
नई दिल्ली- दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन टी.सी.ए. रंगाचारी ने इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रतन लाल को शो कॉज नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन पर कॉलेज का नाम बदनाम करने, अनुशासनहीनता और अवज्ञा के आरोप लगाए गए हैं। प्रो रतनलाल प्रमुख दलित विचारक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने जाति, मानवाधिकार और लिंग सहित विभिन्न आधुनिक राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर हिंदी प्रकाशनों और सोशल मीडिया साइटों पर व्याख्यान दिए और विभिन्न निबंध भी लिखे हैं और भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार, पुरातत्व के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के विद्वान् एवं हिन्दी साहित्यकार काशी प्रसाद जायसवाल के कार्यों के तीन-खंड संग्रह के संपादक के साथ-साथ "और कितने रोहित?" के लेखक भी हैं।
गवर्निंग बॉडी चेयरमैन की ओर से भेजे नोटिस में कहा गया है कि 7 सितंबर 2026 को हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में डॉ. रतन लाल के हालिया बयानों पर गहरी चिंता जताई गई। 18 अगस्त 2026 के बयान और उसके बाद के संदेशों में उन्होंने प्रिंसिपल की 'स्पष्ट निंदा' की, 'प्रिंसिपल पर अविश्वास' जताया, 'हमारे कॉलेज के प्रिंसिपल की संदिग्ध भूमिका' का जिक्र किया, 'कॉलेज के वैधानिक निकायों को धोखा दिया, गुमराह किया और दबाव डाला' तथा 'प्रक्रियाओं, नियमों के घोर उल्लंघन और संभावित भ्रष्ट आचरण के जरिए दाखिले पूरे किए' जैसे आरोप लगाए।
नोटिस में आगे लिखा है कि उन्होंने मीडिया समेत बाहरी एजेंसियों को बयान जारी किए और विश्वविद्यालय के इस स्पष्टीकरण के बावजूद आरोप दोहराते रहे कि दाखिले विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूचियों के आधार पर हुए और कोई गलती हो तो वह विश्वविद्यालय स्तर पर एल्गोरिदम की गड़बड़ी के कारण थी। उन्होंने मीडिया को बयान दिए और विश्वविद्यालय तथा कॉलेज के उच्च अधिकारियों के पास मुद्दा उठाया।
गवर्निंग बॉडी का कहना है कि इससे कॉलेज की संस्थागत छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेवा नियमों और पेशेवर नैतिकता संहिता का उल्लंघन हुआ है, जिसमें शिक्षकों से सहयोग, सम्मानजनक व्यवहार और बिना आधार के आरोप न लगाने की अपेक्षा की जाती है। उनके आचरण को कॉलेज के आंतरिक अनुशासन के लिए नुकसानदेह और शिक्षक के रूप में अनुचित बताया गया है।
नोटिस में डॉ. रतन लाल को सात कार्यदिवसों के अंदर लिखित जवाब देने को कहा गया है कि क्यों उनके खिलाफ घोर कदाचार, अनुशासनहीनता और अवज्ञा के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए। समय पर जवाब न मिलने पर इसे आरोपों से सहमति माना जाएगा और नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। नोटिस पर टी.सी.ए. रंगाचारी के हस्ताक्षर हैं।
प्रो रतनलाल ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया हेंडल पर नोटिस को पोस्ट करते हुए लिखा कि, "आज हिंदू कॉलेज का कोई स्टाफ घर पर मेरे निजी स्टाफ को देकर गया है। ध्यान से पढ़िए 8 सितंबर की चिट्ठी है, आज देकर गया है। हिंदू कॉलेज के निजीकरण का एक और उदाहरण। अब इस कॉलेज को प्रिंसिपल की जरूरत नहीं, चेयरमैन ही चलाएगा. दिल्ली विश्वविद्यालय के क़ानून के हिसाब से क्या चेयरमैन शो कॉज जारी कर सकता है? और वह भी स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष को, निजी नाम से?"
इस नोटिस पर कांग्रेस ओबीसी सेल के प्रमुख डॉ. अनिल जयहिंद ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “मनुवादी को बर्दाश्त नहीं, रीढ़ वाला दलित। ऐसे मनुवादियों की स्वतंत्र भारत में कोई जगह नहीं है। कार्रवाई हो।”
मामला कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन द्वारा प्रिंसिपल अंजु श्रीवास्तव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें स्पोर्ट्स और ईसीए कोटा के दाखिलों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था। नोटिस में दिए गए तथ्यों के अनुसार यह कार्रवाई उन्हीं बयानों पर आधारित है।
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