
धनबाद/झारखंड: आगामी निकाय चुनावों की सुगबुगाहट के बीच धनबाद नगर निगम सीट को अनारक्षित (डी-रिजर्व) करने के सरकारी फैसले के खिलाफ दलित समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार को इस मुद्दे को लेकर समाज के सैकड़ों लोगों ने रणधीर वर्मा चौक पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया और आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि वर्ष 2011 की जातिगत जनगणना के आधार पर धनबाद नगर निगम की सीट को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था। लेकिन, हाल ही में सरकार ने इसे अनारक्षित घोषित कर दिया है, जिससे दलित समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। आंदोलनकारियों ने इस कदम को उनके संवैधानिक अधिकारों पर कुठाराघात और स्थानीय शासन में उनके सामाजिक प्रतिनिधित्व को खत्म करने की साजिश करार दिया।
सरकार के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि प्रशासन स्थापित नियमों की अनदेखी कर सामाजिक न्याय को कमजोर कर रहा है। उनका कहना था कि डी-रिजर्वेशन के इस फैसले ने दलित समाज की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया है और इससे नगर प्रशासन में उनकी राजनीतिक भागीदारी कमजोर होने का खतरा है।
मामला हाईकोर्ट में, फैसला सुरक्षित
भीड़ को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शांतनु चंद्रा, जिन्हें लोग बबलू पासवान के नाम से भी जानते हैं, ने बताया कि इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए रांची हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
"अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे"
शांतनु चंद्रा ने आगे कहा कि समुदाय को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि परिणाम उनके पक्ष में आएगा। हालांकि, उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता और यह फैसला पलट नहीं दिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, "हम न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही हम अन्याय के खिलाफ चुप भी नहीं बैठेंगे।"
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, जहाँ सभी ने अपने अधिकारों के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों तरीकों से लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया।
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