड़ित परिवार की हालत देखकर उसे निजी एंबुलेंस से रायगढ़ इलाज के लिए भेजा। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में दोषी अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित के इलाज का पूरा खर्च सरकार को उठाना चाहिए।
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