
उत्तर प्रदेश: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) पर्यवेक्षक राकेश चंद्रवंशी ने गुरुवार को कहा कि मंडल कमीशन लागू हुए 33 साल बीत चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश का अति पिछड़ा वर्ग आज भी अपने वास्तविक सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण से पूरी तरह वंचित है। उन्होंने समुदाय की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान चंद्रवंशी ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की कुल आबादी में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद, पंचायत से लेकर संसद तक इस समुदाय का आनुपातिक प्रतिनिधित्व नदारद है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों और आदर्शों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने समुदाय के उत्थान के लिए पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं। इन मांगों में एक राज्य स्तरीय ईबीसी आयोग का गठन, पंचायत और निकाय चुनावों में आबादी के आधार पर आरक्षण, अति पिछड़ा वर्ग अत्याचार निवारण कानून लागू करना, ईबीसी वित्त एवं विकास निगम की स्थापना और राज्य सरकार की नौकरियों में 15 प्रतिशत कोटा सुनिश्चित करना शामिल है।
इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में अति पिछड़ा वर्ग के लिए सम्मानजनक प्रतिनिधित्व की जोरदार वकालत की। इसके साथ ही, ओबीसी कांग्रेस नेताओं ने भी स्थानीय निकाय चुनावों में ईबीसी सदस्यों की व्यापक उम्मीदवारी सुनिश्चित करने की अपील की।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में इस वर्ग के अधिकारों, सम्मान, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
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