उत्तर प्रदेश: खीरी जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। नीमगांव थाना क्षेत्र के एक गांव में सोमवार को 15 वर्षीय दलित दुष्कर्म पीड़िता ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। किशोरी का शव फंदे से लटकता हुआ मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
चूंकि मृतका और आरोपी दोनों अलग-अलग समुदायों से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत सतर्क हो गया। सूचना मिलते ही एसपी ख्याति गर्ग और स्थानीय सीओ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
इस मामले की शुरुआत कुछ ही दिन पहले हुई थी। बीते 5 जुलाई को किशोरी की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 65, जो 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म से संबंधित है, और पॉक्सो एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
दर्ज शिकायत के अनुसार, 5 जुलाई की शाम करीब 5 बजे जब किशोरी के परिजन कृषि कार्य के लिए खेतों में गए हुए थे, तब उसी गांव के रहने वाले 21 वर्षीय आरोपी ने घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज होने की उसी रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और अगले ही दिन उसे जेल भेज दिया गया था।
पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए एसपी ख्याति गर्ग ने बताया कि सीओ द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि किशोरी और आरोपी पिछले दो साल से एक-दूसरे के संपर्क में थे। एसपी के मुताबिक, पीड़िता ने शुरुआत में दुष्कर्म की बात से इनकार किया था, लेकिन बाद में बीएनएसएस की धारा 183 के तहत अदालत में दर्ज कराए गए अपने बयान में उसने आरोपों की पुष्टि कर दी थी।
फिलहाल पुलिस उन सभी परिस्थितियों की गहनता से जांच कर रही है, जिनके चलते किशोरी ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया। जांच अधिकारियों ने इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया है कि आरोपी के खिलाफ गवाही देने के बाद किशोरी भारी मानसिक तनाव से गुजर रही होगी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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