जोधपुर में दलित नेता 'विद्रोही' का अनोखा सत्याग्रह: गैर-वाल्मीकि सफाईकर्मियों को मूल सफाई कार्य में लगाने तक चप्पल-शर्ट नहीं पहनेंगे!

प्रकाश सिंह विद्रोही ने ' द मूकनायक' को बताया, "गैर-वाल्मीकि कर्मचारी सफाई का मूल काम नहीं कर रहे, सारा भार वाल्मीकि समाज पर आ जाता है। इससे समुदाय में रोष है।
विद्रोही ने एलान किया है कि जब तक गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को मूल सफाई कार्य पर लगाने का लिखित समझौता लागू नहीं करते, तब तक कपड़े-चप्पल नहीं पहनूंगा।
विद्रोही ने एलान किया है कि जब तक गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को मूल सफाई कार्य पर लगाने का लिखित समझौता लागू नहीं करते, तब तक कपड़े-चप्पल नहीं पहनूंगा।
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जोधपुर- जोधपुर नगर निगम में सफाईकर्मियों में पिछले एक माह से रोष है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अब कड़ाके की ठंड में एक अनोखे रूप ले चुका है। संगठन के जिलाध्यक्ष सरदार प्रकाश सिंह 'विद्रोही' ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर नागौरी गेट चौराहे पर बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने अर्धनग्न होकर नंगे पांव धरना दे दिया। उनका ऐलान है- "जब तक निगम आयुक्त 2018 के गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को मूल सफाई कार्य पर लगाने का लिखित समझौता लागू नहीं करते, तब तक कपड़े-चप्पल नहीं पहनूंगा।" यह प्रदर्शन न केवल सफाईकर्मियों की तीन सूत्रीय मांगों को बल दे रहा है, बल्कि वाल्मीकि समाज पर बढ़ते बोझ के खिलाफ एक सशक्त संदेश भी बन रहा है।

जोधपुर में करीब 3300 सफाईकर्मी हैं, जिनमें 700 गैर-वाल्मीकि समुदाय से हैं। इन गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को सफाई के मूल कार्य से हटाकर अन्य जिम्मेदारियों में लगाया जा रहा है, जिसका पूरा बोझ वाल्मीकि समाज के कर्मचारियों पर आ गया है। पहले 60 वार्डों का दायरा अब बढ़कर 100 हो गया है, जिससे काम का दबाव दोगुना हो गया। 15 नवंबर को निगम प्रशासन ने 2000 सफाईकर्मियों के वार्ड एकाएक बदल दिए, जिसके खिलाफ विरोध की आग भड़क उठी।

प्रकाश सिंह विद्रोही ने ' द मूकनायक' को बताया, "गैर-वाल्मीकि कर्मचारी सफाई का मूल काम नहीं कर रहे, सारा भार वाल्मीकि समाज पर आ जाता है। इससे समुदाय में रोष है। निगम आयुक्त सिद्धार्थ पलानीचामी ने जनप्रतिनिधियों की बात भी नहीं सुनी।" कुछ दिन पहले विधायक अतुल भंसाली और देवेंद्र जोशी की मौजूदगी में हुए समझौते में सभी कर्मचारियों को मूल पद पर बहाल करने और महिलाओं-दिव्यांगों को निकटतम वार्ड में तैनाती का वादा किया गया था, लेकिन उसकी पालना नहीं हुई।

आंदोलन की शुरुआत गुरुवार को निगम कार्यालय में हाई-वोल्टेज हंगामे से हुई। संगठन और आयुक्त के बीच दो दौर की वार्ता विफल रही, जिसके बाद कई घंटों की खींचतान के बावजूद सहमति न बन पाई। शुक्रवार को वाल्मीकि संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले निगम आयुक्त के कार्यालय के बाहर धरना शुरू हो गया। मुख्य द्वार पर पुलिस तैनात थी, ताकि आंदोलनकारी अंदर न घुस सकें। पूरे दिन नेताओं ने निगम की कार्यशैली पर नारेबाजी की और सवाल खड़े किए।

अनिल तेजी ने बताया कि तीन सूत्रीय मांगें हैं- (1) 2000 कर्मचारियों के वार्ड परिवर्तन रद्द करें, (2) 2018 के प्रभारी पद निरस्त करें, (3) 700 गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को मूल सफाई कार्य पर लगाएं। नरेश कंडारा ने चेतावनी दी, "मांगे न मानी गईं तो झाड़ू डाउन हड़ताल करेंगे।" शनिवार को ठंडी के बीच विद्रोही का अर्धनग्न सत्याग्रह आंदोलन का नया मोड़ बना। यह आंदोलन न केवल सफाईकर्मियों के अधिकारों की लड़ाई है, बल्कि वाल्मीकि समाज की गरिमा और समानता का सवाल भी।

विद्रोही ने एलान किया है कि जब तक गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को मूल सफाई कार्य पर लगाने का लिखित समझौता लागू नहीं करते, तब तक कपड़े-चप्पल नहीं पहनूंगा।
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विद्रोही ने एलान किया है कि जब तक गैर-वाल्मीकि कर्मचारियों को मूल सफाई कार्य पर लगाने का लिखित समझौता लागू नहीं करते, तब तक कपड़े-चप्पल नहीं पहनूंगा।
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