"तुम जैसे लोगों के लिए नहीं ये रस्म": दमोह में दलित दिव्यांग दूल्हे को रछवाई के दौरान घोड़ी से उतारा, किया ऐसा व्यवहार कि..!

बारातियों ने इस बर्बरता का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल होकर पूरे समाज के लिए शर्म का कारण बन गया है।
 पीड़ित के अनुसार न सिर्फ उसे घोड़ी से जबरदस्ती नीचे खींचा बल्कि लाठियों और डंडों से उसकी इतनी पिटाई की कि विवाह का माहौल मातम में बदल गया।
पीड़ित के अनुसार न सिर्फ उसे घोड़ी से जबरदस्ती नीचे खींचा बल्कि लाठियों और डंडों से उसकी इतनी पिटाई की कि विवाह का माहौल मातम में बदल गया। सोशल मीडिया
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दमोह- मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र अंतर्गत बिजोरी पाठक गांव में एक ऐसी हृदयविदारक और निंदनीय घटना सामने आई है, जिसने जातिगत भेदभाव की उन गहरी दरारों को उजागर कर दिया है जो सामाजिक समानता के आधिकारिक दावों के बावजूद ग्रामीण भारत की सच्चाई बनी हुई हैं। 23 वर्षीय दिव्यांग दलित दूल्हे गोलू अहिरवार के साथ विवाहपूर्व रस्म की रछवाई के दौरान इतनी बेरहमी से मारपीट की गई कि पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर दौड़ गई। जातिवादी गुंडों को वर की शारीरिक असमर्थता पर भी दया नहीं आई।

यह घटना मंगलवार शाम की है, जब गोलू घोड़ी पर सवार होकर अपने परिवार और बारातियों के साथ गांव से गुजर रहा था। इसी दौरान गांव के कुछ तथाकथित बाहुबलियों ने उसके इस जुलूस पर आपत्ति जताई और हमला बोल दिया। पीड़ित के अनुसार, गुड्डू सिंह, कृष्णा, हकम और पल्टू लोधी नामक व्यक्तियों ने न सिर्फ उसे घोड़ी से जबरदस्ती नीचे खींचा बल्कि लाठियों और डंडों से उसकी इतनी पिटाई की कि विवाह का माहौल मातम में बदल गया। बारातियों ने इस बर्बरता का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल होकर पूरे समाज के लिए शर्म का कारण बन गया है।

विवाह जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर पर किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करना और हिंसा करना, समाज में व्याप्त संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है, विशेष रूप से एक दिव्यांग व्यक्ति के साथ इस प्रकार का व्यवहार अत्यधिक अमानवीय है।

पीड़ित की बहन मनीषा अहिरवार ने उस दिल दहला देने वाले पल को बयान करते हुए बताया कि जब वे आगे बढ़ रहे थे, तो आरोपियों ने जानबूझकर अपना वाहन गली में खड़ा करके रास्ता रोक लिया। जब उनसे वाहन हटाने का अनुरोध किया गया, तो वे लपककर आए और गोलू को घोड़ी से धक्का देकर नीचे गिरा दिया। उन्होंने बताया कि चार लोगों ने मिलकर उनपर हमला किया और साफ कहा कि इस गली में घोड़ी नहीं आ सकती और न ही तुम लोगों का ऐसा जुलूस निकल सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह रस्म तुम जैसे लोगों के लिए नहीं है। इससे भी अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दूल्हा दिव्यांग होने के बावजूद हमलावरों ने कोई रहम नहीं दिखाया। गोलू की मां विद्या अहिरवार ने बताया कि उनके बेटे को घोड़ी से खींचकर बेरहमी से पीटा गया और जब उनकी बेटी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उसके साथ भी मारपीट की गई। हमले की इस अफरातफरी में उसकी बेटी के सोने के कुछ आभूषण भी गायब हो गए। पिटाई के बाद पूरा परिवार और बाराती सीधे हटा थाना पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

थाना प्रभारी सुदीर कुमार बेगी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि गोलू अहिरवार की रछवाई के दौरान जब यह जुलूस गांव के देव स्थान के पास पहुंचा, तो विश्वनाथ लोधी, चिंटू लोधी सहित अन्य ने घोड़ी चढ़ने पर आपत्ति जताई और हमला कर दिया। पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट सहित संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब इस गांव में ऐसी घटना हुई हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी जब किसी दलित दूल्हे की रछवाई निकाली गई थी, तो उच्च जाति के लोगों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद सामाजिक संगठनों ने हस्तक्षेप कर किसी तरह जुलूस निकलवाया था। पुलिस ने गांव में फोर्स तैनात कर दी है और दूल्हे के परिवार ने मेडिकल जांच के बाद छतरपुर जिले के बुढ़ी सेमरा गांव में विवाह की रस्में पूरी करने के लिए रवाना हो गए।

इस पूरे प्रकरण पर सामाजिक कार्यकर्ता और भीम आर्मी नेता सुनील आस्तेय ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मारपीट की घटना अत्यंत गंभीर और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। आस्तेय ने कहा कि विवाह जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर पर किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करना और हिंसा करना समाज में व्याप्त संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है, विशेष रूप से एक दिव्यांग व्यक्ति के साथ इस प्रकार का व्यवहार अत्यधिक अमानवीय है।

उन्होंने प्रशासन से सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने और समाज में भय व अशांति फैलाने वाले ऐसे तत्वों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दलित दूल्हों और सामाजिक आयोजनों की सुरक्षा हेतु एक विशेष संरक्षण ढांचा (Special Protection Framework) तैयार करने पर जोर दिया है। यह आवश्यक है कि कानून का शासन सुदृढ़ हो और प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपने सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों का पालन करने की स्वतंत्रता मिले, क्योंकि समाज में समरसता, सम्मान और समानता को बनाए रखने के लिए प्रशासन, नागरिक समाज और सभी वर्गों की साझा जिम्मेदारी है।

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