MP: खरगौन में दलित दूल्हे के मंदिर प्रवेश पर हुक्का-पानी बंद, मजदूरी पर 11 हजार का जुर्माना – जानें पूरा मामला

यदि कोई गांव का किसान या मजदूर इस दलित परिवार के सदस्यों को काम/मजदूरी पर रखेगा, तो उस व्यक्ति पर 11,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
पंचायत का फरमान दिखाते हुए पीड़ित दूल्हे ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
पंचायत का फरमान दिखाते हुए पीड़ित दूल्हे ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार x@SunilAstay
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खरगौन- मध्यप्रदेश के खरगौन जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पाडल्या गवली गांव में कथित तौर पर एक दलित युवक के मंदिर प्रवेश को लेकर गांव की पंचायत ने सामूहिक सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुना दिया। न केवल दलित परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया, बल्कि गांव की दुकानों, डेयरी और यहां तक कि राशन की दुकान तक से उन्हें वंचित करने का निर्णय लिया गया।

जानकारी के अनुसार गांव के निवासी निर्मल कनाडे (जाति बलाई) की शादी 20 अप्रैल को हुई थी। दूल्हे ने बताया कि शादी के बाद जब नवयुगल हनुमान मंदिर में पूजा करने गया तो वहां दरवाजा लगाकर प्रवेश से रोका। आरोप है कि दलित होने के कारण दूल्हे को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। यहां तक कि मंदिर के दरवाजे पर ताला दे दिया गया, जिससे नवविवाहित जोड़े को अपमानित होना पड़ा। उन्हें कहा कि बाहर से पूजा कर लें, हालांकि, बाद में पुलिस की मौजूदगी में दूल्हे को मंदिर में प्रवेश दिलाया गया।


इसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया। आरोप है कि गांव के तथाकथित 'मनुवादियों' ने पंचायत बुलाकर दलित परिवार को सबक सिखाने की साजिश रची। 24 अप्रैल को हुई इस पंचायत में निर्णय लिया गया:

1. दलित परिवार का 'हुक्का-पानी' बंद करने का फैसला लिया गया, यानी कोई भी उनसे पानी नहीं छूएगा, न ही कोई सामाजिक संबंध रखेगा।

2. गांव में ढिंढोरा पिटवाकर यह एलान किया गया कि कोई भी दुकानदार इस परिवार को राशन, दूध या कोई अन्य वस्तु नहीं देगा। देने वाले का भी बहिष्कार कर दिया जाएगा।

3. सबसे चौंकाने वाला फैसला यह रहा कि यदि कोई गांव का किसान या मजदूर इस दलित परिवार के सदस्यों को काम (मजदूरी) पर रखेगा, तो उस व्यक्ति पर 11,000 रुपये का जुर्माना/आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

इस पूरे मामले पर खरगौन प्रशासन और पुलिस की चुप्पी सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट और भीम आर्मी के साथियों ने इस जातिवादी फरमान की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि वे जल्द ही गांव जाकर ग्रामीणों के साथ पंचायत करेंगे और तथाकथित 'मनुवादियों' का बहिष्कार करेंगे।

भीम आर्मी नेता सुनील अस्तेय ने घटना की निंदा करते हुए कहा मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि क्या उनके राज में दलितों को मंदिर, पानी और राशन तक से वंचित करना ही “कानून व्यवस्था” कहलाएगा? या फिर सरकार मनुवादी फरमानों के आगे झुककर भारतीय संविधान की गरिमा को यूं ही कुचलने देगी?

आपको बता दें मध्यप्रदेश में दलित दूल्हों के साथ लगातार जातिगत अपमान की घटनाएं सामने आ रही हैं, दलित समाज के युवकों को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे परंपरागत रूप से घोड़ी पर बैठकर बारात निकालने का पालन करना चाहते हैं। सुनील अस्तेय का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन की भूमिका भी ढीली रहती है, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद होते हैं। अस्तेय ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई, विशेष रूप से एससी-एसटी एक्ट और एनएसए के तहत, सुनिश्चित नहीं की गई तो आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी सड़कों पर बड़ा आंदोलन करेंगी।

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