MP के शाजापुर में दलित परिवार की शादी में दूल्हे निकासी के दौरान रोका, चार आरोपियों के खिलाफ SC-ST एक्ट में केस दर्ज

एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत जातिसूचक गालियां देना, दलित बारात या सम्मान से जुड़े किसी भी कार्यक्रम को रोकना-टोकना, तथा सामूहिक मारपीट या धमकी देना, गंभीर और गैर-जमानती अपराध माने जाते हैं।
MP के शाजापुर में दलित परिवार की शादी में दूल्हे निकासी के दौरान रोका, चार आरोपियों के खिलाफ SC-ST एक्ट में केस दर्ज
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भोपाल। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के पतौली गांव में शनिवार रात एक दलित परिवार की शादी में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब वर निकासी के दौरान गांव के कुछ लोगों ने रास्ते में विवाद खड़ा कर दिया। दलित दूल्हे की बारात जैसे ही जुलूस के रूप में आगे बढ़ी, वैसे ही कुछ मनुवादियों ने बारात को रोकने का प्रयास करने लगे। इसी बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट और कथित जातिसूचक गालियों तक पहुंच गई। घटना की सूचना मिलते ही लालघाटी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। दूल्हे के छोटे भाई की शिकायत पर चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, पतौली गांव में रहने वाले जितेंद्र परमार (दलित) की बारात शनिवार रात मक्सी के लिए रवाना हो रही थी। परंपरा के अनुसार दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर निकाला जा रहा था। जैसे ही जुलूस मुख्य मार्ग से आगे बढ़ा, गांव के ही कुछ लोगों ने टोकाटाकी करते हुए दूल्हे पक्ष से कहासुनी शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दलित दूल्हे के घोड़ी पर बैठने को लेकर पहले भी गांव में कुछ लोगों की नाराजगी थी। वर निकासी के समय वही तनाव फिर उभर आया। बहस इतनी बढ़ गई कि मामला धक्का-मुक्की और मारपीट तक पहुंच गया। दूल्हा पक्ष के लोगों ने किसी तरह दूल्हे को सुरक्षित किनारे किया, लेकिन विवाद बढ़ता गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

दलित दूल्हे के परिवार का आरोप

दूल्हे के छोटे भाई ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि भीड़ में शामिल गांव के भारत सिंह, नरेंद्र सिंह, विजेंद्र सिंह और लाल सिंह ने न सिर्फ मारपीट की बल्कि जातिसूचक गालियां देकर अपमानित भी किया। शिकायत में कहा गया है कि "दलित बारात को रोकने की नीयत से विवाद खड़ा किया गया और दूल्हे को घोड़ी से नीचे उतारने का दवाब बनाया गया।"

चार आरोपियों पर केस दर्ज

शिकायत के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

लालघाटी थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुजाल्दे ने द मूकनायक से बातचीत में बताया कि यह घटना स्पष्ट रूप से जातिवाद से जुड़ा मामला है। अनुसूचित जाति समुदाय के दूल्हे को घोड़ी पर बैठकर वरमाला के लिए निकलने से कुछ लोगों ने आपत्ति की और इसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। टीआई मुजाल्दे ने बताया कि पुलिस जैसे ही सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची, आरोपी वहां से फरार हो गए थे।

उन्होंने कहा- “मामले की गंभीरता को देखते हुए SC/ST अत्‍याचार अधिनियम सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों की तलाश जारी है, और जल्द ही सभी को गिरफ्तार किया जाएगा।”

दलित परिवार में आक्रोश

शादी जैसे मौके पर हुए विवाद ने दलित परिवार को दुखी और आहत कर दिया है। परिवार का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव और पुरानी मानसिकता से जुड़ा है। ग्रामीणों में भी घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है। कई लोगों ने इसे समाज में मौजूद संवेदनशीलता और जातिगत तनाव का उदाहरण बताया।

आजाद समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष राजेश गोयल ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि क्षेत्र में कुछ मनुवादी सोच रखने वाले लोग लंबे समय से अत्याचार करते आए हैं। दलित परिवारों के सम्मान और परंपराओं से उन्हें आपत्ति रहती है, इसलिए जब भी दलित दूल्हा घोड़ी पर चढ़कर बारात निकालता है, वे बौखला जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, ऐसी मानसिकता बार-बार हिंसा को जन्म देती है।

गोयल ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है, लेकिन केवल केस दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करे और उन्हें ऐसी सख्त सजा दी जाए जिससे भविष्य में कोई भी दलित समुदाय के सम्मान पर हमला करने की हिम्मत न कर सके।

कानूनी प्रावधान

एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत जातिसूचक गालियां देना, दलित बारात या सम्मान से जुड़े किसी भी कार्यक्रम को रोकना-टोकना, तथा सामूहिक मारपीट या धमकी देना, गंभीर और गैर-जमानती अपराध माने जाते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों को जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। जातिसूचक अपमान पर तत्काल गिरफ्तारी और कठोर दंड का प्रावधान है, वहीं बारात रोकना या सामाजिक सम्मान में बाधा डालना कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सामूहिक मारपीट या धमकी देने पर दोषसिद्धि की स्थिति में 1 से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, जिसके अनुसार कार्रवाई की जाती है।

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